दलित बच्चियों से रेप पर BJP मुखर, SC आयोग पहुंचकर गहलोत सरकार पर लगाए ये गंभीर आरोप  

राजस्थान में महिला उत्पीडऩ और रेप के मामलों पर एससीएसटी आयोग पहुंची भाजपा

राजस्थान में महिला उत्पीडऩ और रेप के मामलों पर एससीएसटी आयोग पहुंची भाजपा

राजस्थान बीजेपी का डेलिगेशन ने सोमवार को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग पहुंच कर आयोग के चेयर पर्सन विजय सापला को ज्ञापन दिया. उन्होंने राजस्थान में दलितों के उत्पीडऩ और रेप की घटनाओं पर कार्रवाई करने की मांग उठाई है. इस दौना राजस्थान सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया कि वह दलित बच्चियों से रेप होने के बाद मामलों को दबा रही है.

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नई दिल्ली. राजस्थान ( Rajasthan) में दलित महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार और रेप के बढ़ते मामलों को भाजपा ने मुद्दा बनाया है. इसको लेकर राजस्थान बीजेपी का डेलिगेशन ने सोमवार को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ( National Scheduled Castes Commission) पहुंच कर आयोग के चेयर पर्सन विजय सापला ( Vijay Sapla) को ज्ञापन दिया. उन्होंने राजस्थान में दलितों के उत्पीडऩ और रेप की घटनाओं पर कार्रवाई करने की मांग उठाई है. इस दौना राजस्थान सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया कि वह दलित बच्चियों से रेप होने के बाद मामलों को दबा रही है. उनके परिवार पर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है.

दरअसल, राजस्थान में इन दिनों महिलाओं और नाबालिग बच्चों के साथ उत्पीडऩ और रेप की घटनाएं बढ़ गई हैं. इसी को लेकर बीजेपी इसके विरोध में सक्रिय हो गई है. भाजपा राजस्थान का यही डेलिगेशन बीते 24 मार्च को राष्ट्रीय महिला आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से मिला था. बीजेपी की राष्ट्रीय सचिव डॉ. अलका गुर्जर के नेतृत्व में राजस्थान बीजेपी का डेलिगेशन 10.30 बजे खान मार्केट स्थित लोक नायक भवन पहुंचा और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरपर्सन विजय सांपला को ज्ञापन सौंपा. डेलिगेशन में राजस्थान बीजेपी महिला मोर्चा की अध्यक्ष अलका मूंदड़ा, अजमेर नगर निगम की महापौर बृजलाता हाड़ा, प्रदेश मंत्री जितेंद्र गोठवाल, विधायक चंद्रकांता मेघवाल शामिल रहीं.

दलित बच्चियों से हो किया जा रहा रेप

आयोग की चेयरपर्सन विजय सापला से मुलाकात के बाद बीजेपी की राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर ने न्यूज 18 से खास बातचीत में कहा कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के सामने राजस्थान में महिलाओं के साथ हो रही अपराधिक घटनाओं को रखा है. वर्तमान समय में प्रदेश में दलित महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के साथ जो घटनाएं घट रही हैं यह सब चिंता का विषय हैं. इसी वजह से अनसूचित जाति आयोग के चेयरपर्सन विजय सापला को ज्ञापन सौंपकर एक्शन लेने की अपील की है. सबसे दुखद है प्रदेश में रेप की घटनाओं में दलित बच्चियों को टारगेट किया जा रहा है.
राजस्थान में एक दिन पहले ही शाम को एसटी वर्ग की तीन बच्चियों के साथ रेप के बाद उनकी हत्या कर दी गई. उन्होंने कहा कि राजस्थान महिला अपराध में नंबर वन है. मुख्यमंत्री तुष्टिकरण की राजनीति में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि इन घटनाओं पर आयोग नोटिस कर रहा है, लेकिन सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रहा है. इसके लिए हम मुख्यमंत्री से यही अपील करते हैं कि वे गृह मंत्री की कुर्सी छोड़ दें.

पीडि़त पर दबाव बनाकर मुकादमा वापस लेने का आरोप

भाजपा के डेलिगेशन में शामिल नेताओं का कहना है कि राजस्थान की बच्चियों को स्वाभिमान और सम्मान की जिंदगी जीने का अधिकार मिलना चाहिए. वहीं डेलिगेशन में मौजूद  प्रदेश महिला मोर्चा की अध्यक्ष अलका मूंदड़ा ने आरोप लगाया कि सरकार के मंत्री और सरकार के लोग पीडि़त पक्ष पर दबाव बनाते हैं कि वह केस वापस ले लें. इसके लिए प्रलोभन भी दिया जाता है. अजमेर नगर निगम की महापौर बृज लता हाड़ा ने कहा  राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है.



कांग्रेस ने बताया भाजपा का चुनावी स्टंट

राजस्थान बीजेपी की महिला विंग के इस कदम को देखते हुए राजस्थान कांग्रेस के नेता नीरज डांगी का कहना है  कि प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हर घटनाक्रम को रोकने के लिए एक्शन में है. कानून व्यवस्था तत्परता से काम कर रही है. जो भी दोषी हैं उनके ऊपर कार्यवाही की जा रही है. दोषियों को प्रदेश सरकार छोडऩे वाली नहीं है चाहे वह कोई भी हो. ऐसे में बीजेपी के इस डेलिगेशन का राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग से मिलने का कोई मतलब नहीं है. प्रदेश में 3 सीटों पर उप चुनाव हो रहा है. चुनाव को देखते हुए बीजेपी का  यह डेलिगेशन आयोग आयोग घूम रहा है.  यह सब माहौल बिगाडऩे का काम है. इससे भारतीय जनता पार्टी को जीत मिलने वाली नहीं है.

कांग्रेस के जवाब में बोले भाजपा नेता गोठवाल

कांग्रेस के इस स्टेटमेंट पर बीजेपी प्रदेश मंत्री जितेंद्र गोठवाल ने इसे चोर की दाड़ी में तिनका बताया है. उन्होंने कहा कि इस सरकार ने पूरे राजस्थान के लोगों को शर्मसार कर दिया है. ऐसा माहौल बन गया है कि मासूम बच्चियां सुरक्षित नहीं हैं. सरकार सुशासन दे देती तो हमें ज्ञापन देने की जरूरत नहीं पड़ती. यह सरकार सुशासन देने में फेल है.

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