COVID-19: स्वास्थ्य मंत्री के 'फॉर्मूले' से इन मरीजों को रहना होगा सावधान, घर में ऐसे जानें रेस्पिरेटरी रेट
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COVID-19: स्वास्थ्य मंत्री के 'फॉर्मूले' से इन मरीजों को रहना होगा सावधान, घर में ऐसे जानें रेस्पिरेटरी रेट
आम आदमी पार्टी ने ट्विटर पर एक लघु वीडियो साझा किया जिसमें अस्पताल के चिकित्साकर्मी इस महिला को छुट्टी मिलने के बाद विदाई देते नजर आते हैं. (सांकेतिक चित्र)

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री सतेंद्र जैन (Satendra Jain) ने एक फार्मूला बताया है, जिससे आप जान सकते हैं कि कोरोना होने पर हॉस्पिटल में भर्ती होना है या नहीं. हम आपको बता रहे हैं कि इस पर डॉक्टरों की राय घर पर रेस्पिरेटरी रेट जानने का तरीका.

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नई दिल्‍ली. मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) के बाद अब दिल्‍ली के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री सतेंद्र जैन (Health Minister Satendra Jain) ने भी अब यह कहना शुरू कर दिया है कि कोरोना पॉजिटिव (Corona Positive) रिपोर्ट आने के बावजूद आपको हॉस्पिटल (Hospital) भागने की जरूरत नहीं हैं. सतेंद्र जैन ने रेस्पिरेटरी रेट (श्वसन दर) का एक ‘फार्मूला’ भी तय किया है, जो आपको बताएगा कि आपको हॉस्पिटल जाना है या नहीं.

सतेंद्र जैन के अनुसार, जिन मरीजों का रेस्पिरेटरी रेट एक मिनट में 15 से अधिक है, वह सभी मॉडरेट कैटेगरी में आते हैं. इसी तरह, जिन मरीजों का रेस्पिरेटरी रेट प्रति मिनट 30 से अधिक है, वह सभी सीवियर यानी गंभीर कैटेगरी में आते हैं. सिर्फ मॉडरेट या सीवियर कैटेगरी के मरीजों को ही इलाज के लिए हॉस्पिटल आने की जरूरत है. बिना लक्षण वाले या हल्के लक्षण वाले मरीज जिनका रेस्पिरेटरी रेट 15 से कम है, उन्हें हॉस्पिटल आने की जरूरत नहीं है. वह होम क्वारंटाइन रहें.



हालांकि, बहुत से चिकित्‍सा विशेषज्ञ स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री सतेंद्र जैन के इस फार्मूले से सहमत नहीं हैं. उनका कहना है कि यह फार्मूला उन मरीजों पर लागू नहीं होगा, जिनको कुछ खास तरह की बीमारियां हैं. बहुत सी बीमारी ऐसी हैं, जिनमें बहुत तेजी से हेल्‍थ पैरामीटर ऊपर नीचे होते हैं. इन हेल्‍थ पैरामीटर की सिर्फ हॉस्पिटल में ही निगरानी हो सकती है. आइये, हम आपको बताते हैं कि स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री सतेंद्र जैन का यह फार्मूला आपके लिए कितना सुरक्षित है और दिल्‍ली के चिकित्‍सा विशेषज्ञ इस बाबत अपनी क्‍या राय रखते हैं.
इन पर लागू नहीं होगा स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री का फॉर्मूला
डॉ. मनोज शर्मा के अनुसार, यह फॉर्मूला सिर्फ ऐसे युवा मरीजों पर लागू होगा, जिनको हार्ट, ब्‍लड प्रेशर, शुगर जैसी दूसरी बीमारी नहीं हैं. यदि आप कोरोना पॉजिटिव हैं और दूसरी बीमारी से भी पीड़ित हैं, तो आपके लिए डॉक्‍टर का परामर्श बेहद जरूरी है. घर के बुजुर्गों के साथ यह फॉर्मूला लागू नहीं हो सकता है. बुजुर्गों का हेल्‍थ पैरामीटर बड़ी तेजी के साथ बदलता है, लिहाजा हमें सावधान रहने की जरूरत होती है. दिल्‍ली में ऐसे भी बहुत से बुजुर्ग हैं, जो घर पर अकेले रहते हैं. ऐसे बुजुर्गों की बेहतर देखभाल सिर्फ हॉस्पिटल में ही संभव है.

कैसे जाने अपना रेस्पिरेटरी रेट
मेडॉर हॉस्पिटल के वरिष्‍ठ चिकित्‍सक डॉ. मनोज शर्मा के अनुसार, किसी भी सामान्‍य रेस्पिरेटरी रेट (श्वसन दर) 12 से 16 के बीच माना जाता है. यदि रेस्पिरेटरी रेट (श्वसन दर) 16 से 28 के बीच है तो भी बहुत अधिक चिंता की बात नहीं है. 28 से अधिक रेस्पिरेटरी रेट (श्वसन दर) होने पर डॉक्‍टर को दिखाना जरूरी हो जाता है. उन्‍होंने बताया कि घर में रेस्पिरेटरी रेट (श्वसन दर) जानने का एक बेहद आसान तरीका है. इसके लिए आप मरीज के पेट पर एक हाथ घड़ी रख दें और देखें कि एक मिनट में पेट कितनी बार ऊपर-नीचे जा रहा है. ऊपर आने और नीचे जाने को एक गिना जाएगा. डॉ. मनोज शर्मा के अनुसार, चूंकि सांस के साथ पेट में भी हलचल होती है, लिहाला पेट के जरिये भी मरीज का रेस्पिरेटरी रेट (श्वसन दर) का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.

रेस्पिरेटरी रेट जानने का यह भी है आसान तरीका
इंद्रप्रस्‍थ अपोलो हॉस्पिटल के वरिष्‍ठ चिकित्‍सक डॉ. तरुण सहानी के अनुसार, वर्तमान समय में बाजार में कई ऐसे उपकरण आ रहे हैं, जिनकी मदद से आप रेस्पिरेटरी रेट (श्वसन दर) के साथ-साथ ऑक्‍सीजन लेबल और पल्‍स रेट का भी  पता लगा सकते हैं. इन मशीनों की कीमत भी बहुत अधिक नहीं है. डॉ. सहानी ने बताया कि रेस्पिरेटरी रेट (श्वसन दर) के पता लगाने का एक और आसान तरीका है कि आप स्‍टॉप वाच लेकर देखें कि एक मिनट में आप कितनी बार सांस ले रहे हैं. आप एक मिनट में जितनी बार सांस लेते हैं, वही आपका रेस्पिरेटरी रेट (श्वसन दर) है.

 

 

 
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