चिंताजनक: देश में 20 फीसदी से भी कम बुजुर्गों ने लगवाई कोरोना की वैक्‍सीन

बेहद चिंताजनक है कि देश में 20 फीसदी से भी कम बुजुर्गो को कोरोना का टीका लगा है. तस्‍वीर में 103 साल के लक्ष्‍मणदास जिन्‍होंंने वैक्‍सीन लगवाई.

बेहद चिंताजनक है कि देश में 20 फीसदी से भी कम बुजुर्गो को कोरोना का टीका लगा है. तस्‍वीर में 103 साल के लक्ष्‍मणदास जिन्‍होंंने वैक्‍सीन लगवाई.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि अभी तक देशभर में 20 फीसदी से भी कम बुजुर्गों को कोरोना की वैक्‍सीन लगी है. यह बेहद चिंताजनक है कि देश में कोरोना से सबसे ज्‍यादा प्रभावित होने वाले बुजुर्गों को लेकर जागरुकता नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2021, 2:52 PM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना महामारी से जूझते विश्‍व को भारत ने एक उम्‍मीद की किरण दिखाई है. यही वजह है कि भारत में बनी कोरोना की दोनों वैक्‍सीन के लिए विश्‍व के देशों में होड़ मची हुई है. लेकिन विडंबना देखिए कि 2020 में इस बीमारी से जूझने के बाद अब 2021 में भी बढ़ते मामलों के बीच देशवासी कोरोना वैक्‍सीन (Corona Vaccine) को लेकर उदासीन हैं. अपने ही देश में कोरोना की वैक्‍सीन को लगवाने के लिए लोग आगे नहीं आ रहे हैं.

देशभर में 16 जनवरी से शुरू हुए कोरोना वैक्‍सीनेशन अभियान में हेल्‍थवर्कर, फ्रंटलाइन वर्कर और फिर 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों को वरीयता दी गई थी. लेकिन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के आंकड़े बताते हैं कि अभी तक देशभर में 20 फीसदी से भी कम बुजुर्गों (Elderly) को कोरोना की वैक्‍सीन लगी है. यह बेहद चिंताजनक है कि देश में कोरोना से सबसे ज्‍यादा प्रभावित होने वाले बुजुर्गों को लेकर जागरुकता नहीं है.

आईसीएमआर (ICMR) में टास्‍क फोर्स ऑपरेशन ग्रुप फॉर कोविड के हेड डॉ. एन के अरोड़ा बताते हैं कि अभी तक जुटाए गए आंकड़ों में सामने आया है कि देश में 60 साल से ऊपर के 20 फीसदी से भी कम लोगों ने कोरोना वैक्‍सीन ली है. हालांकि इसके लिए युवा वर्ग जिम्‍मेदार है. चूंकि बुजुर्ग स्‍वयं वैक्‍सीन लेने या वैक्‍सीन के लिए रजिस्‍ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए पूरी तरह समर्थ नहीं होते हैं ऐसे में यह जिम्‍मेदारी उनके बच्‍चों की होती है कि वे अपने बुजुर्गों को वैक्‍सीनेशन के लिए लाएं.

डॉ. अरोड़ा कहते हैं कि कोरोना महामारी से बचाव के दो ही उपाय अभी तक सामने आए हैं. एक पूरी तरह एहतियात और दूसरा है कोरोना की वैक्‍सीन लगवाना. बेहद चिंताजनक है कि लोग अपने बुजुर्गों के स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति उदासीन हैं. आंकड़े बताते हैं कि कोरोना के सबसे ज्‍यादा मामले बड़े शहरों में मिले हैं और इन्‍हीं शहरों में बुजुर्गों को वैक्‍सीन लगने की संख्‍या काफी कम है. इतने बड़े स्‍तर पर चल रहे वैक्‍सीनेशन ड्राइव में भी लोग शामिल नहीं हो रहे हैं. जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए.
वे कहते हैं कि कोरोना पर वैक्‍सीन कारगर है. यह बचाव का मजबूत तरीका है. ऐसे में देशभर से लोगों को आगे आकर वैक्‍सीनेशन करवाना चाहिए. केंद्र से लेकर राज्‍य सरकारें भी लोगों से ज्‍यादा से ज्‍यादा वैक्‍सीन लगवाने की अपील कर रही हैं. लोगों को सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का लाभ लेना चाहिए.
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