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किसानों के खिलाफ भड़काऊ वीडियो को लेकर CM मनोहर खट्टर मुश्किल में, कोर्ट में अर्जी दायर, FIR दर्ज करने की मांग

किसानों के खिलाफ भड़काऊ वीडियो को लेकर CM मनोहर खट्टर मुश्किल में, कोर्ट में अर्जी दायर, FIR दर्ज करने की मांग

दिल्‍ली एक अदालत में याचिका दायर कर सीएम खट्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है. (फाइल फोटो)

दिल्‍ली एक अदालत में याचिका दायर कर सीएम खट्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है. (फाइल फोटो)

एडवोकेट अमित साहनी ने याचिका में कहा, 'मुख्‍यमंत्री खट्टर (Manohar Lal Khattar) के बयान का लहजा और तरीका स्वतः स्पष्ट है और उन्‍हें संवैधानिक पद पर होने के कारण दुश्मनी, नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. इस वीडियो में इस तरह की अभद्र भाषा और मौजूदा मुख्यमंत्री जैसे सरकारी पदाधिकारी द्वारा अपनी पूरी क्षमता से उकसाने से आंदोलन तेज हो सकता था और दिल्ली और एनसीआर में कानून-व्यवस्था खराब होने की स्थिति पैदा हो सकती थी.

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नई दिल्‍ली : पिछले दिनों वायरल हुए एक वीडियो, जिसमें हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) एक बैठक में बीजेपी (BJP) कार्यकर्ताओं से आंदोलनरत किसानों के खिलाफ लठ्ठ उठा लेने और ‘जैसे को तैसा’ की नीति अपनाने सरीखी बातें कहते नज़र आए, उसे लेकर वह मुश्किल में फंस सकते हैं. इसको लेकर दिल्‍ली की एक अदालत में याचिका दायर कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है. याचिका में कहा गया है कि अदालत द्वारा संबंधित पुलिस अधिकारियों को मामले की जांच करने और खट्टर एवं अन्‍य आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 109,; 153, 153ए तथा 505 के तहत केस दर्ज करने के आदेश दिए जाएं. इस याचिका पर एसीएमएम सचिन गुप्‍ता की अदालत कल सुनवाई करेगी.

सामाजिक कार्यकर्ता एवं वकील अमित साहनी (Social Activist and Lawyer Amit Sahni) ने राउज एवेन्‍यू कोर्ट (Rouse Avenue Court) में दायर अपनी अर्जी में कहा, हरियाणा के मुख्यमंत्री का 03-10-2021 को चंडीगढ़ में अपने आवास पर भाजपा किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक का एक विवादास्पद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसमें वह कहते नज़र आए, ‘कुछ नए किसानों के जो संगठन और उभर रहे हैं, उनको भी प्रोत्‍साहन देना पड़ेगा, उनको आगे चलाना पड़ेगा. और अगर हर जिले में खासकर उत्‍तर और पश्चिम हरियाणा के, दक्षिण हरियाणा में ये समस्‍या ज्‍यादा नहीं है, लेकिन उत्‍तर और पश्चिम हरियाणा के हर जिले में अपने किसानों के 500, 700, 1000 लोग आप लोग अपने खड़े करो, उनको वॉलंटियर बनाओ’. वह आगे कहते हैं, ‘और फ‍िर जगह-जगह ‘सठे साठयम समाचरेत’, (पूछते हैं क्‍या अर्थ होता है इसका), अंग्रेजी में बता दिया ना हिंदी में बताओ, यानि जैसे को तैसा. ठा लो डंडे, ठीक है’.

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उन्‍होंने अर्जी में आगे कहा कि वीडियो में मुख्‍यमंत्री खट्टर आगे कहते दिखे कि ‘नहीं वो देख लेंगे और दूसरी बात ये है कि जब ठा लोगे डंडे तो जमानत की परवाह मत करो. छह महीने, दो महीने जेल में रह आओगे ना, तो इतनी पढाई इस मीटिंग में नहीं होगी, दो-चार महीने वहां रह आओगे तो अपने आप बड़े लीडर बन जाओगे. नहीं, नहीं दो चार महीने में अपने आप बड़े नेता बन जाओगे, चिंता मत करो. ये इतिहास में नाम लिखा जाता है. इसमें एक ही बात ध्‍यान रखनी है जोश के साथ अनुशासन को बनाकर रखना है. जो सूचना मिल गई, यहां तक करना है, इसके आगे नहीं करना, तो नहीं करना’.

उन्‍होंने अर्जी में कहा कि उपरोक्त वीडियो से यह स्पष्ट होता है कि हरियाणा राज्य के मुखिया अपनी पार्टी के सदस्यों को किसानों के खिलाफ खड़े होने के लिए उकसा रहे हैं और ऐसा बयान देकर उन्‍होंने आईपीसी की धारा 153/153A/505 के तहत अपराध किया है. साथ ही यह कि एमएल खट्टर ने कार्यकर्ताओं को बताए गए निर्देशों का कड़ाई से पालन करने पर जोर देते हुए, आपराधिक बल का इस्तेमाल करने के लिए उकसाया. इससे पहले ही हरियाणा के एक आईएएस अधिकारी आयुष सिन्हा ने किसानों के “सिर फोड़ने” का एक विवादित बयान दिया था.

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एडवोकेट अमित साहनी ने याचिका में कहा, ‘मुख्‍यमंत्री खट्टर के बयान का लहजा और तरीका स्वतः स्पष्ट है और उन्‍हें संवैधानिक पद पर होने के कारण दुश्मनी, नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. इस वीडियो में इस तरह की अभद्र भाषा और मौजूदा मुख्यमंत्री जैसे सरकारी पदाधिकारी द्वारा अपनी पूरी क्षमता से उकसाने से आंदोलन तेज हो सकता था और दिल्ली और एनसीआर में कानून-व्यवस्था खराब होने की स्थिति पैदा हो सकती थी. मीडिया रिपोर्टों से यह भी पता चला कि वीडियो में उनकी भाषा के बाद विभिन्न सामाजिक हलकों में अशांति फैल गई थी’.

याचिका में आगे बताया गया कि उनकी तरफ से बीते 23 अक्‍टूबर को डीसीपी, ज्‍वॉइंट कमिश्‍नर एवं स्‍पेशल कमिश्‍नर (क्राइम ब्रांच) को इस बाबत शिकायत दी गई थी, लेकिन आरोपी व्यक्तियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. लिहाजा, किसी राजनेता द्वारा नफरत फैलाने की हालिया प्रवृत्ति हमारे लोकतांत्रिक देश में स्वीकार्य नहीं है और इस तरह की टिप्पणी करने वाले किसी भी व्यक्ति से सबसे सख्त तरीके से निपटा जाना चाहिए. इसलिए खट्टर एवं अन्‍य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उचित जांच के निर्देश जारी किए जाएं.

Tags: Delhi Court, Haryana news, Manohar Lal Khattar

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