Covid-19: दवाओं और उपकरणों को आवश्यक वस्तु घोषित करने के लिए याचिका दाखिल

 याचिका में दवाओं तथा उपकरणों की जमाखोरी एवं कालाबाजारी करने वाले मामलों की सुनवाई के त्वरित अदालतों के गठन का भी अनुरोध किया गया है.(फाइल फोटो)

याचिका में दवाओं तथा उपकरणों की जमाखोरी एवं कालाबाजारी करने वाले मामलों की सुनवाई के त्वरित अदालतों के गठन का भी अनुरोध किया गया है.(फाइल फोटो)

दिल्ली निवासी मनीषा चौहान (Manisha Chauhan) ने अदालतों में ऐसे मामलों को देखने के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की भी मांग की है.

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नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) में दायर एक जनहित याचिका में अनुरोध किया गया है कि कोविड-19 (COVID-19) के मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक दवाओं और उपकरणों को आवश्यक वस्तु माना जाए. अदालत ने सोमवार को इस मुद्दे पर केंद्र तथा दिल्ली सरकार से जवाब मांगा. न्यायमूर्ति विपिन सांघी तथा न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तथा दिल्ली सरकार को इस याचिका पर नोटिस जारी किये. याचिका में दवाओं तथा उपकरणों की जमाखोरी एवं कालाबाजारी करने वाले मामलों की सुनवाई के त्वरित अदालतों के गठन का भी अनुरोध किया गया है. दिल्ली निवासी मनीषा चौहान (Manisha Chauhan) ने अदालतों में ऐसे मामलों को देखने के लिए विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की भी मांग की है.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकीलों ने अदालत से कहा कि कोविड उपचार में आवश्यक दवाओं और उपकरणों को आवश्यक वस्तु घोषित करने संबंधी अधिसूचना नहीं होने के कारण इनकी जमाखोरी और कालाबाजारी हो रही है.

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13 दिन के बाद यानी 17 मई की तारीख तय की गई थी
वहीं, कुछ देर पहले खबर सामने आई थी कि कोविड-19 वैश्विक महामारी के बढ़ते मामलों के बीच यहां सेंट्रल विस्टा के निर्माण पर रोक लगाने के लिये दायर जनहित याचिका पर शीघ्र सुनवाई का दिल्ली उच्च न्यायालय से सोमवार को अनुरोध किया गया. वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की पीठ के समक्ष इसका उल्लेख किया जिस पर अदालत ने कहा कि इसके पहले अर्जी दायर की जाए. लूथरा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय (Supreme court) ने सात मई को याचिकाकर्ताओं से कहा था कि यदि वे याचिका पर शीघ्र सुनवाई चाहते हैं तो वे दिल्ली उच्च न्यायालय जायें और इसी वजह से उन्होंने उच्च न्यायालय में इस मामले का जिक्र किया. याचिकाकर्ताओं आन्या मल्होत्रा और सोहेल हाशमी उच्च न्यायालय के चार मई के उस आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत पहुचे थे जिसमें अदालत ने जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए 13 दिन के बाद यानी 17 मई की तारीख तय की थी.

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