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कोविड से सुरक्षा के लिए वैक्‍सीन की दूसरी डोज क्‍यों है जरूरी, बता रहे हैं विशेषज्ञ

कोविड से सुरक्षा के ि‍लिए कोरोना वैक्‍सीन की दोनों खुराक बेहद जरूरी हैं. तभी शत प्रतिशत सुरक्षा मिल सकती है. (shutterstock)

कोविड से सुरक्षा के ि‍लिए कोरोना वैक्‍सीन की दोनों खुराक बेहद जरूरी हैं. तभी शत प्रतिशत सुरक्षा मिल सकती है. (shutterstock)

अगर वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद चालीस फीसदी एंटीबॉडी बनती है तो शेष साठ प्रतिशत एंटीबॉडी के लिए हमें कोविड वैक्सीन (Covid Vaccine) की दूसरी डोज लेनी ही होगी जो हमें संक्रमण के प्रति शत-प्रतिशत सुरक्षा देगी और वायरस के शरीर में प्रवेश करते ही उसे उसी जगह निष्क्रिय कर देगी.

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. कोविड टीकाकरण (Covid Vaccination) में देश ने 84 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है.  जिसमें पहली डोज 62 करोड़ 46 लाख लोगों को लगाई जा चुकी है, जबकि दूसरी डोज का आंकड़ा 21 करोड़ 44 लाख है. आगामी कुछ दिनों में देश टीकाकरण में सौ करोड़ की संख्‍या को पार कर लेगा. हालांकि कोविड टीकाकरण की सफलता के लिए दूसरी डोज (Second Dose) लगवाना बेहद जरूरी है ताकि सुरक्षा के चक्र को पूरा किया जा सके.

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) की दोनों खुराक संक्रमण के प्रति ज्‍यादा मजबूत रक्षा कवच देती हैं. वैक्सीन की दूसरी डोज के महत्व को लेकर आईसीएमआर के राष्ट्रीय असंचारी रोग कार्यान्वयन अनुसंधान संस्थान ( नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इम्पलीमेंटेशन ऑन नॉन कम्यूनिकेबल डिजीज) जोधपुर स्थित डॉ.अरुण शर्मा यहां सवालों के जवाब दे रहे हैं.

सवाल. कोविड संक्रमण से सुरक्षा के लिए वैक्सीन की दोनों डोज क्यों जरूरी है?

जवाब. कोरोना संक्रमण (Corona Infection) के प्रति मजबूत सुरक्षा के लिए वैक्सीन की दोनों डोज लगवाना जरूरी है. पहली डोज (First Dose) लगवाने के बाद भी संक्रमण के प्रति रक्षा कवच तैयार होता है लेकिन कोविड की दोनों डोज को विशेषज्ञों द्वारा गहन शोध और परीक्षण के बाद स्‍वीकृत किया गया है. ऐसे में दोनों चरण के टीकाकरण के बाद ही संक्रमण के प्रति मजबूत सुरक्षा कवच तैयार किया जा सकता है इसलिए तय समय पर कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाना बेहद जरूरी है.

सवाल. क्या केवल एक खुराक से भी शरीर में संक्रमण के खिलाफ पूरी सुरक्षा बनती है?

जवाब. कोविड वैक्सीन की पहली डोज के बाद आंशिक रूप से एंटीबॉडी (Antibody) बनती हैं. एंटीबॉडी टाइटर जांच से इस बात का पता लगता है कि वैक्सीन लेने के बाद शरीर में कितनी प्रतिशत एंटीबॉडी बनी हैं. उदाहरण के लिए अगर वैक्सीन की पहली डोज लेने के बाद चालीस फीसदी एंटीबॉडी बनती है तो शेष साठ प्रतिशत एंटीबॉडी के लिए हमें कोविड वैक्सीन (Covid Vaccine) की दूसरी डोज लेनी ही होगी जो हमें संक्रमण के प्रति शत-प्रतिशत सुरक्षा देगी और वायरस के शरीर में प्रवेश करते ही उसे उसी जगह निष्क्रिय कर देगी.

सवाल. कई देशों में वैक्सीन की बूस्टर डोज को भी स्वीकृति दी गई है, क्या भारत भी बूस्टर डोज पर विचार कर सकता है?

जवाब. बूस्टर डोज दिया जाना चाहिए या नहीं, यह अभी अनुसंधान का विषय है. भारत के टीकाकरण की मॉनिटरिंग करने वाली टीम लगातार इस विषय पर नजर बनाए हुए हैं, अब तक हुए परीक्षण में बूस्टर डोज (Booster Dose) को लेकर किसी भी तरह की अनुशंसा नहीं की गई है. अगर भविष्य में इसकी जरूरत पड़ी तो विचार किया जा सकता है.

सवाल. दोनों डोज लगवाने के बाद भी क्या कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन करना होगा?

जवाब. जी बिल्कुल. कोविड टीकाकरण की दोनों डोज लगवाने के बाद भी कोविड अनुरूप व्यवहार (Covid Appropriate Behaviour) का पालन करना जरूरी है. इससे हम संक्रमण के प्रति खुद की और अपने प्रियजनों की दोहरी सुरक्षा कर सकते हैं. यह संभव है कि कोविड वैक्सीन (Covid Vaccine) की दोनों डोज लेने के कारण वायरस (Virus) हमें तो प्रभावित नहीं करेगा, लेकिन हमारे जरिए यह किसी ऐसे व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकता है जिसकी इम्यूनिटी वैक्‍सीनेटेड व्‍यक्ति के बराबर मजबूत नहीं हैं या उसके शरीर में संक्रमण के प्रति लड़ने के लिए एंटीबॉडी ही नहीं है. ऐसे लोगों को संक्रमण के गंभीर जोखिम का खतरा रहता है, इसलिए वैक्सीन लेने के बाद भी मास्क (Mask) लगाकर रखें, निर्धारित दूरी का पालन करें और लगातार हाथ धोते रहें.

सवाल. अभी तक जिन लोगों ने कोविड वैक्सीन की एक भी डोज नहीं ली है उससे संक्रमण के जोखिम का खतरा कितना है?

जवाब. टीकाकरण (Vaccination) के शत प्रतिशत लक्ष्य तक पहुंचने से पहले सभी को कोविड का वैक्सीन लेना जरूरी है, जैसा कि मैने अभी बताया जिन लोगों ने कोविड वैक्सीन की अभी तक एक डोज भी नहीं ली है वह संक्रमण के लिए सुयोग्य पात्र हैं. वायरस ऐसे लोगों को संक्रमित कर आसानी से अपनी चेन बढ़ा सकता है, फिर संक्रमित लोगों से ऐसे लोगों को कोविड के गंभीर संक्रमण का खतरा हो सकता है जिन्हें पहले से ही कई तरह की बीमारियां जैसे डायबिटीज (Diabetes), थॉयरायड या फिर जेनेटिक रक्त संबंधी विकार हैं.

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