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दिल्ली की सत्ता में क्या लौट पाएंगे कांग्रेस के 'लवली' डेज़?

News18Hindi
Updated: January 8, 2020, 2:52 PM IST
दिल्ली की सत्ता में क्या लौट पाएंगे कांग्रेस के 'लवली' डेज़?
अरविंदर सिंह लवली दिल्ली के कम उम्र के विधायक रहे हैं.

दिल्ली में शीला सरकार (Sheila Dexit) में अरविंदर सिंह लवली ने कई महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले और अपने फैसलों से ख़ास पहचान बनाई. लेकिन इस चुनाव में वो कोई करिश्मा कर सकेंगे.

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  • Last Updated: January 8, 2020, 2:52 PM IST
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अरविंदर सिंह लवली का नाम दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के उन नेताओं में शुमार है जिन्होंने दिल्ली में कांग्रेस की सरकार को 15 साल तक सत्ता में मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई. लवली साल 1998 में दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने वाले सबसे कम उम्र के नेता हैं और वो 2003, 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में लगातार विजयी होते रहे हैं. इतना ही नहीं वो प्रदेश की सरकार में शिक्षा, शहरी विकास और परिवहन जैसा अहम मंत्रालय संभाल चुके हैं. लेकिन साल 2019 में वो लोकसभा चुनाव में पार्टी की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके और उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

छात्र राजनीति से बनाई पहचान

अरविंदर सिंह लवली छात्र जीवन से ही राजनीति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहे हैं. साल 1990 में वो दिल्ली प्रदेश यूथ कांग्रेस के जनरल सेक्रेट्री रहे. साल 1992 से 1996 तक वो एनएसयूआई के जनरल सेक्रेट्री पद पर पार्टी के लिए काम करते रहे. दिल्ली के खालसा कॉलेज से पढ़ाई करने वाले लवली का जन्म साल 1968 में हुआ. खालसा कॉलेज का छात्र संघ चुनाव में जीतने के बाद उनकी रूचि राजनीति में बढ़ती गई और वो बी आर आंबेडकर कॉलेज में चेयरमैन पद पर काबिज हुए.

सबसे कम उम्र में विधायक बनने का रिकॉर्ड

1998 में पूर्वी दिल्ली से विधानसभा चुनाव जीतकर लवली ने कम उम्र में ही राजनीति में धमाकेदार  एन्ट्री की. पूर्वी दिल्ली के गांधी नगर इलाके को विकसित करने और आधारभूत संरचना को मजबूत करने में लवली की भूमिका को कोई भुलाए नहीं भूल सकता है. इलाके में 4 महत्वपूर्ण फ्लाई ओवर, मैट्रो का लंबा नेटवर्क और सिग्नेचर टॉवर के लिए पैसे के आवंटन में लवली की भूमिका को विपक्षी दल भी सराहते हैं.

अरविंदर सिंह लवली की लोकप्रियता को देखते हुए कांग्रेस ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में ईस्ट दिल्ली से मैदान में उतारा था लेकिन पीएम मोदी की आंधी में उनकी लोकप्रियता उन्हें लोकसभा तक नहीं पहुंचा पाई और किक्रेटर गौतम गंभीर से मुकाबले में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

अरविंदर सिंह ‘लवली’ 45 साल की उम्र में साल 2013 में दिल्ली प्रदेश का अध्यक्ष पद भी संभाल चुके हैं. पूर्व मुख्मंत्री शीला दिक्षित के निधन के बाद कई खेमों में बंट चुकी कांग्रेस को पूर्णकालिक अध्यक्ष की दरकार है और वैसी स्थिती में अरविंदर सिंह लवली की भी हैसियत इस काबिल है कि वो पार्टी को पुर्नस्थापित करने में अहम भूमिका अदा कर सकते हैं.शिक्षा मंत्री के तौर पर लवली प्वाइंट सिस्टम इंट्रोड्यूस करने वाले मंत्री हैं जो एडमिशन में कई प्रकार की धांधली को रोक पाने में और इस पूरी प्रक्रिया को काफी हद तक पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं. इकॉनिमिक वीकर सेक्शन और लाडली स्कीम जैसी योजना को लागू करने से लेकर स्कूल ड्रॉप आउट में भारी कमी के लिए अरविंदर सिंह लवली को आज भी सराहा जाता है.

इतना ही नहीं परिवहन मंत्री के तौर पर अरविंदर सिंह लवली ने किलर बस के नाम से कुख्यात हो चुकी ब्लू लाइन को लो फ्लोर बस से रिप्लेस करने में बड़ी भूमिका निभाई. ये काम बेहद चुनौतीपूर्ण था लेकिन अरविंदर सिंह लवली ने महज छह महीने में दिल्ली की सड़कों पर लो-फ्लोर बसों की झड़ी लगा दी और किलर ब्लू लाइन बसों को दिल्ली की सड़कों से हटा दिया. लवली ने 14 न्यू बस डिपो और चार बस टर्मिनल बनाकर दिल्ली वासियों के लिए बेहद महत्तपूर्ण काम किया. वहीं बजट रेडियो टैक्सी और सभी ट्रांसपोर्ट अथॉरिटीज़ की इंटर लिंकिंग भी लवली की देन है.

शहरी विकास और रेवेन्यू मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल चुके अरविंदर सिंह लवली 1000 कॉलोनी को रेगुलराइज कर चुके हैं वहीं डेवलपमेंट ऑफ अरबन विलेज स्कीम के तहत 145 गांव की दशा और दिशा सुधार चुके हैं. इतना ही नहीं दिल्ली में कई एलिवेटेड रोड को बनवा कर आधारभूत संरचना में भी उन्होंने अहम योगदान दिया है. विकास को लेकर उनके कामों की वजह से वो कम उम्र में ही दिल्ली के दिग्गज नेताओं में शुमार करने लगे.

इसके बावजूद पार्टी के भीतर लवली को एक वो भी दौर देखना पड़ा जब उन्हें पार्टी छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा. साल 2017 में वो कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए लेकिन एक साल के भीतर ही वो वापस कांग्रेस में आ गए. साल 2020 के विधानसभा चुनाव में लवली के कद्दावर सिख नेता की अहमियत की पार्टी अनदेखी नहीं कर सकती है. अपने बेबाक अंदाज़ और साफगोई की वजह से लवली दूसरे समुदायों में भी उतने ही लोकप्रिय हैं. ऐसे में इस चुनाव में लवली कांग्रेस के प्रमुख चेहरे के तौर पर बड़ी भूमिका फिर से निभा सकते हैं. पार्टी उन्हें प्रमुख चेहरे के तौर पर चुनाव में जरूर पेश करना चाहेगी क्योंकि सरकार से लेकर संगठन तक लवली का योगदान महत्तवपूर्ण रहा है.

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First published: January 8, 2020, 2:52 PM IST
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