COVID-19: दिल्ली-गुड़गांव बॉर्डर सील, डॉक्टरों-नर्सों को रोकने से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था

दिल्ली-गुड़गांव बॉर्डर सील कर दिया गया है

दिल्ली-गुड़गांव बॉर्डर सील (Delhi-Gurgram Border Saeal) करने के बाद डॉक्टरों, नर्सों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को सीमा पार करने की इजाजत नहीं ​देने से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा उठी है.

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    नई दिल्ली. दिल्ली-गुड़गांव बॉर्डर सील (Delhi-Gurgram Border Saeal) करने के बाद डॉक्टरों, नर्सों व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को सीमा पार करने की इजाजत नहीं ​देने से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा उठी है. एक ओर डॉक्टरों और नर्सों को काम करने में परेशानी हो रही है तो दूसरी ओर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीज भी हलकान हो उठे हैं. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, डॉ. मनदीप मल्होत्रा को अपने गले के कैंसर से पीड़ित एक मरीज की सर्जरी 30 अप्रैल को करनी थी, लेकिन उन्हें इसे आगे के लिए टालनी पड़ी. डॉ. मल्होत्रा ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि वह अगली सुबह अपने गुड़गांव (Gurugram) स्थित रेसिडेंस वसंत कुंज के फोर्टिस अस्पताल (Fortis Hospital) नहीं पहुंच पाएंगे. दिल्ली के न्यूरो-इंटरवेंशनिस्ट डॉ. तारिक मतीन को भी अपने एक मरीज के इलाज की किसी खास प्रक्रिया को आगे स्थगित करना पड़ा क्योंकि वे गुड़गांव के नारायण सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में नहीं पहुंच पाए.

    आईडी और पास होने के बाद बॉर्डर पर रोक रही है पुलिस

    दिल्ली-गुड़गांव बॉर्डर 01 मई की सुबह से सील कर दी गई. इसके बाद दिल्ली-गुड़गांव शहरों में रहने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ता खुद को फंसा हुआ महसूस करने लगे. दोनों शहरों की सीमाओं पर स्थि​त चौकियों पर लंबी कतारों के अलावा, स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि उन्हें पुलिस कर्मियों से निपटना था, क्योंकि इनके पास आईडी कार्ड होने और इमरजेंसी वर्क को लेकर उचित तर्क होने के इन्हें आने-जाने नहीं दिया गया. गुड़गांव के अधिकारियों ने निर्देश दिया है कि वहां काम करने वाले और दिल्ली में रहने वाले और इसके विपरीत गुड़गांव में रहने वाले और दिल्ली में कार करने वाले अपने कार्यस्थल से करीब कोई रहने का प्रबंध कर लें ताकि सीमा पार आने-जाने से बचा जा सके.

    'कैंसर की सर्जरी रोकना, उसे फैलने की इजाजत देना है'

    मल्होत्रा ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि मैं इस मरीज का दो महीने से इलाज कर रहा हूं और उसकी सर्जरी बहुत महत्वपूर्ण है. मैं उसकी सर्जरी एक या दो दिन देरी कर सकता हूं, शायद एक सप्ताह भी लेकिन इससे ज्यादा टालने से तो कैंसर का प्रसार हो सकता है. उन्होंने कहा कि अस्पताल ने उन्हें दिल्ली में रहने के लिए आवास दिया है, लेकिन उनकी बुजुर्ग दादी और दो छोटे बच्चे उनके साथ नहीं रह सकते हैं. उन्होंने कहा कि एक दो-तीन दिनों के लिए घर से दूर रहा सकता है लेकिन यह अनिश्चित है.

    मरीज भी उठा रहे हैं परेशानी

    मल्होत्रा ​​ने कहा कि यहां तक ​​कि मरीज भी परेशानी में हैं क्योंकि कई लोग इलाज के लिए सीमा पार करते हैं. मेरे पास एक गुड़गांव की मरीज हैं, जिन्हें स्तन कैंसर है और उनकी सर्जरी हुई है. अब उसे पोस्ट-सर्जरी विकिरण की आवश्यकता है. मैंने उसे गुड़गांव के एक अस्पताल में करवाने के लिए कहा, लेकिन यह पता चला कि उसके कई कर्मचारी दिल्ली में रहते हैं. शुक्रवार की सुबह 7.30 बजे उसकी पोस्ट-सर्जरी होनी थी. उनकी सर्जरी से संबंधित ए​नेस्थीसिया वरिष्ठ सलाहकार आरके अग्रवाल (58 वर्ष) सर गंगा राम अस्पताल में कार्यरत हैं. गुड़गांव स्थित निवास से वे काम के चले और कुछ देर में पहुंच गए. लेकिन दोपहर में जब वे अपने घर गुड़गांव लौट रहे थे तो उन्हें पुलिस से विनती करता हुआ पाया.

    'इन हालातों में काम करने से डर लग रहा है'

    आरके अग्रवाल पुलिस वालों से कह रहे थे कि मैं एक कोविड-19 ​​अस्पताल में काम करता हूं और मैं वेंटिलेटर के साथ काम करता हूं, जो इस समय बहुत महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि मैंने पुलिस कर्मियों को अपना आईडी कार्ड दिखाया. कोविड-19 हॉस्पिटल होने का एक पत्र भी दिखाया. इसके बावजूद पुलिस वालों ने मेरी बात अनसुनी कर दी. मुझे अपमानित महसूस हुआ. मेरी कार में एसी भी काम नहीं कर रहा था और मैंने पुलिसकर्मियों से कहा कि मैं थका हुआ हूं, मैं बूढ़ा हो रहा हूं और उन्हें मुझे जाना चाहिए. मैंने दोपहर 1.30 बजे अस्पताल छोड़ा और आखिरकार शाम 4.45 बजे घर पहुंचा. उन्होंने कहा कि इन हालातों में वह आने वाले दिनों में काम करने से डरते हैं.

