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Lockdown के Side Effect: सामने आने लगी बड़ी समस्या, रक्तदान शिविर बंद, खाली होने लगे ब्लड बैंक
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ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: March 26, 2020, 7:56 PM IST
Lockdown के Side Effect: सामने आने लगी बड़ी समस्या, रक्तदान शिविर बंद, खाली होने लगे ब्लड बैंक
कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से खाली होने की कगार पर पहुंचे ब्लड बैंक (प्रतीकात्मक फोटो)

लॉकडाउन की वजह से रक्तदान करने भी नहीं जा पा रहे लोग, थैलीसीमिक बच्चों के सामने सबसे बड़ी परेशानी, 20 दिन में चढ़ाना पड़ता है ब्लड, पीएम और राष्ट्रपति से गुहार

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  • Last Updated: March 26, 2020, 7:56 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus outbreak) की वजह से किए गए 21 दिन के देशव्यापी लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से लोगों को कई दुश्वारियां पेश आ रही हैं. इनमें से एक है अस्पतालों में ब्लड की कमी. जिसकी पूर्ति किसी फैक्ट्री से नहीं की जा सकती. ब्लड डोनेशन कैंप लगने बंद हो गए हैं. इसलिए ब्लड बैंक (Blood Bank) खाली हो रहे हैं. इसके बाद जरूरतमंदों की परेशानी बढ़ गई है. ब्लड डोनर कम नहीं हैं लेकिन अब आने-जाने की दिक्कत है. अब तक रक्तदान के लिए आने-जाने और इसका शिविर लगाने पर सरकार की ओर से कोई गाइडलाइन नहीं आई है. खासकर उन मासूमों के लिए जो थैलीसीमिक (Thalassemic Patients) हैं. क्योंकि इन्हें हर 20-25 दिन में ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है.

थैलीसीमिक बच्चों के लिए ब्लड देने की अपील
नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी में आईजी के पद पर तैनात आलोक मित्तल थैलीसीमिक बच्चों के लिए रेगुलर ब्लड डोनेट करने वाले लोगों में शामिल हैं. उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर लिखा है, 'कोरोना समस्या की वजह से रक्तदान शिविर नहीं लग पा रहे हैं. आवश्यक रक्त की कमी हो रही है. मेरी अपने सभी दोस्तों से हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि जरूरत पड़ने पर रक्तदान कर बच्चों की मदद करें.' लेकिन कोराना वायरस की महामारी के बीच कोई रक्तदान के लिए तैयार भी हो तो जरूरतमंद बच्चों तक मदद के लिए कैसे पहुंच पाएगा?

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कोरोना वायरस लॉकडाउन की वजह से रक्तदान शिविर लगने बंद हो गए हैं.




मित्तल ने कहा है कि सरकार को रक्तदाताओं के लिए जरूर ऐसा इंतजाम करना चाहिए ताकि वे आसानी से ब्लड देने पहुंच सकें. या तो उनके घर पर वैन आ जाए ब्लड लेने या फिर पिक एंड ड्रॉप की सुविधा हो ताकि खासतौर पर थैलीसीमिक बच्चों और जरूरतमंदों के लिए अस्पतालों में ब्लड की कमी न हो. उधर, हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर ने भी सूबे के लोगों से रक्तदान के लिए आगे आने की अपील की है ताकि संकट के इस दौर में इसकी कमी न हो.

राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री से गुहार
फाउंडेशन अंगेस्ट थैलीसीमिया के मुख्य कार्यकारी रविंदर डुडेजा कहते हैं कि 22 मार्च से बंद होने के बाद कोई रक्तदान शिविर नहीं लगा है. जब तक लॉकडाउन है तब तक दिक्कत रहेगी. उससे पहले सरकार को कैंप लगाने और डोनेट करने वालों को आने-जाने के लिए कोई फैसला लेना पड़ेगा, ताकि ब्लड की कमी से किसी की मौत न हो. इस बारे में हमने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र फैक्स किया है.

