दिल्‍ली: परिजन करा रहे थे बच्‍ची का बाल विवाह, रिश्‍तेदार ने कर दी शिकायत

दिल्ली महिला आयोग में फैला कोरोना _ प्रतीकात्मक फोटो
दिल्ली महिला आयोग में फैला कोरोना _ प्रतीकात्मक फोटो

बाल विवाह (Child Marriage) मामले में परिजनों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज होने के बाद बच्‍ची की मेडिकल जांच करवाई गई और शेल्‍टर होम में भेज दिया. जल्‍द ही इसे बाल कल्‍याण समिति के सामने पेश किया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 8:06 PM IST
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नई दिल्‍ली. देश की राजधानी में एक बार फिर बाल विवाह (Child marriage) मामला सामने आया है.  हालांकि रिश्‍तेदार ने इसकी  शिकायत दिल्‍ली महिला आयोग (Delhi commission for women) हेल्‍पलाइन पर कर दी. जिससे मौके पर पहुंचकर आयोग की अध्‍यक्ष और सदस्‍य ने शादी को रुकवा दिया. इतना ही नहीं परिजनों के खिलाफ पुलिस ने मामला भी दर्ज कर लिया.

जानकारी के मुताबिक आयोग की हेल्‍पलाइन 181 पर किसी अनजान शख्‍स का फोन आया. जिसमें उसने कहा कि जामिया इलाके में एक 13 साल की बच्‍ची की जबरन शादी कराई जा रही है. उसने बताया कि 10 अक्‍तूबर को उसकी शादी है और सोमवार को बच्‍ची के विवाह की हल्‍दी की रस्‍म है. यह जानकारी मिलने पर आयोग की अध्‍यक्ष स्‍वाति मालीवाल (Swati Maliwal) और सदस्‍य किरण नेगी शादी वाले घर में पहुंच गईं जहां हल्‍दी की रस्‍म के लिए तैयारियां चल रही थीं और सभी रिश्‍तेदार भी मौजूद थे.

शादी के घर में अचानक आयोग के सदस्‍यों को देखकर बच्‍ची के परिजन घबरा गए और बोले कि लड़की बालिग है. जब लड़की के सर्टिफिकेट दिखाने और लड़की से मिलने की मांग की गई तो उन्‍होंने मना कर दिया. खोजबीन के बाद लड़की एक कमरे में बंद मिली. जिसे वहां से निकालकर पुलिस स्‍टेशन ले जाया गया. इस दौरान बच्‍ची ने कहा कि वह पढ़ना चाहती है लेकिन उसके माता पिता उसकी जबरन शादी करवा रहे हैं.




परिजनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद बच्‍ची की मेडिकल जांच करवाई गई और शेल्‍टर होम में भेज दिया. जल्‍द ही इसे बाल कल्‍याण समिति के सामने पेश किया जाएगा. इस बारे में आयोग की अध्यक्ष स्‍वाति मालीवाल ने कहा, ‘दिल्ली जैसे शहर में भी हम न जाने कितने बाल विवाह रुकवा चुके हैं. बचपन में ही छोटी छोटी बच्चियों को शादी के बंधन में बांध दिया जाता है. इस केस में हमारी टीम ने सतर्कता दिखाते हुए तुरन्त मामले में कार्यवाई करते हुए लड़की को छुड़वाया. बाल विवाह एक क़ानूनन जुर्म है और ऐसा करवाने वालों को सख़्त सज़ा होनी चाहिए.’
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