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कोर्ट का आदेश- जामिया यूनिवर्सिटी में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करे दिल्ली पुलिस
Delhi-Ncr News in Hindi

भाषा
Updated: January 22, 2020, 11:02 PM IST
कोर्ट का आदेश- जामिया यूनिवर्सिटी में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करे दिल्ली पुलिस
सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच भी झड़प भी हुई थी. (फाइल फोटो)

याचिका में दावा किया गया है कि कथित पुलिस (police) हमले के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पुलिस में की गई कई शिकायतों के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है.

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नई दिल्ली. दिल्ली की एक अदालत ने संशोधित नागरिकता कानून (Citizenship Amendment Act)  के खिलाफ पिछले महीने विरोध प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ आदेश दिया है. दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वो प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर दायर जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की याचिका पर कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) पेश करे.

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट रजत गोयल ने जामिया नगर पुलिस थाने के एसएचओ से 16 मार्च तक इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है कि एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर विश्वविद्यालय परिसर द्वारा की गई शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई है.

कोई प्राथमिकी दर्ज की गई है या नहीं?
अदालत ने कहा,
‘इस संबंध में संबंधित एसएचओ से एटीआर मांगी गई है. क्या शिकायतकर्ता द्वारा थाने में कोई शिकायत की गई है. यदि हां, तो इस शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई है. इस संबंध में क्या कोई जांच/पूछताछ की गई है और यदि हां तो उस जांच/पूछताछ की स्थिति क्या है. यदि कोई संज्ञेय अपराध बनता है, तो कोई प्राथमिकी दर्ज की गई है या नहीं.’


छात्रों पर दागे थे आंसू गैस के गोले
याचिका में जेएमआई विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने दावा किया है कि पुलिस अधिकारी 15 दिसम्बर, 2019 को उस समय परिसर में ‘अवैध’ रूप से घुस गये थे जब छात्र संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे और छात्रों पर आंसू गैस के गोले दागे गए, लाठीचार्ज किया गया और गोलीबारी की गई. याचिका में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज किए जाने की मांग की गई है.

कई लोगों को लिया था हिरासत मेंबता दें कि जेएमआईयू छात्रों और स्थानीय लोगों ने संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ 15 दिसम्बर, 2019 को दिल्ली के जामिया नगर में विरोध प्रदर्शन किया था. न्यू फ्रेंडस कॉलोनी में पुलिस के साथ हुई झड़प के बाद प्रदर्शनकारियों ने चार बसों और दो पुलिस वाहनों को जला दिया था. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया था और विश्वविद्यालय परिसर में घुसने से पहले भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े थे. पुलिस ने हिंसा में कथित तौर पर शामिल कई लोगों को हिरासत में लिया था.

याचिका में पुलिस पर लगे गंभीर आरोप
अधिवक्ताओं असगर खान और तारिक नासिर के जरिए दाखिल की गई याचिका में आरोप लगाया गया है, ‘पुलिस अधिकारियों ने गंभीर अपराध किए हैं...निर्दोष प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस अधिकारियों द्वारा इस्तेमाल किए गये अनावश्यक बल और इस तरह की अवैध तथा गैर कानूनी गतिविधियों के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.’

पुलिस पर दर्ज हो FIR
याचिका में दावा किया गया है कि कथित पुलिस हमले के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पुलिस में की गई कई शिकायतों के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. इसमें कहा गया है, ‘पुलिस अधिकारियों ने विश्वविद्यालय के परिसर में घुसकर विश्वविद्यालय के जामा मस्जिद द्वार पर डयूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों पर हमला किया. अधिकारियों ने उन्हें बुरी तरह से पीटा.’ याचिका में कहा गया है कि पुलिस ने कई छात्रों को विभिन्न पुलिस थानों में कथित तौर पर हिरासत में लिया.

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First published: January 22, 2020, 9:30 PM IST
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