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Covid 19: कोरोना के नए वेरिएंट का आसानी से लग सकेगा पता, दिल्ली में खुली दो जीनोम सीक्वेंसिंग लैब

दिल्ली सरकार की ओर से आईएलबीएस अस्पताल में दूसरी कोविड-19 जीनोम सीक्वेंसिंग लैब की शुरुआत की गई है.

दिल्ली सरकार की ओर से आईएलबीएस अस्पताल में दूसरी कोविड-19 जीनोम सीक्वेंसिंग लैब की शुरुआत की गई है.

Corona Third wave: अभी हर वेरिएंट खतरनाक नहीं है, लेकिन हमारे लिए यह जानकारी रखनी जरूरी है कि दिल्ली में नए-नए मरीज आ रहे हैं, तो क्या वे बदलते हुए वायरस से हैं, या पुराने वायरस से हैं. पिछले साल के करीब एक लाख से ज्यादा पुराने मरीज हैं, उन सभी के सैंपल हमारे पास हैं.

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    नई दिल्ली. कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए दिल्ली सरकार (Delhi Government) हर संभव कोशिश में जुटी हुई है. कोरोना वेरिएंट (Corona Variant) का पता लगाने के लिए अब दिल्ली सरकार की ओर से आईएलबीएस अस्पताल (ILBS Hospital) में दूसरी कोविड-19 जीनोम सीक्वेंसिंग लैब (Genome Sequencing Lab) की शुरुआत की गई है.

    मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने भविष्य की तैयारियों के मद्देनजर लैब का उद्घाटन किया. सीएम ने कल इसी तरह की एक लैब का एलएनजेपी (LNJP) में उद्घाटन किया था. इसी के साथ कोरोना के नए वेरिएंट की जांच के लिए दिल्ली सरकार के पास अब दो लैब हो गई हैं.

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    सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इन लैब्स की मदद से कोरोना के किसी भी नए वेरिएंट की पहचान और उसकी गंभीरता का पता लगाया जा सकेगा और हम इससे बचाव को लेकर रणनीति बना पाएंगे. कोरोना काल में विज्ञान की इस तकनीक से दिल्लीवासियों को काफी फायदा मिलेगा.

    वहीं, आईएलबीएस के निदेशक डाॅ. शिव कुमार सरीन ने कहा कि कोरोना संक्रमित व्यक्ति के आरएनए को उसके वायरस पर सीक्वेंस करा कर पता लगा सकते हैं कि वायरस ने अपना स्वरूप बदला है या नहीं. हमारे पास हर सप्ताह 300 सैंपल को सीक्वेंस करने की क्षमता है और इसका परिणाम भी 5-7 दिन में आ जाएगा. इस दौरान दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन  भी मौजूद रहे.

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    दिल्ली सरकार की ओर से आईएलबीएस अस्पताल में दूसरी कोविड-19 जीनोम सीक्वेंसिंग लैब की शुरुआत की गई है.


    केजरीवाल ने कहा कि आईएलबीएस में भी कोरोना वायरस के वेरिएंट की सीक्वेंसिंग के लिए लैब शुरू हो गई है. मुझे उम्मीद है कि इसका पहला परिणाम अगले तीन-चार दिनों के अंदर आ जाएंगे. आईएलबीएस में जो लैब बनाई गई है, वह एलएनजेपी में बनाई गई लैब से बहुत ज्यादा उन्नत (एडवांस्ड) है और संभवतः उत्तर भारत की यहां पर इस तरह की यह पहली लैब है.

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    वहीं, आईएलबीएस के निदेशक शिव कुमार सरीन ने लैब की विशेषता बताते हुए कहा कि जैसे पहले हम आरटी-पीसीआर करते हैं. आरटी-पीसीआर के बाद जो वायरस का भाग है यानि जो आरएनए है, उसको हम लोग बचा कर रख लेते हैं.

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    रिपोर्ट में जो व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया जाएगा, उसके आरएनए को उसके वायरस के उपर सीक्वेंस कर सकते हैं. जैसे- अगर कोरोना से संक्रमित 100 लोग हैं, उनमें से करीब 5 का पूरा वायरस सीक्वेंस कर सकते हैं. इसमें 30 हजार माॅलीक्यूल्स होते हैं और वो सारा सीक्वेंस कर सकते हैं. हम उस सीक्वेंस का परिणाम बता सकते हैं कि यह वायरस पुराने से बदला है या पुराने जैसा ही है. अगर वायरस नया है और उसमें कोई बदलाव हुआ है, तो उसे हम वेरिएंट या म्युटेंट कहते हैं.

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    अभी हर वेरिएंट खतरनाक नहीं है, लेकिन हमारे लिए यह जानकारी रखनी जरूरी है कि दिल्ली में नए-नए मरीज आ रहे हैं, तो क्या वे बदलते हुए वायरस से हैं, या पुराने वायरस से हैं. पिछले साल के करीब एक लाख से ज्यादा पुराने मरीज हैं, उन सभी के सैंपल हमारे पास हैं. जब हमें आदेश मिलेगा, हम लोग उस सारे सैंपल या उसमें से कुछ को सीक्वेंस कर सकते हैं.

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