दिल्ली: तिहाड़ जेल के भीतर स्थापित किया गया Covid-19 टीकाकरण केंद्र

फिलहाल अभी इसका हल खोजा रहा है. (फाइल फोटो)

फिलहाल अभी इसका हल खोजा रहा है. (फाइल फोटो)

अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को जेल संख्या तीन में केंद्रीय कारागार अस्पताल (Hospital) में यह केंद्र स्थापित किया गया. जेल अधिकारियों ने बताया कि तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों के 70 से 80 कैदियों को अब तक टीके लगाए गए हैं.

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नई दिल्ली. दिल्ली कारागार विभाग ने तिहाड़ जेल के भीतर कोविड-19 रोधी टीकाकरण केंद्र स्थापित किया है. अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी. दिल्ली के कारागारों में 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के 326 कैदी हैं. वहीं,  45-59 आयु वर्ग के 300 से ज्यादा कैदी ऐसे हैं, जो गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं. राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान के तहत फिलहाल ये दो वर्ग टीका लगवाने के दायरे में आते हैं.

अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को जेल संख्या तीन में केंद्रीय कारागार अस्पताल में यह केंद्र स्थापित किया गया. जेल अधिकारियों ने बताया कि तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों के 70 से 80 कैदियों को अब तक टीके लगाए गए हैं. महानिदेशक (कारागार) संदीप गोयल ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो मंडोली जेल में भी टीकाकरण केंद्र खोला जाएगा. इससे पहले तिहाड़ जेल के कैदियों को टीकाकरण के लिए दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाया जा रहा था. कैदियों के लिए टीकाकरण अभियान की शुरुआत 18 मार्च से हुई और पहले दिन 13 कैदियों को टीके की खुराक दी गई.

फिलहाल अभी इसका हल खोजा रहा है

जेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि टीकाकरण के दायरे में आने वाले कैदियों के परिवारों को व्हाट्सऐप के जरिए जरूरी दस्तावेज भेजने को कहा गया था, ताकि टीकाकरण के लिए उनका पंजीकरण हो सके. अधिकारी ने बताया कि टीका लेने वाले किसी भी कैदी में प्रतिकूल प्रभाव देखने को नहीं मिले हैं. अधिकारी ने कहा कि कई ऐसे कैदी हैं जिनके पास टीकाकरण प्रक्रिया के लिए जरूरी कागजात नहीं हैं इसलिए उनका चयन टीकाकरण के लिए नहीं हो सका. फिलहाल अभी इसका हल खोजा रहा है.
 बहुत नुकसान उठाना पड़ेगा

वहीं, कुछ देर पहले खबर सामने आई थी कि जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्रों ने केंद्र सरकार से छात्रों के साथ ही कॉलेज स्‍टाफ और शिक्षकों के लिए फ्री वैक्‍सीन देने की मांग की है. साथ ही अपील की है कि कॉलेज कैंपसों को दोबारा खोला जाए. ऑल इंडिया स्‍टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की ओर से मांग की गई है कि पिछले साल लॉकडाउन और फिर स्‍कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज बंद होने से पढ़ाई के मामले में पूरा साल खराब हो गया. वहीं क्‍लासरूम टीचिंग को ऑनलाइन पढ़ाई (Online Teaching) में बदल दिया गया लेकिन उससे न केवल ड्रॉप आउट की संख्‍या बढ़ी है बल्कि अधिकांश जगहों पर इंटरनेट (Internet) और स्‍मार्टफोन (Smartphone) उपलब्‍ध न होने के चलते बच्‍चे पढ़ाई नहीं कर पाए. अगर पिछले साल की तरह इस साल भी कैंपस और कॉलेज ऐसे ही बंद रहे तो छात्रों को बहुत नुकसान उठाना पड़ेगा.
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