कांग्रेस ने केजरीवाल सरकार पर साधा निशाना, कहा-गरीब मजदूरों पर लॉकडाउन से गहराया संकट, सरकार कर रही आधी अधूरी घोषणा!


लॉकडाउन में गरीब मजदूर और निर्माण मजदूरों पर रोजी रोटी का संकट गहरा गया है. (File Photo)

लॉकडाउन में गरीब मजदूर और निर्माण मजदूरों पर रोजी रोटी का संकट गहरा गया है. (File Photo)

दिल्ली सरकार की ओर से लागू लॉकडाउन में गरीब मजदूर और निर्माण मजदूरों की रोजी रोटी पर संकट गहरा गया है. सरकार लॉकडाउन के 2 सप्ताह बीतने के बाद भी आधी अधूरी घोषणा करके गरीब मजदूरों के साथ धोखेबाजी कर रही हैं.

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नई दिल्ली. दिल्ली में कोरोना संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए दिल्ली सरकार (Delhi Government) की ओर से लॉकडाउन (Lockdown) लगाया हुआ है. ऐसे में गरीब मजदूर और निर्माण मजदूरों पर रोजी रोटी का संकट गहरा गया है.

सरकार लॉकडाउन के 2 सप्ताह बीतने के बाद भी आधी अधूरी घोषणा करके गरीब मजदूरों के साथ धोखेबाजी कर रही हैं. इतना ही नहीं अस्पतालों में मरीजों के लिए ना बेड की पर्याप्त संख्या उपलब्ध करवा पा रही है, ना ही ऑक्सीजन और दवाईयां.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि केजरीवाल सरकार ने पिछले 6 सालों में कांग्रेस पार्टी की मांग के बाबजूद 54 लाख से अधिक जरूरतमंदों का राशन कार्ड नहीं बनाया. उन्होंने मांग की है कि सभी जरूरतमंदो को नि: शुल्क राशन दिया जाए.

उन्होंने कहा कि जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, उनके पास किसी भी प्रकार के सरकारी दस्तावेज को आधार बना कर राशन पहुँचाया जाए. तथा जिनके पास कोई भी कागजात नहीं उन्हें पका खाना राहत केंद्र के माध्यम से  दिया जाए.

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चौधरी अनिल कुमार ने केजरीवाल के द्वारा ऑटो चालक व मजदूरों के लिए की गई घोषणा को भी धोखा बताया. उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने पिछले साल भी ठीक इसी प्रकार का घोषणा की थी, आज एक साल के बाद भी फौरी राहत के तौर पर की गई घोषणा नहीं पहुंची.

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि दिल्ली में रजिस्टर्ड 5 लाख से अधिक भवन निर्माण से जुड़े मजदूरों में से 75,000 से भी कम मजदूरों को 5,000 की सहायता राशि दी गई.



उन्होंने कहा कि इसके लिए भी दिल्ली सरकार ने मजदूरों के राहत कोष में जमा 32,00 करोड़ की राशि से खर्च की, मतलब मजदूरों का पैसा उन्हें जरूरत पर नहीं मिला. जबकि सरकार का इसमें एक पैसा खर्च नहीं. यह धोखा नहीं तो क्या है?

चो. अनिल कुमार ने न्याय योजना के तर्ज पर 10,000 रुपये की राशि हर महीने जरूरतमंदों के खाते में देने की अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए कहा कि रोजगार खो चुके लाखों जरूरतमंदों के खाते में दिल्ली सरकार  अपने बजट से राशि दे.

आज दिल्ली में मरीज बेड के लिए चक्कर लगा रहे, न ऑक्सीजन मिल रहा है और न दवाई. सभी जरूरी चीजों की काला बाजारी हो रही.

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन (Lockdown) के बाद जितने मजदूर अपने अपने घरों को वापस गए है उन्हें भी दिल्ली सरकार को मदद देनी चाहिए.

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