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विदेशी सिपाही ‘वाकोस’ ने नक्सलियों की नाक में किया दम, अब तक 200 हमले किए नाकाम

फोटो क्रेडिट- सीआरपीएफ.

फोटो क्रेडिट- सीआरपीएफ.

बंग्लूरू में सीआरपीएफ के सेंटर में वाकोस को ट्रेनिंग दी जाती है. सीआरपीएफ का सिपाही वाकोस मूल रूप से बेल्जियम का है.

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छत्तीसगढ़ का सुकमा, बीजापुर हो या महाराष्ट्र का गढ़चिरौली, सभी जगह नक्सली परेशान हो चले हैं. एक के बाद एक उनके आईईडी हमले नाकाम हो रहे हैं. उनकी परेशानी की वजह है विदेशी सिपाही वाकोस. वाकोस केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के साथ रहकर नक्सलियों के हमलों को नाकाम कर रहा है.

सीआरपीएफ के पीआरओ गिरीश चन्द्र दास ने बताया,वाकोस अब तक 200 से अधिक बड़े हमलों को नाकाम कर चुका है. बेंगलुरु में सीआरपीएफ के सेंटर में वाकोस को ट्रेनिंग दी जाती है. सीआरपीएफ का सिपाही वाकोस मूल रूप से बेल्जियम का है. जिसके चलते इसे बेल्जियन शेपर्ड कहा जाता है. लेकिन सीआरपीएफ में इसे वाकोस के अलावा वाला, वालीसा, क्रेस्ट ड्रोन आदि नाम से भी बुलाया जाता है.

358 बेल्जियन शेपर्ड देशभर में सीआरपीएफ के साथ काम कर रहे हैं. वहीं 253 डॉग ब्रीडिंग एवं ट्रेनिंग सेंटर, तरालू, बेंगलुरु में ट्रेनिंग ले रहे हैं. यहां इन्हें 10 महीने की कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है. जिसके बाद ये सीआरपीएफ जवानों के साथ सड़क से लेकर जंगल तक में पेट्रालिंग करते हैं, आईईडी का पता लगाते हैं, किसी बिल्डिंग में छिपे दुश्मनों का भी पता लगता है. साथ ही दुश्मन पर हमला आदि भी करते हैं.”

अपने हैंडलर के साथ वाकोस. फोटो क्रेडिट- सीआरपीएफ.


जानकारों के अनुसार एक बेल्जियन शेपर्ड की उम्र 10 से 14 वर्ष तक होती है. मेल शेपर्ड की हाइट 60 से 66 और फीमेल की 56 से 61 सेमी तक होती है. वहीं वजन के मामले में मेल शेपर्ड 25 से 30 और फीमेल 20 से 25 किलो की होती है. बेल्जियन शेपर्ड की काबिलियत को देखते हुए एसएसबी और कर्नाटक पुलिस भी इन्हें अपनी टीम में शामिल कर रही है. इस दौड़ में राजस्थान पुलिस भी शामिल है. पीआरओ दास ने बताया कि एसएसबी के 5 और कर्नाटक पुलिस के पप्स तरालू में ट्रेनिंग ले रहे हैं.

हैंडलर के साथ आईईडी और नक्सलियों को तलाशता वाकोस. फोटो क्रेडिट- सीआरपीएफ.


बेल्जियन शेपर्ड के बारे में कुछ और रोचक फैक्ट

ये अमेरिकी सेना में भी शामिल हैं.

लादेन को मारने वाली टीम में भी ये शामिल था.

एक बार में 25 से 30 किलोमीटर तक चल सकता है.

इस पोजिशन में भी वाकोस 270 डिग्री पर बिना गर्दन घुमाए देख सकता है. फोटो क्रेडिट सीआरपीएफ.


जर्मन शेफर्ड, लेब्राडोर, स्नाइपर डॉग लगातार 10 से 12 किमी तक चलते हैं.

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दूसरे टोही डॉग के मुकाबले इनकी सूंघने की क्षमता ज्यादा होती है.

एक डॉग की कीमत 75 हजार से 1 लाख रुपये तक होती है.

देश में पहली बार सीआरपीएफ और आईटीबीपी ने 2011 में खरीदा था.

2014 में एनएसजी ने भी इसे अपनी टीम में शामिल किया.

हवा और पानी दोनों में काम कर सकता है.

भौंकने के बजाय सिर से देता है विस्फोटकों के बारे में इशारा.

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इसकी आंखें बिना सिर हिलाए 270 डिग्री तक देख सकती हैं.

इसका सिर बड़ा और नाक चौड़ी होती है.

व्हाइट हाउस की सुरक्षा में भी तैनात है.

व्हाइट हाउस में घुसे संदिग्ध को पकड़वाया था.

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