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Ghaziabad News: साइबर क्रिमिनल्‍स के निशाने पर पेंशनर, नई तरकीब से कर रहे ठगी, रहें सावधान!

चीफ ट्रेजरी आफीसर लक्ष्‍मी मिश्रा ने पेंशनर्स से की अपील.

चीफ ट्रेजरी आफीसर लक्ष्‍मी मिश्रा ने पेंशनर्स से की अपील.

Cyber Criminals आजकल Pensioners को ठगने के लिए सोशल इंजीनियरिंग का सहारा ले रहे हैं. ट्रू कॉलर में नंबर ट्रेजरी या पेंशन आफिस के नाम से सेव करते हैं और पेंशनर्स भरोसा कर सारी जानकारी दे देते हैं और ठगी के शिकार हो जाते हैं.

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गाजियाबाद. आजकल साइबर क्रिमिनल्‍स (cyber criminals) सोशल इंजीनियरिंग के माध्‍यम से पेंशनर्स (pensioners) को ठग रहे हैं. पेंशनर्स इनके बहकावे में आ जाते हैं और अपनी सारी डिटेल्‍स बता देते हैं. इसके बाद ये क्रिमिनल्‍स आसानी से अकाउंट खाली कर देते हैं. इस तरह के तमाम मामले ट्रेजरी विभाग (Treasury Department) और साइबर एक्‍सपर्ट के पास पहुंच रहे हैं. थोड़ी सावधानी बरतते हुए ठगी से बचा जा सकता है.

पेंशन लेने वाले 60 वर्ष की उम्र पार चुके होते हैं. इस वजह से कोरोना के चलते वे घरों से बाहर कम निकलना चाह रहे हैं. ज्‍यादातर काम ऑनलाइन ही कर रहे हैं. इसी का फायदा साइबर क्रिमिनल्‍स उठा रहे हैं और पेंशनर्स को आसानी से ठग रहे हैं. गाजियाबाद की चीफ ट्रेजरी ऑफीसर लक्ष्‍मी मिश्रा बताती हैं कि उनके पास कई पेंशनर्स ने शिकायत की है कि फोन कर उन्हें ट्रेजरी ऑफिस का कर्मचारी बता कर उनसे बैंक डिटेल, ओटीपी और अन्‍य पर्सनल जानकारी बताने को कह रहे हैं. शिकायत में यह कहा गया है कि जिस नंबर से फोन आता है, ट्रू कॉलर में नंबर ट्रेजरी आफिस का आता है. इस वजह से पेंशनर्स आसानी से इनके चंगुल फंस जाते हैं.

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लक्ष्मी मिश्रा ने पेंशनर से अपील की है कि वह फोन पर अपनी बैंक संबंधी जानकारी, मोबाइल पर आए ओटीपी या अन्‍य जानकारी किसी के साथ शेयर न करें. उन्होंने कहा कि किसी भी पेंशनर से विभाग द्वारा कोई जानकारी जैसे पैन नंबर, आधार नंबर आदि नहीं मांगी जा रही है. अगर किसी को पेंशन संबंधी कोई दिक्कत है तो वो ट्रेजरी आफिस में आकर संपर्क कर सकते हैं, लेकिन फोन पर किसी को जानकारी शेयर न करें.

सोशल इंजीनियरिंग स्‍कैम
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और सार्वजनिक नीति थिंक टैंक इंडिया फ्यूचर फाउंडेशन के संस्थापक कनिष्‍क गौड़ बताते हैं कि इस तरह के साइबर क्राइम को सोशल इंजनियरिंग क्राइम कहते हैं. इसमें क्रिमिनल्‍स अपना नंबर किसी भी नाम से सेव कर सकते हैं. पुलिस, ट्रेजरी या इंश्‍योरेंस ऑफिस आदि, जिस नाम से नंबर सेव होता है, लोगों के पास ट्रू कॉलर में उसी नाम से दिखता है. इस वजह से बुजुर्ग आसानी से झांसे में आ जाते हैं और सारी डिटेल बता देते हैं. इससे बचने के लिए किसी को भी अपना ओटीपी या बैंक डिटेल्स न बताएं. क्रिमिनल्‍स कई पॉलिसी रिन्‍यूवल की बात कहकर ठग सकते हैं. उन्‍होंने बताया कि उनके पास इस तरह के कई मामले आ चुके हैं.

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