कोयला घोटाला मामला: पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय को बड़ी राहत, दिल्ली हाईकोर्ट ने सजा को किया निलंबित

ओडिशा के रहने वाले दिलीप राय अटल बिहारी की सरकार में कोयला राज्य मंत्री थे. (फाइल फोटो)
ओडिशा के रहने वाले दिलीप राय अटल बिहारी की सरकार में कोयला राज्य मंत्री थे. (फाइल फोटो)

सीबीआई कोर्ट (CBI Court) ने झारखंड में जुड़े कोयला खदान आवंटन में अनियमितता के एक मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय (Dilip Ray) को सोमवार को 3 साल की सजा सुनाई थी. एक दिन बाद दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High court) ने इस सजा को निलंबित कर दिया.

  • News18.com
  • Last Updated: October 27, 2020, 10:42 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High court) ने कोयला घोटाला (Coal Scam) मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय (Dilip Ray) को बड़ी राहत दी है. हाईकोर्ट ने दिलीप राय को इस मामले में मिली 3 साल की सजा को सस्पेंड कर दिया है. दिल्ली की स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने झारखंड में साल 1999 में कोयला खदान आवंटन में अनियमितता से जुड़े एक मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय को सोमवार को 3 साल कैद की सजा सुनाई थी. दिलीप राय अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में कोयला राज्य मंत्री थे.

मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई कोर्ट ने कहा कि सफेदपोशों द्वारा किए जाने वाला अपराध साधारण लोगों द्वारा किए जाने वाले अपराधों से अधिक खतरनाक है, क्योंकि इससे जनता के मनोबल पर काफी असर पड़ता है.

सीबीआई कोर्ट ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री के अलावा कोयला मंत्रालय के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्यानंद गौतम और कैस्ट्रोल टेक्नोलॉजी लिमिटेड के निदेशक महेंद्र कुमार अग्रवाल को भी सजा सुनाई. बनर्जी और गौतम की उम्र अभी लगभग 80 साल और महेंद्र अग्रवाल की उम्र 75 साल की हो चुकी है. सजा सुनाने के बाद सीबीआई कोर्ट ने इनलोगों को जमानत दे दी, जिससे ये लोग फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर सके.



दोषियों पर जुर्माना भी लगाये गये 
बता दें कि कोर्ट ने राय पर 10 लाख रुपए, बनर्जी और गौतम पर 2-2 लाख रुपये और महेंद्र अग्रवाल पर 60 लाख का जुर्माना भी लगाया. सीबीआई कोर्ट ने उम्र को देखते हुए प्रोबेशन पर रिहा करने के दोषियों के आग्रह को खारिज कर दिया. दोषियों ने अदालत से आग्रह किया था कि उनकी वृद्धावस्था को देखते हुए उनके प्रति उदार रुख अपनाया जाए. सीबीआई की ओर से पेश लोक अभियोजक वीके शर्मा और एपी सिंह ने दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी.
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