कोरोना काल में अदालतों ने शुरू किया 'अगली तारीख अभियान', हेल्पलाइन नबंर से मिलेगी पेशी की तारीख

तीस हजारी कोर्ट का फाइल फोटो.
तीस हजारी कोर्ट का फाइल फोटो.

करोना महामारी (Karona epidemic) के कारण राजधानी दिल्ली के कोर्ट (Courts of delhi) बंद हैं. लोगों को यहां अगली तारीख दी जा रही है. इसके लिए हेल्पलाइन नंबर (Helpline number) जारी किया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 17, 2020, 10:29 PM IST
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नई दिल्ली. करोना महामारी (Karona epidemic) से राजधानी दिल्ली के कोर्ट (Courts of delhi) भी नहीं बचे हैं. लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान काफी वक्त तक कोर्ट बंद रहे और डिजिटल तकनीकी का पालन करते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (Video Conferencing) से ऑनलाइन कोर्ट में कार्रवाई शुरू की गई. धीरे-धीरे राजधानी दिल्ली की कुछ अदालतों को खोला गया है, लेकिन कोर्ट में सोशल डिस्टेंसिंग (Social Distancing) का पालन करवाना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है.

राजधानी दिल्ली के पूर्वी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण इसी को अगली तारीख अभियान की शुरुआत की है. हालांकि इस अभियान की शुरुआत करने के बाद कोर्ट केस की अगली तारीख का पता करने के लिए लोगों को कोर्ट के चक्कर नहीं काटने होंगे. बस एक फोन कॉल आने पर उन्हें पेशी की नई तारीख पता चल जाएगी. इससे लोगों का समय बचेगा. साथ ही साथ करोना काल में भीड़ में जाने से भी निजात मिलेगी.

नए अभियान से मिल रही सफलता
डीएलएसए के सचिव और जज सुमित आनंद ने कहा है कि कुछ ही दिन पहले ही अगली तारीख अभियान की शुरुआत की गई है. जिसमें अच्छी सफलता मिल रही है. यह अभियान इसलिए शुरू किया गया है कि कोरोना काल में कड़कड़डूमा कोर्ट में लोगों की भीड़ न बढ़े. बड़ी संख्या में लोग सिर्फ इसलिए कोर्ट आ रहे हैं, जिससे वह अपने केस की तारीख पता कर सकें.
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अपने केस को जानने के लिए इस नम्बर पर करे कॉल
तारीख के लिए लोगों की परेशानी को दूर करने के लिए कोरोना की रोकथाम के लिए डीएलएसए ने हेल्पलाइन नंबर 9667992793 जारी किया है. सुबह 10:30 से दोपहर 3:30 बजे तक कोई भी इस नंबर पर कॉल करके केस की तारीख पता कर सकता है. कॉल करने वाले किसी व्यक्ति को काल करते समय अपना केस नंबर और कोर्ट या एफआइआर का नंबर बताना होगा. इसके साथ ही कहा कि किसी जरूरतमंद को अगर किसी कानूनी सहायता की जरूरत है तो वह भी इस नंबर पर कॉल कर सकता है. हालकि इस अभियान को जन जन तक पहुंचाने के लिए आरडब्ल्यूए, के अलावा पुलिस की भी मदद ली जा रही है.
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