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MCD Election 2022: ट्राेमल मशीनों के सालाना किराये मामले पर BJP-AAP में टकराव, सरकार से ऑडिट कराने की तैयारी!

आम आदमी पार्टी ने अब निगम भाजपा को कूड़ा निस्तारण के लिए ट्राेमल मशीनों के लिये सालाना किराया लाखों की बजाय करोड़ों में देने के मामले में घेरने की तैयारी कर ली है.

MCD Election 2022: सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा शासित नॉर्थ एमसीडी ने नए कॉन्ट्रैक्ट के तहत ली जा रही एक मशीन का किराया 6.30 रुपए लाख से बढ़ाकर 18.36 लाख रुपए कर दिया है. मात्र 17.70 लाख रुपए कीमत की मशीन का सालाना किराया 2.20 करोड़ रुपए कैसे हो सकता है? AAP ने दिल्ली सरकार से स्पेशल ऑडिट करवाने का निर्णय लिया है.

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    नई दिल्ली. आगामी दिल्ली नगर निगम चुनावों (MCD Election) को लेकर अब राजनीति और तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी (Aam Adami Party) हर रोज नए खुलासे कर भाजपा (BJP) शासित निगम पर पूरी तरह से हमलावर है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने अब निगम भाजपा को कूड़ा निस्तारण के लिए ट्राेमल मशीनों (Trommel Machines) के लिये सालाना किराया लाखों की बजाय करोड़ों में देने के मामले में घेरने की तैयारी कर ली है. करीब 18 लाख रुपए कीमत की ट्राेमल मशीनों का सालाना किराया करोड़ों में देने पर भाजपा को कटघरे में खड़ा कर दिया.

    आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bhardwaj) ने कहा कि भाजपा शासित एमसीडी (MCD) की दिल्ली सरकार (Delhi Government) से स्पेशल ऑडिट करवाएंगे, ताकि हो रहा भ्रष्टाचार उजागर हो सके.

    उन्होंने कहा कि नए कॉन्ट्रैक्ट के तहत ली जा रहीं एक मशीन का किराया 6.30 रुपए लाख से बढ़ाकर 18.36 लाख रुपए किया जा रहा है. उन्होंने सवाल किया कि मात्र 17.70 लाख रुपए कीमत की मशीन का सालाना किराया 2.20 करोड़ रुपए कैसे हो सकता है?

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    आम आदमी पार्टी का कहना है कि नार्थ एमसीडी (North MCD) द्वारा जिस रेट पर ट्राेमल मशीनों को किराए पर लिया जा रहा है, उसके संदर्भ में एमसीडी की ही ऑडिट रिपोर्ट में सवाल उठाए गए थे. जब एक ट्राेमल मशीन का महीने का किराया 6.30 लाख रुपए था, तब भी उस पर उन्हीं के ऑडिट द्वारा सवाल उठाए जा रहे थे कि यह पैसा ज्यादा है. अब जो नए कॉन्ट्रैक्ट के तहत ये ट्राेमल मशीनों को किराए पर लेने जा रहे हैं, उसमें यह किराया 6.30 लाख रुपए से बढ़ाकर 18.36 लाख रुपए किया जा रहा है. यानी कि ट्राेमल मशीनों का किराया तीन गुना बढ़ाया जा रहा है.

    निगम एक मशीन का एक महीने में देगी 18.36 लाख रुपए किराया
    भारद्वाज का कहना है कि 306 रुपए प्रति टन के हिसाब से कूड़े का निस्तारण किया जाएगा. एक महीने में, एक मशीन कम से कम 6,000 टन कूड़े का निस्तारण करेगी. इस तरह, 306 गुणा 6000 करते हैं, तो 18.36 लाख रुपए कम से कम बनता है. इस तरह निगम एक मशीन का एक महीने में कम से कम 18.36 लाख रुपए किराया देगी.

    सौरभ भारद्वाज ने कहा कि स्टैंडिंग कमेटी का जो एजेंडा छपा है, उसमें साफ-साफ लिखा हुआ है कि कचरा जलाने योग्य कचरे आरडीएफ तथा एसएनबी कचरे के लिए अपेक्षित कचरा पृथक्करण ट्राेमल मशीनरी किराए पर लेने के पश्चात निवेशी कचरे के बायोमाइनिंग एवं रेडिमेशन हेतु प्रति मीट्रिक दरें उद्धृरित करें. स्टैंडिंग कमिटी के अंदर इस प्रस्ताव को पास भी कर दिया गया है.

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    दिल्ली सरकार से करवाएंगे इस मामले का स्पेशल ऑडिट
    आप पार्टी की माने तो यह मशीन मात्र 17.70 लाख रुपए की है. एक मशीन जिसकी कीमत 17.70 लाख रुपए है, उसका महीने का किराया एमसीडी 18.36 लाख रुपए देगी. इसलिए पार्टी ने निर्णय लिया है कि नार्थ एमसीडी (North MCD) में आम आदमी पार्टी के नेता विपक्ष विकास गोयल सेक्शन-207 दिल्ली म्युनिसिपल कारपोरेशन एक्ट, अमेंडमेंट-2011 के तहत दिल्ली सरकार (Delhi Government) को अपनी शिकायत देंगे, ताकि दिल्ली सरकार एक विशेष ऑडिट करवाकर स्थिति स्पष्ट कर सकेगी.

    क्या‌ कहते हैं North MCD स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन
    नॉर्थ एमसीडी के स्टैंडिंग कमिटी चेयरमैन जोगी राम का कहना है कि ‘ट्राेमल मशीनों का कोई किराया नहीं दिया जा रहा है. निस्तारित किए गए कूड़े के 306 रुपए प्रति टन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा. 79 मशीनें यहां लगाने की योजना है. एक मशीन से कम से कम 6000 टन कूड़े का प्रतिमाह निस्तारण किया जाएगा.

    BJP ने कहा-ट्रोमल मशीन का किराया नहीं, ऑपरेशनल कॉस्ट है
    इस मामले पर दिल्ली भाजपा (Delhi BJP) के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है कि ट्रोमल मशीन (Trommel Machines) मामले में आम आदमी पार्टी ने आज एक साल में दूसरी बार जनता को गुमराह करने की कोशिश की है.

    वह जिसे ट्रोमल मशीन का किराया बताते हैं वह असल में किराया नहीं, उसका ऑपरेशन कास्ट है. निगम ट्रोमल मशीन किराये पर नहीं लेता और हमने गत वर्ष भी बताया था की निगम ट्रोमल मशीन रखरखाव के आधार पर लेता है. व्यवस्था यह है कि ट्रोमल मशीन तीन शिफ्ट में चलाई जाती है, उनके स्टाफ -डीजल एवं रखरखाव का सारा खर्च संबंधित कम्पनी वहन करती है.

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