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उन्नाव रेप केस: दोषी MLA कुलदीप सेंगर को दिल्ली की अदालत आज सुना सकती है सजा

तीस हजारी कोर्ट ने सोमवार को कुलदीप सिंह सेंगर को दुष्कर्म का दोषी करार दिया. (फाइल फोटो)
तीस हजारी कोर्ट ने सोमवार को कुलदीप सिंह सेंगर को दुष्कर्म का दोषी करार दिया. (फाइल फोटो)

सोमवार को कुलदीप सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) को दोषी ठहराने के बाद मंगलवार को तीस हजारी कोर्ट (Tis Hazari Court) में सजा पर बहस होगी जिसके बाद इसपर फैसला आ सकता है

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नई दिल्ली. उन्नाव रेप कांड (Unnao Gang Rape) में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट (Tis Hazari Court) ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (Kuldeep Singh Sengar) को दोषी करार दिया है. अब मंगलवार को कोर्ट में दोषी सेंगर की सजा पर बहस होगी जिसके बाद उनकी सजा पर फैसला आ सकता है. वहीं कोर्ट ने मामले में एक अन्य आरोपी शशि सिंह को बरी कर दिया है. बता दें कि शशि सिंह पर आरोप है कि वो नौकरी दिलाने के बहाने पीड़िता को कुलदीप सेंगर के पास लेकर गई थी, जिसके बाद सेंगर ने पीड़िता से रेप (Rape) किया था.



सेंगर पर अभी तीन और मामले हैं  
कुलदीप सेंगर पर अभी तीन और मामले दिल्ली की विशेष सीबीआई कोर्ट में चल रहे हैं. अभी सेंगर को रेप के मामले में दोषी करार दिया गया है. बता दें कि कुलदीप सेंगर को 14 अप्रैल, 2018 को गिरफ्तार किया गया था. कोर्ट ने शशि सिंह की मामले में भूमिका को संदेह के घेरे में रखा. शशि ‌सिंह के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने और न ही मामले में सीधे तौर पर भूमिका स्पष्ट होने के चलते कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए मामले से बरी कर दिया है.



जांच एजेंसी भी सवालों के घेरे में
इसके साथ ही कोर्ट ने सीबीआई को भी जमकर फटकार लगाई. कोर्ट ने मामले की जांच में देर करने और चार्जशीट दाखिल करने में समय लगाने को लेकर सीबीआई को आड़े हाथ लिया. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई ने चार्जशीट फाइल करने में एक साल का समय लगा दिया. इससे जांच एजेंसी भी सवालों के घेरे में आती है. कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी ने पीड़िता को बयान देने के लिए कई बार बुलाया जबकि सीबीआई के अधिकारियों को पीड़िता के पास बयान लेने के लिए जाना चाहिए था.

पीड़िता के परिवार पर लगाए फर्जी केस
कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि वर्ष 2017 में जब ये मामला सामने आया था तो पीड़िता नाबालिग थी. वारदात के बाद वो डरी हुई थी और उसे लगातार धमकियां मिल रही थीं. उसके परिवार को जान का खतरा था. कोर्ट ने कहा कि वो एक पावरफुल पर्सन (रसूखदार) से लड़ रही थी और इसी के चलते पीड़ित परिवार पर फर्जी केस भी लगाए गए.


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