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मोदी सरकार ने ब्लैक लिस्टेड कंपनी को प्लास्टिक के नोट छापने के लिए किया शॉर्ट लिस्ट!

मोदी सरकार ने ब्लैक लिस्टेड कंपनी को प्लास्टिक के नोट छापने के लिए किया शॉर्ट लिस्ट!

File Photo - getty images

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केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने कहा है कि उसने उस कंपनी से नोट छापने की साझेदारी की है जो ब्लैक लिस्टेड है.

    केंद्र सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौता करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने कहा है कि उसने उस कंपनी से नोट छापने की साझेदारी की है जो ब्लैक लिस्टेड है. विपक्ष ने कहा कि केंद्र सरकार ने ब्रिटेन की कंपनी 'डे ला रू' के साथ नोट छपाई का करार किया है, जबकि ये कंपनी काली सूची में शामिल है. केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ओमन चांडी ने कहा कि 'डे ला रू' को भारत में प्लास्टिक के नोट छापने के लिए शार्टलिस्ट किया गया है, जो काली सूची में है.

    ओमन चांडी का कहना है कि ये उच्चस्तर पर मिलीभगत को दिखाता है. उन्होंने कहा कि साल 2011 में तत्कालीन वित्त राज्यमंत्री नमो नारायण मीणा ने राज्यसभा में नोटों की छपाई की सुरक्षा से जुड़े एक सवाल के जबाव में कहा था कि अनुबंध में निर्धारित विनिर्देशों के पालन में असफल रहने के कारण डे ला रू को काली सूची में डाल दिया गया है. चांडी ने कहा कि ब्रिटिश कंपनी को 2011 में सुरक्षा मंजूरी नहीं दी गई थी, इसलिए सरकार को वर्तमान में उठाए गए कदम का खुलासा करना चाहिए.

    वहीं, ब्रिटिश कंपनी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए नौ दिसंबर को एक बयान जारी कर कहा था कि डे ला रू स्पष्ट रूप से भारतीय मीडिया में प्रकाशित अपने व्यापार के बारे में अपमानसूचक और दुर्भावनापूर्ण आरोपों का खंडन करती है. बयान में आगे कहा गया था कि कंपनी भारतीय मुद्रा की छपाई के लिए कागज की आपूर्ति नहीं कर रही है और हम किसी भी रूप में वर्तमान में भारत में मुद्रा के मुद्रण से संबद्ध नहीं हैं. उनका कहना था कि डे ला रू को न तो कोई नोटिस मिला है और न ही हम जानते हैं कि हमें भारत में काली सूची में डाला गया है.

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