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Lockdown: दिहाड़ी मजदूरों ने कहा- Coronavirus से पहले हम लोग भूख से मर जाएंगे
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Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: March 26, 2020, 3:41 PM IST
Lockdown: दिहाड़ी मजदूरों ने कहा- Coronavirus से पहले हम लोग भूख से मर जाएंगे
लॉकडाउन की वजह से दिहाड़ी मजदूर पैदल ही घर की तरफ निकल पड़े हैं.

दिहाड़ी मजदूरों का कहना है, 'हमारे जेब में जो पैसे थे वह अब खत्म हो गए हैं. लॉकडाउन की वजह से कोई गाड़ी भी नहीं चल रही है. चाहे 2 दिन लगे चाहे 2 हफ्ते. रास्ते मे रात में कहीं रुक जाएंगे फिर सुबह चल पड़ेंगे. लेकिन, यहां नहीं रह सकते. मालिक फैक्ट्री आता नहीं है तो पैसे किससे मांगें.'

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  • Last Updated: March 26, 2020, 3:41 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Covid-19) को लेकर देशभर में हाहाकार मचा हुआ है. लोगों में खौफ इतना है कि लोग आने-जाने का संसाधन नहीं होने के बावजूद पैदल ही घर की तरफ निकल पड़े हैं. पूरे देश दिहाड़ी मजदूरों (Daily Wagers) में इस बात की बेचैनी है कि अगले एक-दो महीने तक उन्हें रोटी का निवाला कैसे मिलेगा. इसलिए औद्योगिक शहरों से उनका गांवों की ओर पलायन हो गया है. आप किसी भी हाइवे पर जाईए अपना सामान सिर और कंधे पर लिए भूखे-प्यासे श्रमिक घरों की ओर जाते मिल जाएंगे. उनका कहना है कि हम कोरोना वायरस के संक्रमण से पहले भूख से मर जाएंगे.

लॉकडाउन (Lockdown)  होने के कारण दिल्ली-एनसीआर की सारी फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं. फैक्ट्रियां में कामकाज बंद होने के कारण इन मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है. ये लोग दिल्ली बॉर्डर पार कर गाजियाबाद के रास्ते यूपी और बिहार के अलग-अलग जगहों पर जा रहे हैं. कुछ लोग दिल्ली आगरा यानी एनएच-2 के रास्ते अपने घर जा रहे हैं. इनमें से ज्यादातर लोग पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ-साथ लखनऊ, बदायूं, बरेली, मुरादाबाद और अलीगढ़ के रहने वाले हैं.

फाइल पास होने का इंतजार 

दिल्ली के श्रम मंत्री गोपाल राय के मीडिया कोर्डिनेटर ने न्यूज 18 हिंदी से कहा, 'लॉकडाउन के दौरान दिल्ली के दिहाड़ी मजदूरों को सरकार ने 5-5 हजार रुपये देने का ऐलान किया है. दिल्ली सरकार ने यह फाइल एलजी के पास भेजी है. जैसे ही एलजी ऑफिस से फाइल आती है मजदूरों के खातों में 5 हजार रुपये पहुंच जाएंगे. दिल्ली लेबर वेलफेयर बोर्ड के तहत सभी पंजीकृत मजदूरों को यह सहायता राशि मुहैया कराई जाएगी.'



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इन दिहाड़ी मजदूरों का कहना है कि हमारे जेब में जो पैसे थे वह अब खत्म हो गए हैं.


जब न्यूज 18 हिंदी ने सवाल किया कि जो मजदूर लेबर वेलफेयर बोर्ड के तहत पंजीकृत नहीं हैं उनके लिए दिल्ली सरकार ने किस तरह का प्लान तैयार किया है. उनके खाने-पीने और रहने के लिए श्रम मंत्रालय क्या कर रहा है? इस पर मीडिया कोर्डिनेटर ने कहा, 'फिलहाल दिल्ली के सभी जिलों के एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वह खाने का पैकेट बांटे. आज से उन मजदूरों को खाने का पैकेट मिलना शुरू हो जाएगा. जहां तक बात है भूख से पलायन कर रहे मजदूरों और दिहाड़ी मजदूरों को चिन्हित करने का तो उस बारे में काम नहीं शुरू हुआ है. हम लोग जल्द ही इस पर काम शुरू करेंगे. इस बारे में अगर मीडिया को भी कोई जानकारी मिलती है तो वह हमसे साझा कर सकते हैं.'

दिहाड़ी मजदूरों के पैसे हुए खत्म
इन दिहाड़ी मजदूरों का कहना है, 'हमारे जेब में जो पैसे थे वह अब खत्म हो गए हैं. लॉकडाउन की वजह से कोई गाड़ी भी नहीं चल रही है. कोरोना से पहले हम लोग भूख से मर जाएंगे. चाहे 2 दिन लगे चाहे 2 हफ्ते. रात में कहीं रुक जाएंगे फिर सुबह चल पड़ेंगे. लेकिन, यहां नहीं रह सकते. मालिक फैक्ट्री आता नहीं है तो पैसे किससे मांगें.'

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दिल्ली में काम करने वाले कई दिहाड़ी मजदूर उत्तर प्रदेश के अलग अलग जिलों में अपने घरों के लिए दिल्ली-गाजीपुर सीमा से पैदल ही निकल पड़े हैं.


वहीं दिल्ली पुलिस का कहना है कि लॉकडाउन की स्थिति में ये मजदूर झुंंड बना कर चल रहे हैं. इससे कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा और बढ़ रहा है. इसलिए हम लोग अब इन लोगों को रैन बसेरों तक या शेल्टर होम में छोड़ कर आ जाते हैं, लेकिन ये लोग रैन बसेरा में खाना कर फिर से अपने-अपने घर की तरफ निकल जाते हैं.'

यूपी पुलिस करेगी मदद
यूपी पुलिस के कार्यवाहक डीजीपी एचसी अवस्थी ने न्यूज 18 से बातचीत में बताया, 'अन्य राज्यों से पलायन कर यूपी में पकड़े गए लोगों को घर पहुंचाने या उसी शहर में रुकने की व्यवस्था जिला प्रशासन करा रहा है. जिस राज्य से कामगार आ रहे हैं उस राज्य से संपर्क किया जा रहा है. उन्होंने संबंधित राज्यों की सरकारों से यह अपील भी की है कि यूपी के कामगारों को उनके काम करने के स्थान पर ही रोककर खाने पीने की व्यवस्था की जाए.इसके साथ ही यूपी पुलिस की इमरजेंसी सेवा 112 लगातार लोगों की मदद कर रही है. अगर आप कहीं भी फंसे हैं या इमरजेंसी की स्थिति है तो बेहिचक यूपी112 डायल करें. कुछ ही मिनटों में पीआरवी आपकी मदद के लिए पहुंचेगी.'

21 दिनों का है लॉकडाउन
बता दें कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 दिनों के लिए देशबंदी की घोषणा की है. लोगों को घरों के अंदर रहने के लिए कहा गया है. कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते शहर में मजदूरों के सम्मुख रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है. कई दिन से मजदूर को काम नहीं मिल पाया है. दिहाड़ी मजदूरी करने वालों के पास कोई विकल्प नहीं हैं. मंगलवार को हुई घोषणा का सबसे ज्यादा प्रभाव इन्हीं लोगों पर पड़ा है. इन लोगों को समझ नहीं आ रहा है कि वह इससे कैसे निपटें.

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First published: March 26, 2020, 3:19 PM IST
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