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कोरोना के कम होते मामले तीसरी लहर को बुलावा तो नहीं, जानें क्‍या कह रहे हैं विशेषज्ञ

कोरोना के कम होते मामले तीसरी लहर को बुलावा तो नहीं, जानें क्‍या कह रहे हैं विशेषज्ञ

कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है. (File pic)

कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है. (File pic)

पिछले साल जब दिवाली के आसपास से ही लोगों ने लापरवाही बरतनी शुरू की थी तो दिल्‍ली में कोरोना का एक बहुत बड़ा पीक आया था. इसके बाद जब पीक तो कम हो गया लेकिन मार्च-अप्रैल में फिर से लोग इकठ्ठे होने शुरू हो गए तो लोगों ने एक बहुत ही खराब समय देखा था.

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    नई दिल्‍ली. देश में कोरोना के मामले काफी कम हो गए हैं लेकिन रोजाना आ रहे नए मामलों को देखें तो अभी भी भारत से कोविड (Covid-19) का खतरा टला नहीं है. करीब 9 हजार केसेज रोजाना आने और लोगों के पूरी तरह लापरवाह होने के बाद विशेषज्ञ सभी को आगाह कर रहे हैं. स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि एक तरफ कोरोना के मामले कम हो रहे हैं लेकिन यह तीसरी लहर (Corona Third Wave) को बुलावा भी हो सकता है. दूसरी लहर से पहले भी कोरोना के मामलों में ऐसी शांति देखी गई थी जिसके बाद लोग पूरी तरह कोविड के डर को भूलकर व्‍यवहार कर रहे थे और फिर अप्रैल-मई-जून में कोविड की भयावहता देखने को मिली थी.

    जोधपुर स्थित आईसीएमआर, एनआईआईआरएनसीडी (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इम्पलीमेंटेशन रिसर्च ऑन नॉन कम्यूनिकेबल डिसीज) के निदेशक और कम्यूनिटी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अरुण शर्मा का कहना है कि पिछले साल जब दिवाली के आसपास से ही लोगों ने लापरवाही बरतनी शुरू की थी तो दिल्‍ली में कोरोना का एक बहुत बड़ा पीक आया था. इसके बाद जब पीक तो कम हो गया लेकिन मार्च-अप्रैल में फिर से लोग इकठ्ठे होने शुरू हो गए तो लोगों ने एक बहुत ही खराब समय देखा था. मई-जून में कोरोना की दूसरी लहर में जान से हाथ धोते परिजनों और संबंधियों को देखकर लोगों के मन में इसे लेकर खौफ पैदा हो गया था. हालांकि उस दौर और अब के समय में तीन चीजों का फर्क है.

    डॉ. शर्मा कहते हैं कि पहले और अब में पहला अंतर यह है कि उस समय कोरोना का वैक्‍सीनेशन (Corona Vaccination) नहीं मिला था लेकिन अब जो समय गुजरा है उसमें बहुत सारे लोगों को कोरोना वैक्‍सीन की पहली डोज मिल चुकी है. 118 करोड़ के आसपास वैक्‍सीन लगने से एक हद तक लोग सुरक्षित हो गए हैं. जैसा कि कहा जा रहा है कि वैक्‍सीन की एक खुराक (First Dose) मिलने के बाद लोगों को अगर कोरोना होगा तो वह माइल्‍ड लक्षणों के साथ ही होगा क्‍योंकि इनमें वायरस से लड़ने की इम्‍यूनिटी (Immunity) पैदा हो गई है. वहीं ऐसे भी लोग हैं जिन्‍हें पहले कोविड हो चुका है और उनमें कोरोना वायरस से लड़ने की क्षमता और एंटीबॉडी (Antibody) पैदा हो चुकी हैं. लिहाजा पहले और अब में यह एक बड़ा बदलाव आया है.

    दूसरा बड़ा अंतर यह है कि अब जांचों में भी कमी आई है. वैक्‍सीनेशन और कोरोना संक्रमित (Corona Infected) होने के बाद होने वाले कोरोना में चूंकि लक्षण बहुत साधारण रहते हैं. जैसे कि बुखार, खांसी या कुछ अन्‍य, ऐसे में लोग जल्‍दी ठीक हो जाते हैं. साथ ही आसपास के लोगों को भी ठीक होते देखते हैं तो वे जांच कराने की जरूरत महसूस नहीं करते. जिसकी वजह से संक्रमण की रफ्तार का ठीक-ठीक ब्‍यौरा नहीं मिल पाता. लिहाजा आंकड़ों को देखने से लगता है कि कोरोना के मामले कम होते जा रहे हैं या कोरोना अब घट रहा है. हालांकि इससे स्थिति का सही-सही आकलन नहीं किया जा सकता.

    इन दोनों चीजों का प्रभाव अब वैक्‍सीनेशन पर पड़ रहा है. संक्रमण कम होने और जांचों की संख्या घटने के कारण लोग कोरोना वैक्‍सीन के प्रति ढीले पड़ रहे हैं या तय कर चुके हैं कि अब वैक्‍सीनेशन नहीं कराना. इस वजह से वैक्‍सीनेशन का अनुपात लगातार घट रहा है. हालांकि यह नहीं होना चाहिए. इससे नुकसान ही होने की संभावना है.

    विदेशों से सीखने की जरूरत
    डॉ. शर्मा कहते हैं कि यूरोपीय देशों में एक बार फिर से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं. वहीं एशियन देशों में चीन में कई शहरों में लॉकडाउन लग ही चुका है. रूस में हालात काफी जटिल हो रहे हैं. जबकि इन सभी देशों में काफी हद तक वैक्‍सीनेशन हो चुका है. खास बात है कि इन देशों में भले ही वैक्‍सीनेशन हुआ है लेकिन यहां जांचें कम नहीं हुई. जिसकी वजह से कोरोना के मामले पकड़ में आ रहे हैं. अब अगर भारत को देखें तो यहां जांचें कम हो रही हैं और मामले कम आ रहे हैं लेकिन अगर यहां कोई नया वेरिएंट आया या कोरोना वायरस में कोई म्‍यूटेशन हुआ जो वैक्‍सीन के असर को भी नाकाबिल कर सकता है तो स्थितियां काफी खराब हो सकती हैं.

    शादियों में लापरवाही पड़ सकती है भारी
    अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्‍थान दिल्‍ली के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्र कहते हैं कि अभी हालात संभले हुए हैं लेकिन इन्‍हें बिगड़ने में समय नहीं लगेगा. अभी भी कोरोना के मामले शून्‍य नहीं हुए हैं. पिछले साल और जनवरी से मार्च में भी 10 हजार के आसपास मामले आ रहे थे और अभी भी आ रहे हैं लेकिन एक बार फिर लोगों ने लापरवाही बरतनी शुरू कर दी है. शादियों में कोविड अनुरूप व्‍यवहार का पालन नहीं हो रहा है. मास्‍क नहीं पहना जा रहा. दूर-दूर से लोग शरीक हो रहे हैं. सरकार के बार-बार समझाने के बाद भी अगर जनता नहीं ध्‍यान देती तो कोरोना का फैलाव हो सकता है. त्‍यौहार तो निकल गए लेकिन शादियों का यह मौसम काफी चीजें खराब कर सकता है.

    Tags: Corona vaccine, Corona Virus, COVID 19, COVID test

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