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दिल्ली: लॉकडाउन में फंसा था पति, पुलिस अधिकारी ने पहुंचाया बीमार प्रेग्नेंट पत्नी के पास, हर तरफ हो रही तारीफ

लॉकडाउन में फंसे हसीब को एडिश्नल डीसीपी ज्ञानेश ने पहुंचाया बीमार प्रेग्नेंट पत्नी के पास (फाइल फोटो)

लॉकडाउन में फंसे हसीब को एडिश्नल डीसीपी ज्ञानेश ने पहुंचाया बीमार प्रेग्नेंट पत्नी के पास (फाइल फोटो)

हसीब को लगा कि वह किसी पुलिस अधिकारी (Police Officer) को जानता तक नहीं है, तो कोई क्यों उसकी मदद करेगा. लेकिन उसका यह भ्रम तब दूर हुआ जब वह सरिता विहार थाना इलाके में स्थित डीसीपी के दफ्तर गया और वहां जाने के बाद वो अपनी तत्काल अर्जी डीसीपी के सामने दी.

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(शंकर आनंद)

नई दिल्ली. लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान कानून का उल्लंघन करने वालों पर पुलिसिया डंडे की कार्रवाई हमलोग कई बार देखते हैं. लेकिन कई बार ऐसा भी देखने को मिलता है की जब पुलिस के जवानों का और अधिकारियों का एक कदम कितने लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट ला देता है. एक ऐसी ही घटना को जानते हैं एक ऐसे परेशान शख्स की जुबानी जिसका नाम है हसीब उर रहमान, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हरदोई का रहने वाला है. लेकिन अपने काम के लिए सिलसिले में दिल्ली में कार्य करता है. दरअसल, इस लॉकडाउन में पुलिस की मदद उसके परिवार वालों के लिए एक वरदान साबित हुई है.

घर से आ रहे थे बार-बार फोन
साउथ ईस्ट दिल्ली के ओखला इलाके में रहने वाले हसीब उर रहमान शम्सी उस वक्त अचानक परेशान हो गया जब उसे पता चला की यूपी के हरदोई में उसकी पत्नी एक बच्चे को जन्म देने वाली है लेकिन अचानक उसकी तबीयत बेहद खराब होती जा रही है. पैसे के साथ-साथ तत्काल उसे दिल्ली से हरदोई पहुंचना था. उस वक्त उसके घर में छोटे बच्चे समेत हसीब उर रहमान की बुजुर्ग मां-पिता और उसका छोटा बच्चा ही था. हसीब उर रहमान लॉक डाउन की वजह से दिल्ली में ही फंसा हुआ था. घर से कई बार फोन आ रहे थे. लेकिन वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता था. तभी अचानक किसी पड़ोसी ने हसीब उर रहमान को ये पुलिस से मदद मांगने की सलाह दी. हसीब को लगा कि वह किसी पुलिस अधिकारी को जानता तक नहीं है, तो कोई क्यों उसकी मदद करेगा. लेकिन उसका यह भ्रम तब दूर हुआ जब वह सरिता विहार थाना इलाके में स्थित डीसीपी के दफ्तर गया और वहां जाने के बाद वो अपनी तत्काल अर्जी डीसीपी के सामने दी.

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हसीब की बेटी (फाइल फोटो)


20 मिनट के अंदर दिलवाया पास
मामले की जानकारी मिलने के बाद एडिशनल डीसीपी कुमार ज्ञानेश ने हसीब से तमाम जानकारियां ली और करीब 20 मिनट के अंदर मूवमेंट पास बनवा कर उसे सौंप दिया. हसीब उर रहमान खुश होकर जाने लगा, तभी एडिश्नल डीसीपी कुमार ज्ञानेश ने पूछा की पैसे वगैरह हैं ना. या कोई और मदद चाहिए? हसीब ने उन्हें कहा कि उसके पास फिलहाल पैसे हैं और वह उन्हें शुक्रिया कह कर घर की ओर निकल पड़ा. हसीब ने आगे बताया कि जब वह घर पहुंचा तो उसे एक प्यारी सी बेटी हुई और सबसे पहले उसने यह खुशखबरी एडिश्नल डीएसपी कुमार ज्ञानेश को ही दी.

'हर पुलिसकर्मी का फर्ज'
मामले पर औपचारिक तौर पर पुष्टि के लिए जब कुमार ज्ञानेश को जब कॉल किया गया तो उनका कहना था की- ये फर्ज हर दिल्ली पुलिस के जवानों और अधिकारियों का है कि वे जरूरतमंद लोगों की मदद करें. उन्होंने बताया कि साउथ इस्ट दिल्ली की जिला पुलिस अक्सर ऐसे कार्य को करते रहते हैं . हमारे डीसीपी आर. पी. मीना और एडिश्नल डीसीपी ढाल सिंह उर्फ एसपी पवार द्वारा साफ तौर पर ये निर्देश रोजाना तमाम जवानों को भी दिया जाता है.

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