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कोरोना वायरस लॉकडाउन: 21 दिन बाद कितनी बदल चुकी होगी हमारी दुनिया

लॉकडाउन के बाद दिल्ली का कुछ ऐसा है नज़ारा

लॉकडाउन के बाद दिल्ली का कुछ ऐसा है नज़ारा

Coronavirus Lockdown: प्रकृति, परिवार और पशु-पक्षियों के लिए रिवाइव करने का मौका है लॉकडाउन, अरबों रुपये खर्च करके भी हम नेचर को उतना नहीं दे पाते जितना इन 21 दिनों में देंगे. ट्रैवल ब्लॉगर सौरभ आर्य, पर्यावरणविद् एन.शिवकुमार और सेव अरावली के संस्थापक जितेंद्र भड़ाना ने साझा किए अपने विचार

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नई दिल्ली. जो कुछ हो रहा है उस पर आसानी से यकीन नहीं होता. लेकिन ये सच है. हम असाधारण हालातों से गुजर रहे हैं. भारत का इतिहास अब लॉक डाउन से पहले और लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) के बाद के दिनों के रूप में जाना जाएगा. इस लॉक डाउन के बाद जब सफल होकर लौटेंगे, तो दुनिया बहुत बदल चुकी होगी. लेकिन वो दुनिया इस दुनिया से यकीनन बेहतर होगी. हमें खुद से मिलने का अच्छा मौका मिला है. अपने परिवार के साथ और मजबूती से जुड़ने का अवसर भी. जिंदगी के पागलपन से कुछ वक्त का विश्राम. ट्रैवल ब्लॉगर सौरभ आर्य कुछ ऐसा ही सोचते हैं.

सिर्फ सौरभ ही नहीं नोएडा में रहने वाले पर्यावरणविद् एन. शिवकुमार भी लॉकडाउन पर काफी सकारात्मक विचार रखते हैं. वो कहते हैं कि इन 21 दिनों में प्रकृति को हमारी ओर से इतना कुछ मिलेगा कि हम उसे अरबों रुपये खर्च करके भी दे नहीं पाते. पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबको प्रदूषण और शोरगुल से आराम करने का अवसर मिला है. सुबह घर पर कभी पक्षियों की चहचहाहट नहीं सुनाई देती थी लेकिन शोरगुल और प्रदूषण कम हुआ तो बेजुबानों का जीवन खिलखिला उठा.

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पीएम मोदी की अपील का देशभर में असर


शिवकुमार कहते हैं कि हम इतने दिन घर में रहकर प्रकृति को रिवाइव होने का जो मौका दे रहे हैं उसे वो मानव जाति पर सूद सहित लौटाएगी. मुझे लगता है कि नदियों का प्रदूषण भी 21 दिन बाद काफी हद तक कम हो जाएगा. क्योंकि सारी गतिविधियां बंद हैं. प्रकृति को ठीक रखने और लोगों को संक्रमण से होने वाली बीमारियों से बचाने  के लिए सरकार हर महीने 24 घंटे लॉकडाउन का नियम बना दे तो और बेहतर होगा. हम प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से भी बच जाएंगे. इसका दूरगामी फायदा मिलेगा.

सेव अरावली के संस्थापक जितेंद्र भड़ाना कहते हैं कि लॉकडाउन सिर्फ कोरोना से हमारी रक्षा नहीं कर रहा है बल्कि इससे हमें साफ हवा भी मिल रही है. यह प्रकृति को उसका खोया हुआ रूप लौटाने का मौका है. हम लोग वायु प्रदूषण पर बात करके चुप हो जाते थे लेकिन अब इसके साथ-साथ ध्वनि प्रदूषण भी खत्म हो गया है, इससे सबसे ज्यादा लाभ वाइल्ड लाइफ को होने वाला है. यही उनका ब्रीडिंग सीजन है. न गाड़ियां चल रही हैं और जहाज न फैक्ट्री इसलिए 21 दिन बाद उन शहरों की आबोहवा भी शुद्ध हो चुकी होगी जो दुनिया में सबसे प्रदूषित की सूची में हैं. जिनमें लोग जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर थे.

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दिल्ली और पुणे जैसे शहरों में प्रदूषण खत्म हो चुका है


कोरोना वायरस संक्रमण को खत्म करने के लिए जो लॉकडाउन किया गया है उससे हर किसी के सामने समस्याओं का पहाड़ खड़ा हो गया है. लेकिन बेशुमार परेशानियों के बीच इसके कुछ ऐसे सकारात्मक पहलू भी हैं जो आपकी सेहत से जुड़े हैं. दिल्ली और पुणे जैसे शहरों में प्रदूषण बिल्कुल खत्म हो चुका है. लोग साफ हवा में सांस ले रहे हैं. इसलिए हमें लॉकडाउन के बाद एक खूबसूरत दुनिया के प्रति आशान्वित रहना चाहिए.

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