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death registration numbers fell in thousands in up in corona pandemic year how is it possible

कोरोनाकाल में यूपी में मौत के आंकड़े कैसे घटे? 2019 में 9.44 लाख मौत तो 2020 में सिर्फ 8.73 लाख कैसे?

उत्तर प्रदेश में नॉन कोविड इयर की तुलना में कोविड इयर में कम मौतों का पंजीयन हुआ.

उत्तर प्रदेश में नॉन कोविड इयर की तुलना में कोविड इयर में कम मौतों का पंजीयन हुआ.

Explaining COVID-19 Deaths in Uttar Pradesh: एक साल पहले की तुलना में 2020 में कितनी मौतें दर्ज की गईं? इस मामले में जो आंकड़े सामने आए हैं, बता रहे हैं कि यूपी के अलावा केरल, तेलंगाना और उत्तराखंड भी ऐसे राज्य हैं, जहां कम नंबर दिखे. ऐसा कैसे संभव है? आंकड़ों और कारणों की पड़ताल करती रिपोर्ट देखें.

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नई दिल्ली/लखनऊ. साल 2020 में जब पूरे देश में मौतें दर्ज होने का आंकड़ा बढ़ रहा था, देश में सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में इसके उलट स्थिति थी. जबकि कोविड-19 के कारण मौतों की संख्या बढ़ रही थी, उस साल में यूपी में पिछले साल की तुलना में कम मौतें रजिस्टर हुईं. यह चौंकाने वाला डेटा सिविल रजिस्ट्रशेन सिस्टम यानी CRS ने जारी करते हुए बताया कि यूपी में 2019 में 9.44 लाख मौतों का रजिस्ट्रेशन हुआ था, जबकि 2020 में 8.73 लाख मौतों का रजिस्ट्रेशन हुआ.

एक साल पहले की तुलना में कोरोना संक्रमण वाले साल में यूपी में 71 हज़ार कम मौतें क्यों रजिस्टर हुईं? सबसे बड़ा सवाल यही है और बड़ा कारण है कि उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य है, जहां डेथ रजिस्ट्रेशन होता ही कम है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार 2019 की स्थिति के मुताबिक राज्य में 63 प्रतिशत मौतों का ही रजिस्ट्रेशन हो पाता है. इस मामले में देश का औसत 92 फीसदी रजिस्ट्रेशन तक पहुंच चुका है. इधर, दिल्ली, तेलंगाना व केरल जैसे राज्यों में कुल मौतों की 90 फीसदी से ज़्यादा रजिस्टर होती हैं.

यूपी में कुछ तो गड़बड़ है

अब सीआरएस का डेटा बताता है कि जन्म और मृत्यु के रजिस्टर होने की संख्या वास्तविक जन्म और मृत्यु के नंबरों से कम है. यह भी एक आंकड़ा है कि भारत में 2019 में 76.41 लाख मौतें दर्ज हुईं, तो 2020 में 81.16 लाख. यानी कोरोना संक्रमण वाले साल में करीब 5 लाख मौतें ज़्यादा दर्ज हुईं, जबकि यूपी में इसी अवधि के दौरान 70 हज़ार मौतें कम दर्ज हुईं!

CRS के बरक्स SRS क्या है?

वास्तविक आंकड़ों के लिए एक अलग सर्वे जैसा सिस्टम है, जिसे सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम कहते हैं. उदाहरण के तौर पर 2019 में, 76.41 लाख मौतें देश भर में दर्ज हुईं. चूंकि देश में 92 फीसदी मौतें ही दर्ज होती हैं, तो वास्तविक मौतों की संख्या 83.01 लाख होने का अनुमान लगा. अभी 2020 के लिए एसआरएस ने यह अनुमान नहीं दिया है.

63 फीसदी मौतें ही दर्ज हुईं

इसी तर्ज़ पर नंबर देखें जाएं, तो यूपी में 2019 में अनुमानित तौर पर कुल मौतें 14.9 लाख हुईं, जिनमें से 63 फीसदी ही दर्ज हुईं यानी 9.44 लाख. अभी 2020 की वास्तविक मौतों का आंकड़ा नहीं है. हालांकि आधिकारिक नंबरों के अनुसार उत्तर प्रदेश में उस साल कोविड से 8364 मौतें हुई थीं. दिल्ली व अन्य राज्यों के चौंकाते आंकड़ों को भी समझना चाहिए.

और राज्यों से कैसे मिले चौंकाने वाले आंकड़े?

  • दिल्ली में 2020 में कोविड से 10,536 मौतें दर्ज हुईं
  • दिल्ली में 2020 में कुल मौतों की संख्या 2019 के मुकाबले 2495 कम रजिस्टर हुई
  • यानी कोविड के अलावा होने वाली मौतों में 13000 की कमी
  • तेलंगाना में 2019 के मुकाबले 2020 में 25000 मौतें कम दर्ज हुईं
  • केरल में इसी तरह 19584 मौतें कम दर्ज हुईं

ऐसा कैसे हो सकता है?

दिल्ली ऐसा राज्य है, जहां तकरीबन 100 फीसदी मौतें दर्ज होती हैं, तब ऐसे आंकड़े कैसे समझे जाएं? एक कारण समझा जा सकता है कि उस साल लॉकडाउन और अन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध थे, इसलिए सड़क दुर्घटना, औद्योगिक हादसे जैसी स्थितियों में होने वाली मौतों की संख्या घटी होगी, फिर भी इतना बड़ा अंतर फ़िलहाल एक गुत्थी ही लग रहा है.

Tags: Corona Death Rate, Covid deaths, UP news

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