दिल्ली में बढ़ रहा कोविड मौतों का आंकड़ा, श्मशान घाटों पर ईंधन की किल्लत, दाह-संस्कार में हो सकेगा इनका प्रयोग

दिल्ली नगर निगम की ओर से ईंधन की कमी को पूरा करने का रास्ता भी निकाला जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

दिल्ली नगर निगम की ओर से ईंधन की कमी को पूरा करने का रास्ता भी निकाला जा रहा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Covid Deaths in Delhi: गोपराली के प्रयोग से पराली की समस्या को भी खत्म करने में मदद मिलेगी और प्रदूषण को भी इस से कम किया जा सकेगा. अब किसी को भी दाह-संस्कार या अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी और पेड़ों की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा.

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नई दिल्ली. दिल्ली में कोरोना (Corona) से लगातार में मौतों (Deaths) का आंकड़ा बढ़ रहा है. हर रोज बड़ी संख्या में लोगों की कोरोना से जान जा रही है. ऐसे में श्मशान घाटों (Cremation Ghats) पर प्लेटफार्म की संख्या में भी बढ़ोतरी की जा रही है. वहीं दिल्ली नगर निगम (MCD) की ओर से ईंधन की कमी को पूरा करने का रास्ता भी निकाला जा रहा है.

पूर्वी दिल्ली नगर निगम (East MCD) के बाद अब नॉर्थ दिल्ली नगर निगम ने भी अपने श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार में गोपराली को प्रयोग करने की अनुमति दी है. साथ ही फसलों की पराली को भी प्रयोग करने की अनुमति दे दी है.

बताते बताते चलें कि दिल्ली में कोरोना से अब तक 19,344 लोगों की जान जा चुकी है. वहीं, मृत्यु दर 1.46 फीसदी हो चुकी है. एक्टिव मामलों की संख्या भी 86,232 हो चुकी है.

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नॉर्थ दिल्ली के मेयर जय प्रकाश ने बताया कि श्मशान घाटों पर दाह-संस्कार के लिए ईंधन के रूप में लकड़ी की जगह फसलों के अवशेष (पराली) और गाय के गोबर से निर्मित ईंधन ब्लॉक (गोपराली) परियोजना की शुरुआत महादेव चौक, सेक्टर 26, रोहिणी स्थित श्मशान घाट से की.

मेयर जय प्रकाश ने कहा कि नॉर्थ दिल्ली नगर निगम ने श्मशान घाटों पर दाह संस्कार के लिए ईंधन के रूप में लकड़ी की जगह फसलों के अवशेष (पराली) और गाय के गोबर से निर्मित ईंधन ब्लॉक (गोपराली) का उपयोग किया जाएग. लगभग 300-400 किलो की गोपराली प्रतिदिन बनायी जाएगी और विभिन्न श्मशान घाटों में इसका प्रयोग किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि गैर सरकारी संगठन शिरडी साईं बाबा परिवार उत्तरी दिल्ली नगर निगम के साथ मिलकर गोपराली के ब्लॉक बना रही है. यह दिल्ली में उत्तरी दिल्ली नगर निगम द्वारा शुरू की गई अपनी तरह की एक नई पहल है.



इसके अलावा गैर सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे श्मशान घाटों को भी निकट भविष्य में लकड़ी के प्रयोग को कम करने और पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करने के लिए गोपराली बनाने वाली मशीन को स्थापित करने के लिए कहा जाएगा.

जय प्रकाश ने कहा है कि इस उद्देश्य के लिए ऐसे संयंत्र सार्वजनिक और निजी भागीदारी में संचालित अन्य श्मशान घाटों में स्थापित किए जाएंगे. गोपराली के प्रयोग से लकड़ी पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी.

उन्होंने कहा कि गोपराली के प्रयोग से पराली की समस्या को भी खत्म करने में मदद मिलेगी और प्रदूषण को भी इस से कम किया जा सकेगा. अब किसी को भी दाह-संस्कार या अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी और पेड़ों की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा.

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