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नवजातों को भी लगेगा कोरोना का टीका! जानें नियमित टीकाकरण में कब तक हो सकता है शामिल

नवजात बच्‍चों के लिए अभी तक कोरोना वैक्‍सीन का ट्रायल नहीं किया गया है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड के टीके को नियमित टीकाकरण में शामिल किया जा सकता है. (Image:shutterstock)

नवजात बच्‍चों के लिए अभी तक कोरोना वैक्‍सीन का ट्रायल नहीं किया गया है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड के टीके को नियमित टीकाकरण में शामिल किया जा सकता है. (Image:shutterstock)

Covid Vaccine for Infants: स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में नवजातों को भी कोविड का टीका लगने की पूरी संभावना है. बच्‍चों को जन्‍म के बाद से लगने वाले अन्‍य बीमारियों जैसे हैपेटाइटिस, टायफायड, खसरा, पोलियो आदि के टीकों की तरह इसे भी नियमित टीकाकरण में शामिल किए जाने की उम्‍मीद है.

  • News18Hindi
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    नई दिल्‍ली. देश में कोविड वैक्‍सीनेशन (Covid Vaccination) कुछ दिनों में ही सौ करोड़ खुराकों की सीमा को  को पार कर लेगा. हालांकि अभी तक भारत में सिर्फ 18 साल से ऊपर के लोगों को ही कोविड की वैक्‍सीन (Covid 19 Vaccine) दी जा रही है. वहीं 12 से 18 साल के किशोरों के लिए जायडस कैडिला की वैक्‍सीन को अनुमति दी जा चुकी है लेकिन 2 साल से 11 साल तक के बच्‍चों को लेकर अभी ट्रायल चल रहा है. ऐसे में जन्‍म के बाद से ही नियमित टीकाकरण की खुराक लेने वाले नवजातों (Infants) को लेकर भी उत्‍सुकता है कि आखिर उन्‍हें कोरोना का टीका कब मिलेगा.

    नवजातों को कोरोना का टीका दिए जाने को लेकर ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के पूर्व निदेशक डॉ. एम सी मिश्र कहते हैं कि फिलहाल नवजातों से लेकर 2 साल की उम्र तक के बच्‍चों के लिए कोविड का टीका नहीं है और न ही कोई कंपनी इस पर अभी ट्रायल कर रही है लेकिन पूरी संभावना है कि आने वाले समय में नवजातों को भी कोविड का टीका लगेगा और अन्‍य बीमारियों जैसे हैपेटाइटिस, टायफायड, खसरा, पोलियो आदि के टीकों की तरह इसे भी नियमित टीकाकरण में शामिल किया जाएगा.

    डॉ. मिश्र कहते हैं कि कोई भी वैक्‍सीन जब बनती है तो उसे सिर्फ तभी मंजूरी दी जाती है जबकि उसका उस आयुवर्ग पर ट्रायल सफल हो चुका हो. यही चीज कोविड में भी लागू होती है. भारत में ही नहीं पूरे विश्‍व में बुजुर्गों से लेकर व्‍यस्‍कों, गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं और फिर अब किशोरों को लेकर ट्रायल किए गए हैं. धीरे-धीरे सभी को वैक्‍सीन भी मिल रही है. जहां तक दो साल से कम उम्र के बच्‍चों और नवजातों की बात है तो उन तक ट्रायल के लिए पहुंचने में अभी कंपनियों को समय लग रहा है. ऐसे में जब तक ट्रायल नहीं होगा तब तक टीकाकरण भी नहीं होगा.

    नवजातों पर ट्रायल में इसलिए हो रही देरी

    वे कहते हैं कि कोविड जिस तरह की वायरस जनित बीमारी है, उसका प्रभाव ज्‍यादा उम्र के लोगों पर सर्वाधिक देखा गया है. लिहाजा वैक्‍सीन का परीक्षण उसी आयुवर्ग से शुरू हुआ. वहीं बच्‍चों की रोग प्रतिरोधक शक्ति के कारण यह गंभीर नहीं देखा गया है. इसके अलावा कोविड के प्रसार को देखते हुए लोगों को घर पर रहने की सलाह दी गई जबकि दो साल से कम उम्र के बच्‍चे अधिकांश रूप से घरों के अंदर ही रहते हैं और उन पर कोविड का हमला भी कम होता है.

    इसके अलावा गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं को वैक्‍सीन दिए जाने के बाद प्‍लेसेंटा या मां के दूध के माध्‍यम से कोविड के खिलाफ एंटीबॉडीज मिल रही हैं और उन्‍हें सुरक्षित माना जा रहा है. वहीं जो बड़ी बात है वह यह है नवजातों को वैक्‍सीन के ट्रायल में शामिल करने में भी लोग बमुश्किल आगे आएंगे. लिहाजा नवजातों के लिए वैक्‍सीन के परीक्षण को सबसे आखिर में रखा गया है.

    2023 तक नियमित टीकाकरण में शामिल होने की संभावना

    डॉ. मिश्र कहते हैं कि भले ही नवजातों के लिए कोविड टीके के परीक्षण को सबसे अंत में किया जाएगा लेकिन जिस गति से 2 साल से ऊपर के बच्‍चों तक के लिए ट्रायल हो चुके हैं और कई जगह चल रहे हैं तो उम्‍मीद है कि वैक्‍सीन निर्माता कंपनियां जल्‍दी ही इस आयुवर्ग के लिए भी कोरोना टीके का ट्रायल शुरू कर देंगी. अभी 2 साल से ऊपर के बच्‍चों पर चल रहे ट्रायल के बाद 2022 में इन बच्‍चों को वैक्‍सीन लगेगी. उम्‍मीद जताई जा रही है कि कम से कम 2023 तक कोविड वैक्‍सीन का नवजातों पर ट्रायल हो जाए और यह अन्‍य टीकों की तरह नियमित टीकाकरण में शामिल हो जाए.

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