लॉकडाउन में घर रहकर पत्‍नी का बंटाया हाथ, आज इन पतियों की चमक गई किस्‍मत

लॉकडाउन में कुकिंग सीखकर कुक बने लोगों की कहानी, उन्‍ही की जुबानी. ये हैं कुक कमलेश.
लॉकडाउन में कुकिंग सीखकर कुक बने लोगों की कहानी, उन्‍ही की जुबानी. ये हैं कुक कमलेश.

न्‍यूज18 हिन्‍दी ऐसे ही कई लोगों से आपको रूबरू कराने जा रहा है. कोरोना-लॉकडाउन (Corona-Lockdown) में जिनके रसोई के काम को प्रोफेशन बनाने के आइडियाज को पढ़कर आपको भी समय और हालात को देखकर निराश होने के बजाय आत्‍मनिर्भर बनने और कुछ नया करने की प्रेरणा मिलेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 22, 2020, 12:29 PM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना फैलने के साथ ही भारत में हुए लॉकडाउन ने जहां लोगों की नौकरियां छीन लीं और घर पर रहने को मजबूर कर दिया. वहीं कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्‍होंने बिना किसी की परवाह किए इस समय का सदुपयोग किया. इन्‍होंने न केवल सिर्फ महिलाओं का काम समझे जाने वाली रसोई में घुसकर पूरे लॉकडाउन नई-नई डिश बनाकर पत्‍नी और परिवार को खुश रखा बल्कि आज लॉकडाउन में सीखे उस हुनर से अच्‍छी कमाई भी कर रहे हैं. इतना ही नहीं इन्‍होंने भविष्‍य का बिजनेस प्‍लान भी तैयार कर लिया है.

किसी ने शौक में तो किसी ने टाइमपास करने के लिए पत्‍नी के साथ रसोई में हाथ बंटाना शुरू किया था और धीरे-धीरे घर के बाहर तक इनके हुनर की तारीफ होने लगी. महज छह महीनों के भीतर ही न केवल इन्‍होंने अपनी पहचान बना ली है बल्कि आसपास के लोगों के लिए प्रेरणास्‍त्रोत भी बने हुए हैं. कुछ ऐसे पति भी हैं जिन्‍होंने अपनी पत्नियों के साथ खाना बनाने के काम की शुरुआत की और अब उनके काम को लोगों को तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं.

न्‍यूज18 हिन्‍दी ऐसे ही कई पतियों से आपको रूबरू कराने जा रहा है. कोरोना-लॉकडाउन (Corona-Lockdown) में जिनके पत्‍नी के साथ मिलकर रसोई के काम को प्रोफेशन बनाने के आइडियाज को पढ़कर आपको भी समय और हालात को देखकर निराश होने के बजाय आत्‍मनिर्भर बनने और कुछ नया करने की प्रेरणा मिलेगी.



कल तक जो पत्‍नी का काम था, आज बन गया मेरा-उनका बिजनेस
आज भगत जी कुक के नाम से मशहूर भगत सिंह रावत कोरोना और लॉकडाउन से पहले ए‍क होटल में हॉल इंचार्ज का काम करते थे. होटल की बाहरी व्‍यवस्‍थाओं को देखने वाले भगतजी को उस वक्‍त बड़ा झटका लगा जब होटल को ही बंद करने का आदेश आ गया और वे नौकरी से हाथ धो बैठे. उन्‍हें और कोई काम भी नहीं आता था कि कर सकें. वहीं बीमारी के फैलने का भी अंदाजा था.

पैसे न होने की उलझन के बीच ही भगतजी घर पर रहकर रसोई बनाने में पत्‍नी का साथ देने लगे. कुछ दिन में उन्‍हें खाना बनाने में मजा आने लगा और मजाक मजाक में अपने दोस्‍तों से कहा कि वे तो अब घर में खाना-पीना बनाने का काम कर रहे हैं तो दोस्‍तों ने कहा कि खिलाकर दिखाओ तो बताऐं. और बस कुछ दोस्‍तों को खाना पहुंचाने के बाद उनका काम चल निकला. लोगों ने उनके खाने की खूब तारीफ की.

lockdown cook
ये हैं भगतजी कुक, जो लॉकडाउन से पहले थे हॉल इंचार्ज.


भगतजी कहते हैं कि मार्च से लेकर जून तक उन्‍होंने वेज खाने की हर डिश बनाना सीखा. इसके लिए उनका फोन और होटल के संपर्क काम आए. साथ ही वह ऑर्डर पाने के लिए भी  लोगों से संपर्क करते रहे. उन्‍होंने अपने होटल में काम करने वालों से लेकर कई ऑफिसों में काम करने वाले लोगों और दोस्‍तों को खाना सप्‍लाई किया. लोगों को उनका बनाया खाना पसंद आने लगा और जुलाई महीने से उन्‍होंने टिफिन सिस्‍टम शुरू कर दिया. अपने चारों बच्‍चों और पत्‍नी के साथ मिलकर उन्‍होंने रसोई को नए तरीके से तैयार किया और रोजाना सभी लोग मिलकर खाना बनाने लगे.

वे कहते हैं, ‘आज नौकरी जितना आराम तो नहीं है लेकिन इस काम से घर का खाना और खर्च चल रहा है. बच्‍चे भी खुश हैं. टिफिन में नया-नया खाना रोजाना होता है, वही बच्‍चे खाते हैं तो खुश होते हैं. यह सब देखकर हम दोनों भी अब इसी काम में सुबह शाम मन लगाकर मेहनत कर रहे हैं.’

भाड़े की टैक्‍सी बंद हुई और आखिर में खाना बनाना ही आया काम

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