बच्चों के लिए कोविड की कौन सी वैक्सीन है? जानें किन टीकों पर चल रहा काम

बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन का चल रहा ट्रायल.

बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन का चल रहा ट्रायल.

Corona Vaccine: कोरोना महामारी की तीसरी लहर की आशंका के बीच बच्चों के लिए कोविड का टीका बनाने का काम शुरू. देश-विदेश की कई कंपनियों ने शुरू किया ट्रायल.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी से दुनियाभर में क़रीब 33.14 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी हैं और 15 करोड़ 95 लाख से अधिक लोग इस वायरस से प्रभावित हो चुके हैं. इससे निपटने के लिए वैक्सीन ही सबसे कारगर उपाय है. कई देशों ने वैक्सीन बनाकर वैक्सीनेशन का काम शुरू कर दिया है. लेकिन अभी तक सिर्फ वयस्कों के लिए वैक्सीन बनी है. कोरोना की अभी दूसरी वेव चल रही है, कहा जा रहा है कि महामारी की तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक हो सकती है. ऐसे में बच्चों की वैक्सीन पर भी काम शुरू हो गया है.

भारत में बच्चों के लिए अभी कोई वैक्सीन नहीं आई है. लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि बच्चों के लिए कोरोना की वैक्सीन कब तक आएगी? हालांकि अमेरिका के एफडीए ने बीते 10 मई को 12 से 15 साल के बच्चों के लिए फाइजर-बायोएनटेक के वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है. फाइजर की वैक्सीन बच्चों के लिए अप्रूवल पाने वाली दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन है. कनाडा के ड्रग रेगुलेटर ने भी 12 से 15 साल के बच्चों को यह वैक्सीन लगाने की इजाजत दे दी है.

अमेरिकी कंपनी भी बना रही वैक्सीन

साथ ही अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना भी बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन ला रही है, जिससे लोगों में नई उम्मीद जगी है. मॉडर्ना ने 12 से 17 साल के बच्चों पर वैक्सीन का क्लीनिकल परीक्षण किया. रिपोर्ट में वैक्सीन को 96 फीसदी तक प्रभावी पाया है. मॉडर्ना के अलावा और भी कई कंपनियां बच्चों पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल कर रही हैं. जॉन्सन एंड जॉन्सन भी 12 साल से 18 साल के किशोरों पर वैक्सीन के ट्रायल कर रही है .
इजरायल में 12 से 16 साल के 600 किशोरों पर कोरोना वैक्सीन का ट्रायल किया गया. कंपनी का दावा है कि इनमें से किसी में भी गंभीर साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला. अब इसके बाद 5 से 11 साल के बच्चों पर ट्रायल का प्लान है. ब्रिटेन में एस्ट्राजेनेका ने फरवरी में 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए टीके का परीक्षण शुरू किया था. इस ट्रायल में 6 से 17 साल आयु वर्ग के 300 बच्चों को शामिल करने का प्लान है. इनमें से 240 को कोविड-19 का जबकि बाकी 60 को मेनिनजाइटिस का टीका लगाकर टेस्ट किया जाएगा.

भारत में क्या है तैयारी

भारत में भी सीरम इंस्टीट्यूट जल्द ही बच्चों के लिए टीका लाने की तैयारी में है. यह वैक्सीन बच्चों को उनके जन्म के एक महीने के भीतर लगाई जाएगी. साथ ही कंपनी इसी वैक्सीन को आगे एक दवा के रूप में विकसित करेगी, ताकि यदि बच्चे कोरोना से संक्रमित हों तो उन्हें यह दी जा सके. इधर, भारत बायोटेक ने वयस्क आबादी पर 3 फेज का ट्रायल पूरा कर लिया है और अब कंपनी का प्लान 5 साल से 18 साल के बच्चों पर वैक्सीन के ट्रायल का है. भारत बायोटेक ने नैसेल वैक्सीन का ट्रायल भी शुरू किया है. जो नाक के रास्ते दिया जाएगा. इसे बच्चों के लिए सुरक्षित बताया जा रहा है. आईसीएमआर व भारत बायोटेक की कोवैक्सीन का बच्चों पर परीक्षण होना है, अभी तक क्लीनिकल परीक्षण शुरू नहीं हुआ है.



बच्चों पर कैसे होता है ट्रायल?

बच्चों में वैक्सीन का ट्रायल दो चरणों में किया जाता है. पहले फेज में बच्चों पर अलग-अलग डोज का इस्तेमाल किया जाता है. 6 महीने से 1 साल के बच्चों को 28 दिन के अंतराल पर 25, 50 और 100 माइक्रोग्राम लेवल की डोज दी जाती है, जबकि 2 से 11 साल के बच्चों को 50 और 100 माइक्रोग्राम लेवल की दो डोज 28-28 दिन के अंतराल पर दी जाती है. बच्चों को वैक्सीन की दो डोज देने के बाद 12 महीने तक उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जाएगी. उसके सफल होने के बाद ही ट्रायल को कम्प्लीट माना जाएगा.

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