डुडेजा कहते हैं कि हर माह शहरों में दो-तीन कैंप लगते थे जो ब्लड की कमी को पूरा करते थे, लेकिन अब कैंप लगने बंद हो गए हैं तो ब्लड बैंक खाली हो रहे हैं. आगे और दिक्कत पेश होने वाली है. अब अपील की गई है तो एक-दो लोग डरते-डरते रक्तदान करने आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें पुलिस रोक रही है. मेरी पुलिस से अपील है कि गाड़ी पर यदि going for blood donation लिखा हो और उसमें बैठा व्यक्ति किसी का जीवन बचाने के लिए ब्लड डोनेट करने जा रहा है तो उसे जाने दिया जाए.

डुडेजा के मुताबिक देश में पांच करोड़ से ज्यादा लोग थैलेसीमिया माइनर हैं जिनसे हर साल 10 से 12 हजार बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं. ऐसे बच्चों की औसतन उम्र 25 साल होती है. देश में ऐसे करीब डेढ़ लाख बच्चे हैं.

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सीनियर आईपीएस अधिकारी आलोक मित्तल ने थैलीसीमिक बच्चों के लिए रक्तदान करने की अपील की


रिम्स में बचा है सिर्फ 60 यूनिट ब्लड
हमारे रांची संवाददाता उपेंद्र कुमार ने बताया कि हमेशा अपने स्टॉक में 400 यूनिट ब्लड रखने वाले रिम्स (RIMS-Rajendra Institute of Medical Sciences) के ब्लड बैंक में फिलहाल सिर्फ 160 यूनिट और सदर अस्पताल में 150 की जगह सिर्फ 60 यूनिट ही बचा है. कुछ यही हाल राज्य के अन्य ब्लड बैंकों का भी है.

खाली होने वाला है दिल्ली का रोटरी ब्लड बैंक
इसकी तस्दीक रोटरी ब्लड बैंक दिल्ली के डॉ. अमित ने भी की. उन्होंने कहा कि पहले हर रोज 50 से 100 यूनिट ब्लड डोनेशन कैंपों से आ जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं हो पा रहा है. आना बिल्कुल बंद हो गया है जबकि यहां से जाना जारी है. हालांकि पहले के मुकाबले ब्लड की मांग कम हुई है. रोटरी ब्लड बैंक खाली होने के कगार पर आ चुका है. रक्तदान शिविर तो 15 मार्च के आसपास से ही लगने बंद हो गए हैं.

आगरा में 10 मार्च से नहीं लगा शिविर
आगरा लीडर्स के पदाधिकारी सुनील जैन ने बताया कि 10 मार्च के बाद से हमने कई बार कोशिश की कि रक्तदान शिविर लगा लिया जाए. लेकिन कोरोना को देखते हुए हम कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे. फिर लोगों का घरों से निकलना बंद हो गया. अब तो कोई चांस ही नहीं दिख रहा.

सीएम की अपील का असर, लगा कैंप
हालांकि, सीएम की अपील के बाद हिमाचल प्रदेश के शिमला में डिलीवरी केस, कैंसर, थैलीसीमिया मरीजों के लिए मशोबरा में उमंग फाउंडेशन ने रक्तदान शिविर लगाया. यहां के राधाकृष्ण मंदिर में आयोजित कैंप में 40 यूनिट रक्त एकत्र किया गया.

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थैलीसीमिक बच्चों, डिलीवरी केस और कैंसर मरीजों के लिए जरूरी होता है ब्लड


ब्लड बैंक से जुड़े फैक्ट
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में 3321 लाइसेंसी ब्लड बैंक हैं. इनमें 2018-19 में 1,24,91,965 यूनिट रक्त एकत्र हुआ. देश के 71 जिले ऐसे हैं जहां कोई ब्लड बैंक नहीं है. वहां पर नजदीकी जिलों से ब्लड की आपूर्ति होती है.

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First published: March 26, 2020, 7:34 PM IST
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