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Rajasthan Political Crisis: सचिन पायलट और BJP के रिश्तों में आखिर कन्फ्यूजन कहां है?

सूत्रों के मुताबिक सचिन पायलट बीजेपी नेताओं के संपर्क में हैं. (File Photo)

सूत्रों के मुताबिक सचिन पायलट बीजेपी नेताओं के संपर्क में हैं. (File Photo)

Rajasthan Government Crisis : सचिन पायलट (Sachin Pilot) की सियासत बीजेपी (BJP) विरोधी विचारधारा की रही है. सचिन पायलट के पिता खांटी कांग्रेसी रहे हैं और सचिन उनके ही विरासत को आगे बढ़ा रहे है. ऐसे में वे अगर बीजेपी में आते है तो राजनीति में उन्हें बड़ा नुकसान पहुंच सकता है.

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दिल्ली. राजस्थान (Rajasthan) का सियासी घमासान और गहराता जा रहा है. सचिन पायलट (Sachin Pilot) के डिप्टी सीएम और पीसीसी चीफ के पद से हटावए जाने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है. कांग्रेस (Congress) की कार्रवाई के बाद माना जा रहा था कि सचिन पायलट भाजपा में शामिल हो सकते हैं. हालांकि, खबरें ये भी आ रही है कि पायलट ने खुद इन चर्चाओं पर ब्रेक लगाते हुए बीजेपी (BJP) जाने की बात को नकार दिया है. जिस आरोप की वजह से सचिन पायलट को कांग्रेस में इतनी फजीहत हुई है, बावजूद इसके आखिर सचिन पायलट और बीजेपी का रिश्ता क्यों परवान नही चढ़ पा रहा है, ये एक बड़ा सवाल है.

सचिन पायलट को लेकर काफी सवाल भी उठ रहे हैं. उप मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद भी कांग्रेस नेता सचिन पायलट एक ही बात बार-बार दोहरा रहे हैं कि वे बीजेपी में नहीं जाना चाहते. आखिर वजह है क्या?  क्या बीजेपी में शामिल न होकर सचिन अपनी पार्टी बनाकर राजस्थान में तीसरे मोर्चे को बल देंगे.

बीजेपी और सचिन पायलट के बीच कहां फंसी है पेच?

1. जानकारों के मुताबिक सचिन पायलट के खेमे में 18 से 20 विधायक है जिनमें अधिकांश विधायक बीजेपी के साथ जाने का विरोध कर रहे हैं.  यानी अगर सचिन पायलट खुद बीजेपी में शामिल होते है तो 10 से ज्यादा विधायक उनसे अलग होकर अशोक गहलोत खेमे में लौट सकते हैं

2. सचिन पायलट का अभी कई विधायक खुलकर समर्थन नहीं कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें ये डर सता रहा है कि वे बीजेपी में शामिल हो सकते है. फिलहाल वे विधायक अशोक गहलोत के साथ हैं, लेकिन जैसे ही ये साफ हो जाएगा कि सचिन अपनी पार्टी बना रहे है तो संभावना है कि अशोक गहलोत खेमे के कुछ विधायक का सीधा समर्थन सचिन पायलट को मिल जाए.

2. सचिन पायलट की सियासत बीजेपी विरोधी विचारधारा की रही है. सचिन पायलट के पिता खांटी कांग्रेसी रहे हैं और सचिन उनके ही विरासत को आगे बढ़ा रहे है. ऐसे में वे अगर बीजेपी में आते है तो राजनीति में उन्हें बड़ा नुकसान पहुंच सकता है.

3. पिछले एक साल से अशोक गहलोत इस बात का प्रचार प्रसार कर रहे है कि सचिन पायलट बीजेपी के कठपुतली की तरह काम कर रहे है. ऐसे में सचिन पायलट तत्काल अगर बीजेपी का दामन थामते है तो उन पर लगा ये इल्जाम सही साबित हो जाएगा, जो उनके लंबे करियर को खासा नुकसान पहुंचा सकता है.

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4. सचिन पायलट अगर बीजेपी से अलग रहकर अलग पार्टी बनाते है तो राजस्थान के जगनमोहन रेड्डी बन सकते हैं. उस सुरत में सचिन पायलट के साथ अशोक गहलोत खेमे में अभी शामिल कुछ विधयकों का भी खुलकर समर्थन मिल सकता है. साथ बीटीपी और हनुमान बेनीवाल की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के साथ बड़े थर्ड फ्रंट की नींव डाल सकते है, जबकि अगर वे बीजेपी में शामिल हुए तो उनकी व्यक्तिगत नेतृत्व की छवि को नुकसान पहुंचेगा.

5. अब बात करते है बीजेपी की. बीजेपी के बड़े नेता ये खुलकर जरूर कह रहे हैं कि सचिन पायलट का पार्टी में स्वागत है, लेकिन पार्टी सचिन पायलट के महत्वाकांक्षी मिजाज को बेहतर तरीके से जानते है. सचिन पायलट की महत्वाकांक्षा सूबे का मुख्यमंत्री बनने का है जो बीजेपी को कतई मंजूर नहीं होगा.

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6. इसके अलावा सचिन पायलट को बीजेपी में शामिल कराने को लेकर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ज्यादा उत्साहित नहीं है. या यूं कहें तो वे नहीं चाहती कि सचिन पायलट को बीजेपी में शामिल कराए जाए.

7. बीजेपी इस बात को भी जानती है कि बीजेपी के नाम के साथ सचिन पायलट का समर्थन फिलहाल राजस्थान की राजनीति में कुछ भी उलट फेर नहीं कर सकती है, क्यों बीजेपी के साथ के नाम पर सचिन पायलट के 10 से ज्यादा विधायक उनका साथ छोड़ देंगे.

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