दिल्ली पर कोरोना और प्रदूषण का डबल अटैक, सर्दियों में होगी परेशानी, डॉक्टर ने दी ये सलाह

डॉक्टर का कहना है कि कपड़े का बना मास्क प्रदूषण के समय में उपयोगी साबित नहीं होगा.
डॉक्टर का कहना है कि कपड़े का बना मास्क प्रदूषण के समय में उपयोगी साबित नहीं होगा.

दिल्ली (Delhi) में कोरोना वायरस के साथ अब प्रदूषण का खतरा भी बढ़ता जा रहा है. अपोलो अस्पताल के डॉ.विवेक गुप्ता का कहना है कि दिल्ली के लोगों के लिए सर्दियों का समय काफी खतरनाक हो सकता है. लोगों को सर्जिकल मास्क या फिर N-95 मास्क का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 17, 2020, 5:36 PM IST
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दिल्ली. कोरोना महामारी (COVID-19) के बीच अब दिल्ली-NCR में प्रदूषण का खतरा बढ़ता जा रहा है. जानकारों का कहना है कि पिछले चार दिनों में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (Air quality index) 300 से ऊपर चला गया है, जो कि गंभीर चिंता का विषय है. ऐसे में लोगों के लिए अब दोहरी चुनौती सामने आ चुकी है. कोरोना के साथ-साथ प्रदूषण से भी खुद को बचाना होगा. जानकारों का कहना है कि कोरोना और प्रदूषण दोनों के लिए मास्क अत्यक ही जरूरी है. लोगों को अपने स्वास्थ्य को लेकर कहीं भी कोताही नहीं बरतनी चाहिए. घर से जब भी निकलें तो मास्क का प्रयोग जरूर करें. हालांकि दिल्ली-NCR में लोग इसके प्रति सजगता भी दिखा रहे हैं. मास्क दुकानदारों का कहना है कि प्रदूषण को देखते हुए कपड़े के बने मास्क के साथ-साथ N95 मास्क की मांग में 20-35 प्रतिशत का इजाफा देखा गया है.

सर्दियों में खराब हो जाती है दिल्ली की स्थिति

दिल्ली-NCR के प्रदूषण स्तर को लेकर अपोलो अस्पताल के प्रो. डॉ. विवेक गुप्ता का मानना है कि किसी ने सोचा नहीं था कि कोरोना काल इतना लंबा चलने वाला है. अब सर्दी की शुरुआत हो चुकी है. यह समय दिल्ली के लोगों के लिए काफी खतरनाक होता है. प्रदूषण इसका सबसे बड़ा कारण है. बीते तीन-चार दिनों में दिल्ली में एयर क्वॉलिटी इंडेक्स 300 के पार चला गया है. ऐसे समय में जनता में इस बात को लेकर काफी भ्रम का माहौल है कि कौन सा मास्क पहनें और कौन सा नहीं.



प्रदूषण से बचने के लिए N-95 मास्क ही कारगर: डॉक्टर
डॉ. गुप्ता ने कहा कि अगर प्रदूषण बढ़ेगा तो एयर पार्टिक्लस भी ज्यादा होंगे. कुछ दिनों में AQI तीन सौ के पार चला गया है. ऐसी स्थिति में प्रदूषण के पार्टिकल्स में वायरस की मौजूदगी रह सकती है. जो कि आसानी से शरीर के अंदर प्रवेश कर सकता है. ऐसी स्थिति में मैं लोगों से कहना चाहुंगा कि या तो वे सर्जिकल मास्क का प्रयोग करें या फिर N-95 मास्क पहनें, जिसमें 95 प्रतिशत पार्टिकल ब्लॉक हो जाते हैं. कपड़े का बना मास्क प्रदूषण के समय में उपयोगी साबित नहीं होगा.

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शनिवार को 'खराब' श्रेणी में दर्ज की गई दिल्ली की हवा की गुणवत्ता

राजधानी दिल्ली में वायु की गुणवत्ता शनिवार को 'खराब' श्रेणी में दर्ज की गई, लेकिन हवा की गति ठीक होने से इसमें आंशिक सुधार होने की संभावना है. सरकारी एजेंसियों ने यह जानकारी दी. गुरुवार को दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर पिछले आठ महीने में सबसे ज्यादा दर्ज किया गया, लेकिन शुक्रवार को हवा की गति ठीक होने से प्रदूषक कण में बिखराव हुआ और वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज की गई. वहीं पराली जलाए जाने ने दिल्ली में पीएम 2.5 कण के जमा होने में 18 फीसदी का योगदान दिया है. शहर में सुबह 10 बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 263 दर्ज किया गया. शुक्रवार को यह 239 दर्ज किया गया और गुरुवार को यह 315 दर्ज किया गया, जो कि इस साल 12 फरवरी को दर्ज किए गए आंकड़े 320 से खराब है.

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बता दें कि, वायु गुणवत्ता 0 से 50 के बीच 'अच्छी', 51 से 100 के बीच 'संतोषजनक' और 101 से 200 के बीच 'मध्यम' और 201 से 300 के बीच 'खराब' और 301 से 400 के बीच 'बेहद खराब' और 401 से 500 के बीच 'गंभीर' श्रेणी में मानी जाती है.
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