    दिल्ली के चाणक्यपुरी में प्राइमस अस्पताल के एनेस्थीसिया विभाग के प्रमुख गुड़गांव के डॉ. अजय सिंघल ने कहा कि गुरुवार को पता चला कि सीमा सील कर दी गई थी, तो वह काम पर नहीं गए. उन्होंने कहा कि शुक्र है कि हमारे पास दिल्ली स्थित एनेस्थेटिस्ट हैं. वे हमसे दिल्ली में रहने की व्यवस्था करने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?

    40% स्वास्थ्यकर्मी दिल्ली में रहते हैं

    डॉ. मतीन ने कहा कि गुड़गांव अस्पताल के 40% स्वास्थ्यकर्मी दिल्ली में रहते हैं और वे शुक्रवार को काम पर नहीं आ सके. इसके चलते नेफ्रोलॉजी यूनिट बंद है. डायलिसिस बहुत महत्वपूर्ण है. अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को इस तरह से बाधित नहीं होना चाहिए. वसंत कुंज स्थित फोर्टिस में कार्यरत गुंड़गांव निवासी न्यूरोसर्जन डॉ. अनुराग गुप्ता ने कहा कि एनसीआर हमेशा एक इकाई जैसा रहा है और इस सीलिंग ने हमारे जीवन को बहुत कठिन बना दिया है. मैं अस्पताल में एकमात्र न्यूरोसर्जन हूं. मैंने एक फोर्टिस गुड़गांव के न्यूरोसर्जन से मदद मांगी. वे दिल्ली में रहते हैं और मेरे लिए वे वसंत कुंज में फोर्टिस में मेरे मरीज की देखरेख करेंगे. मेरी पत्नी फोर्टिस गुड़गांव में काम करती हैं और उसके हॉस्पिटल में काम करने वाले विभागाध्यक्ष और निदेशक आने में असमर्थ हैं क्योंकि वे दिल्ली में रहते हैं. ”

    'हम दो घंटे बॉर्डर पर फंसे रहे'

    दिल्ली के एक निजी अस्पताल के एक डॉक्टर, जिन्होंने नाम नहीं लेने की शर्त पर बताया कि वह और उनके पति भी डॉक्टर हैं, जो अपनी शिफ्ट पूरी करने के बाद लगभग 2 बजे दिल्ली-गुड़गांव बॉर्डर पर NH-8 टोल प्लाजा पर पहुंचे तो वहां कारों की लंबी कतार दिखी. हम जानते थे कि यह आदेश आज लागू हो रहा है इसलिए हम गुड़गांव पहुंचने के लिए थोड़ा जल्दी निकल गए. हम गुड़गांव में अपने तीन साल के बेटे के साथ रहते हैं. चौकी पहुंचने से पहले हमें दो घंटे तक ट्रैफिक में इंतजार करना पड़ा. वहां हमने अपने अस्पताल के आईडी और राज्य सरकार द्वारा जारी पास दिखाया. इसके बावजूद पुलिस ने कहा कि हम आपको जाने की इजाजत नहीं दे सकते हैं.

    'पुलिस वालों ने दी हमें एफआईआर की धमकी'

    उन्होंने कहा कि हमारे अलावा दिल्ली-गुड़गांव सीमा पर 15-20 डॉक्टर मौजूद थे. पुलिस ने हमारे खिलाफ एफआईआर की भी धमकी दी. बहुत मिन्नत करने के बाद, उन्होंने आखिरकार हमें चेतावनी के साथ जाने दिया कि यह छूट केवल आज के लिए दी जा रही है. पुलिस वालों ने हमें यह चेतावनी दी कि हम कल बगैर वैध पास के बिना लौटते हैं, तो हमें आरोपों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

    गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में काम करने वाले एक अन्य डॉक्टर, जो दिल्ली से काम करने के लिए गए थे, ने कहा कि उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि वह आईसीयू में काम करते थे और उनके पास वैध पास हैं. डॉक्टर ने बताया कि पुलिस वाले केवल केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए पास वालों को ही जाने दे रहे हैं.

    'प्रशासन कार्यस्थल के पास रहने की व्यवस्था करे'

    ऑल इंडिया गवर्नमेंट नर्सेज फेडरेशन के महासचिव जी के खुराना ने कहा कि अतिरिक्त प्रतिबंध स्वास्थ्य कर्मियों के आने-जाने में समस्या पैदा कर रहे हैं. हमें काम के लिए बुलाया गया है तभी हम घर से निकल रहे हैं. पुलिस अधिकारियों को या तो हमें आने-जाने की अनुमति देनी चाहिए या हमें अपने कार्यस्थल के पास रहने की व्यवस्था करनी चाहिए.

    डॉ. डैंग्स लैब के सीईओ डॉ. अर्जुन डांग ने कहा कि कोरोनो वायरस टेस्ट करने वाले डायग्नोस्टिक स्टाफ को परिवहन की समस्या के चलते आने जाने में दिक्कत हो रही है और हमें लैब में कम लोगों के साथ काम करना पड़ रहा है. इससे समस्या पैदा हो रही है.

    'इन मरीजों की चिकित्सा भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है'

    गुड़गांव में फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट की जोनल डायरेक्टर डॉ. रितु गर्ग ने कहा कि सीमा पार आवाजाही पर रोक लगाने से ट्रांसमिशन को कम करने में मदद मिल सकती है. हमें कीमोथेरेपी, डायलिसिस और अन्य चिकित्सा आपात स्थितियों में रोगियों को चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने की भी आवश्यकता है.

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