Lockdown से दुकानें बंद करने के एवज में व्‍यापारियों ने की मुआवजे की मांग, जानें वित्‍त मंत्री को पत्र में क्‍या लिखा?

कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने सरकार से मांग की.

कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने सरकार से मांग की.

कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने सरकार से मांग की है कि कोरोना (Corona) से बचाव के लिए लॉकडाउन (Lockdown) में दुकानें बंद करने के एवज में मुआवज़ा देना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 13, 2021, 5:31 PM IST
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नई दिल्‍ली.  कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT-कैट) ने  आज केंद्रीय वित्त मंत्री (Finance Minister) निर्मला सीतारमन और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजकर मांग की है कि कोरोना (Corona) महामारी से बचाव के लिए यदि कोई भी राज्य लॉकडाउन (Lockdown) की घोषणा करता है, जिसके कारण व्यापारियों (Traders) को अपनी दुकानें बंद करनी पड़ती हैं तो सरकार को उन सभी व्यापारियों को मुआवज़ा देने का प्रावधान करना चाहिए.

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि सरकार के आदेश पर किए गए लॉकडाउन के कारण बंद हुई दुकानों को सरकार से मुआवज़ा लेने का हक़ बनता है. कैट ने मुआवजे देने के फॉर्मूले को बताते हुए कहा कि जिस दुकान का वार्षिक टर्न ओवर है, उसके अनुपात में सरकार को ऐसे व्यापारियों को मुआवज़ा देना चाहिए. देश में प्रतिवर्ष  लगभग 80 लाख करोड़ रुपये का कारोबार होता है, जो प्रति माह लगभग 6 .5 लाख करोड़ का होता है. अकेले महाराष्ट्र का मासिक कारोबार लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तथा दिल्ली का मासिक कारोबार लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का होता है.

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कैट के अनुसार पिछले वर्ष के लॉकडाउन में व्यापारियों ने न केवल अपनी दुकानें ही बंद नहीं कि बल्कि प्रधानमंत्री के आह्वान पर कोरोना के  समय में भी पूरे देश में आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई को निर्बाध रूप से जारी रखा, हालांकि इस वजह से देश भर के व्यापारियों को नुक़सान उठाना पड़ा है .
कैट के अनुसार देश का व्यापारी वर्ग अब और अधिक वित्तीय बोझ उठाने की स्थिति में नहीं हैं, इस नाते से  लॉकडाउन  में केंद्र अथवा राज्य सरकारों को मुआवजा देने की घोषणा करनी चाहिए. इसके साथ ही केंद्र एवं राज्य सरकारों को लॉकडाउन की स्थिति में व्यापारियों पर लगे कर एवं अन्य कानूनों के अंतर्गत जीएसटी अथवा अन्य करों के भुगतान पर लगने वाली लेट फीस, ब्याज अथवा पेनाल्टी तथा रिटर्न भरने से  छूट भी देनी चाहिए.
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