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अलका लांबा का CM केजरीवाल पर 'प्रहार', कहा- कोरोना मामलों के आंकड़ों को छिपा रही सरकार

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)

कांग्रेस की नेता अलका लांबा ने कहा कि दिल्ली में प्रति दस लाख की संख्या पर 10 हजार टेस्ट प्रतिदिन की जरुरत है, लेकिन नवंबर महीने में प्रतिदिन 2,700 टेस्ट ही किए जा रहे हैं, और पिछले दो महीने से की जाने वाली टेस्टिंग संख्या एक समान ही है, वर्तमान कोरोना आपातकाल में 83 प्रतिशत टेस्टिंग कम की जा रही है

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 29, 2020, 10:25 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली कांग्रेस ने कोरोना वायरस संक्रमण (Corona Virus) से निपटने में अरविंद केजरीवाल सरकार (Arvind Kejriwal Government) की नाकामी पर निशाना साधा है. पूर्व विधायक अलका लांबा (Alka Lamba) ने रविवार को कहा कि दिल्ली सरकार कोविड-19 (Covid-19) मामलों के वास्तविक आंकड़ों को कम दिखाने के छल कपट का सहारा ले रही है. उन्होंने कहा कि प्रति दस लाख की संख्या पर 10 हजार टेस्ट प्रतिदिन की जरुरत है, जबकि नवंबर महीने में प्रतिदिन 2,700 टेस्ट ही किए जा रहे हैं, और पिछले दो महीने से की जाने वाली टेस्टिंग संख्या एक समान ही है, वर्तमान कोरोना आपातकाल में 83 प्रतिशत टेस्टिंग कम की जा रही है.

कांग्रेस कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अलका लांबा ने कहा कि पीसीसी अध्यक्ष अनिल कुमार ने बीते 11 मई को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी लिखकर एक लाख टेस्ट प्रतिदिन कराने की मांग की थी. साथ ही सर्वदलीय बैठक में नई परिस्थितियों को देखते हुए दो लाख टेस्ट प्रतिदिन करवाने की मांग की थी जिसको 15 नवंबर, 2020 को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी स्वीकार किया कि प्रतिदिन टेस्टों की संख्या बढ़नी चाहिए. उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण पाने में दिल्ली सरकार पूरी तरह नाकाम साबित हुई है. उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस पार्टी ने मुफ्त टेस्टिंग की मांग की थी, यदि दिल्ली सरकार उसे लागू करे तो लक्षणों और गैर-लक्षणों वाले सभी मरीज कोविड टेस्ट करा सकते हैं.


अलका लांबा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरू से ही आरटी-पीसीआर टेस्टों की मांग करती आ रही है, जबकि एक से 24 नवंबर के बीच कुल टेस्टों में 67 प्रतिशत टेस्ट रेपिड एंटीजेन टेस्ट किए गए, और इसी दौरान 4.11 लाख आरटी-पीसीआर टेस्ट में 28.6 प्रतिशत पॉजिटिव संक्रमित पाए गए. उन्होंने कहा कि आरटी-पीसीआर टेस्ट अधिक किए जाने चाहिए, जबकि रैपिड एंटीजेन टेस्ट अधिक करने पर भी ज्यादा मामले पकड़ में नहीं आते. उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सितंबर माह में दिल्ली सरकार की नाकामियों को उजागर करते हुए कहा था कि आरटी-पीसीआर टेस्टों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि 14 नवंबर से दो नवंबर तक आंकड़ों के अनुसार आरटी-पीसीआर टेस्ट प्रतिदिन लगभग 40 प्रतिशत तक ही किए गए जबकि रेपिड एंटीजेन टेस्ट 60 प्रतिशत से भी अधिक किए गए. उन्होंने कहा कि दिल्ली में हो रहे आरटी-पीसीआर टेस्ट के परिणाम देर से आने के कारण संक्रमण अधिक फैल रहा है.



'अमित शाह-केजरीवाल दोनों ने कोरोना टेस्टिंग पर झूठ बोला'

उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दोनों ने टेस्टिंग बढ़ाने पर झूठ बोला जबकि दोनों की घोषणाओं के बावजूद भी जरुरत के हिसाब से टेस्ट नहीं किए जा रहे हैं, और एक सप्ताह के बाद तक भी 10 प्रतिशत टेस्टों की संख्या नहीं बढ़ी. टेस्टों की संख्या दोगना-तिगुना करने की घोषणा केवल जुमला साबित हुई है.

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दिल्ली में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों पर पिछले हफ्ते केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ आपात बैठक की थी (फोटो साभार: PTI)


अलका लांबा ने कहा कि दिल्ली सरकार द्वारा घर-घर जाकर सर्वे करने का काम बुधवार तक पूरा किया जाना था जिसे व्यवस्थाओं और सरकार की नाकामियों के कारण अब आगे बढ़ाया गया है. उन्होंने कहा कि बुधवार तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 14 प्रतिशत मरीज, जो कोविड-19 लक्षण वाले पाए गए उन्होंने टेस्ट ही नहीं कराया. उन्होंने कहा कि बुधवार तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 57 लाख लोग के सर्वे में 13,516 मरीज लक्षणों वाले मिले, जिनमें से केवल 11,790 ने ही अपना कोरोना टेस्ट करवाया. लांबा ने कहा कि सर्वे कर रहे शिक्षकों के कोविड-19 संक्रमित होने की शिकायतें सामने आ रही है और 50 निगम शिक्षकों टेस्ट हुए जिनमें 17 शिक्षक पॉजिटिव पाए गए. उन्होंने सर्वे की प्रक्रिया में खानापूर्ति का आरोप भी लगाया.
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