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इटली से लौटे Coronavirus पॉजिटिव ने खुद बताई 14 दिन के आइसोलेशन की कहानी
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Updated: March 25, 2020, 2:25 PM IST
इटली से लौटे Coronavirus पॉजिटिव ने खुद बताई 14 दिन के आइसोलेशन की कहानी
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COVID 19: इटली से लौटा यह कारोबारी अब ठीक है. अस्पताल (Hospital) से घर जा चुके हैं, लेकिन एहतियात इतनी बरत रहे हैं कि खुद और अपने परिवार को कई दिन पहले से ही अलग कर लिया है.

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  • Last Updated: March 25, 2020, 2:25 PM IST
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नई दिल्ली. मार्च महीने और यूपी में कोरोना वायरस (Coronavirus) के पॉजिटिव केस मिलने की शुरुआत एक साथ ही हुई थी. संदिग्ध से सीधे पॉजिटिव केस मिलने से यूपी (UP) ही नहीं, देशभर में हड़कंप मच गया था. देशभर की निगाहें इस केस पर लग गई थीं. यह यूपी के एक खास शहर का मामला था. रातों-रात पॉजिटिव केस को शहर से दिल्ली के एम्स अस्पताल भेज दिया गया. यह शख्स इटली से लौटा था. इसके बाद तो उसके परिवार और आस पड़ोस के कई लोगों को निगरानी में ले लिया गया. लेकिन, इटली से लौटा यह कारोबारी अब ठीक हैं. अस्पताल से घर जा चुके हैं, लेकिन एहतियात इतनी बरत रहे हैं कि खुद और अपने परिवार को कई दिन पहले से ही घर के अंदर बाहरी लोगों से अलग कर लिया है.

'मेरा 14 दिन का जिंदगी और मौत का सफर'
इस कारोबारी ने खुद News18 Hindi को बताया, 'जैसे मैं हमेशा की तरह टूर से लौटता था, वैसे ही इस बार भी 2 मार्च को इटली से लौटा था. मुझे किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं थी, लेकिन दो दिन बाद ही बुखार और जुकाम की शिकायत होने लगी. एकदम निमोनिया जैसी हालत हो गई. मैंने बीते दिनों पर गौर किया तो मुझे कहीं भी नहीं लगा कि मैंने कोई कुछ ऐसा खाया-पिया है जिससे मुझे निमोनिया हो. वक्त के साथ तकलीफ बढ़ने लगी. सांस लेने में भी दिक्कत महसूस होने लगी. इससे पहले फोन पर फैमिली डॉक्टर से पूछकर दवाई खा रहा था.'

...तब हुआ शक



कोरोना के संक्रमण से उबरे इस कारोबारी ने बताया, 'तभी मुझे और डॉक्टर को कुछ शक हुआ. चीन की खबरें हम लगातार पढ़ रहे थे. मेरे डॉक्टर ने उसके बारे में और ज़्यादा पता किया तो मुझे 80 फीसद लगने लगा कि मैं कोरोना वायरस की चपेट में आ गया हूं, क्योंकि मैं इटली से लौटा था.' इसके बाद चिंताएं बढ़ी स्‍वाभाविक थीं. वह आगे कहते हैं, 'मैंने चीफ मेडिकल अफसर से बात की तो उन्होंने तुरंत दिल्ली भेज दिया. यहां एम्स में 14 दिनों के लिए आइसोलेट कर दिया गया. मुझे जरूरी टिप्स देने के साथ ही यह समझाया गया कि आपको किसी भी हाल में तनाव नहीं लेना है. चौदह दिन तक डॉक्टर, नर्स और टीवी पर कोरोना की खबरें ही मेरे आसपास थीं. दिन में सिर्फ दो बार फोन पर घर वालों से बात करने की इजाजत थी. दरवाजे के शीशे से पत्नी को देख लेता था.'

'परिवार को देखने की होती थी चाहत'
कोरोना के संक्रमण से उबरे शख्‍स ने बताया, 'मैं अपने बच्चों और पूरे परिवार को फिर से देखना चाहता था. किसी भी तरह से मेरी बीमारी उन्हें न लग जाए, इसलिए डॉक्टरों की हर बात मानता रहा. सही बात तो यह है कि डॉक्टर की दी हुई जितनी हिदायत हम मानेंगे वो ही हमें जल्द से जल्द ठीक करेंगी. लेकिन, इंसानी फितरत के मुताबिक 14 दिन 14 साल के वनवास जैसे लग रहे थे. बड़ी बात यह है कि मेरे बच्चों से लेकर मेरे मां-बाप तक ने फोन पर हंस-हंस के बातें करते हुए मेरा हौसला बढ़ाते रहे. एक दिन बात करते हुए मेरी मां रो पड़ीं, तब मैंने उन्हें समझाया कि मां मैं तो ठीक हो रहा हूं. बेटे से कहा कि दादी को मोबाइल पर ठीक होने वाले मरीजों के बारे में बताता रहे.' उत्‍तर प्रदेश के इस कारोबारी ने बताया कि ठीक होने के बाद वह अपने घर आ चुके हैं, लेकिन जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन से पहले ही हमारा परिवार घर के अंदर ही बाहरी लोगों से दूर है.


 

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First published: March 25, 2020, 12:21 PM IST
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