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क्या दिल्ली में केजरीवाल की राजनीतिक चतुराई नहीं भांप पा रहीं विपक्षी पार्टियां?

केजरीवाल ने ये बातें लाल किले में वाल्मीकि जयंती समारोह में कही.

केजरीवाल ने ये बातें लाल किले में वाल्मीकि जयंती समारोह में कही.

मोदी फैक्टर (Modi Factor) से चमत्कार के उम्मीद में बीजेपी (BJP) भी आक्रामक नहीं दिख रही जबकि कांग्रेस (CONGRESS) की हालत बिना कप्तान वाली टीम जैसी हो गई है

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नई दिल्ली. पिछले एक-दो महीने से देखा जा रहा है कि दिल्ली (Delhi) के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) आम जनता से सीधे संपर्क साध रहे हैं. इसकी वजह अगले साल दिल्ली में होने वाला विधानसभा चुनाव (Assembly Elections 2020) है. केजरीवाल ने इस चुनाव को अभी से गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है. लोकसभा चुनाव 2019 में करारी हार के बाद अरविंद केजरीवाल अपने राजनीतिक कौशल से एक के बाद एक लोकलुभावन फैसले ले रहे हैं. विपक्षी पार्टियां ज्यादातर फैसलों का विरोध कर पाने की स्थिति में नहीं हैं. क्योंकि उनको लगता है कि विरोध से जनता कहीं नाराज न हो जाए. अरविंद केजरीलाल अपने मतदाताओं को टारगेट कर रहे हैं. केजरीवाल के समर्थकों को पूरा यकीन है कि इन फैसलों का फायदा उन्हें ही मिलेगा.

केजरीवाल ने अपनी पार्टी कार्यकर्ताओं को भी एक्टिव कर रखा है. पार्टी वर्कर जनसंवाद जैसे कार्यक्रमों के जरिए दिल्ली के लोगों से लगातार मिल रहे हैं. खुद केजरीवाल डेंगू जागरूकता अभियान के तहत हर रविवार को दिल्ली के किसी एक इलाके में जा कर लोगों में जागरूकता लाने के बहाने अपनी पहुंच बना रहे हैं. दिल्ली में शहीद हुए सरकारी कर्मचारियों के मुआवजे की राशि में बढ़ोतरी का मामला हो या फिर महिलाओं को डीटीसी में फ्री पास देने का या फिर बिजली-पानी के बिल में रियायत हो, केजरीवाल का आम जनता में पैठ बनाने का मेगा प्लान तैयार है और वो उसी पर काम कर रहे हैं.

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बीजेपी को छोड़ अन्य विपक्षी दलों की स्थिति दिल्ली को लेकर साफ नहीं है (File Photo)


'बीजेपी को छोड़ विपक्षी दलों की स्थिति दिल्ली को लेकर साफ नहीं'

दिल्ली को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार संजीव पांडेय कहते हैं, 'बीजेपी को छोड़ विपक्षी दलों की स्थिति दिल्ली को लेकर साफ नहीं है. बीजेपी को लगता है कि मोदी चमत्कार के दम पर वो दिल्ली की सत्ता केजरीवाल से छीन लेगी. इसी आस में बीजेपी के कुछ नेता टकटकी लगाए हुए हैं और चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे हैं. दूसरी तरफ कांग्रेस दिल्ली में बिना कप्तान के कोई फैसला ले नहीं पा रही. पार्टी के जितने बड़े नेता हैं वो पिछले कुछ दिनों से अध्यक्ष बनने, बनाने और बिगाड़ने के खेल में लगे हैं. कांग्रेसी नेता विपक्षी पार्टी की भूमिका निभाना भूल गए हैं.'

पांडेय आगे कहते हैं, 'दिल्ली में विधानसभा चुनाव की तैयारी को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता पिछले दो माह से लोगों से संपर्क साध रहे हैं. भले ही यह संपर्क अभियान दिल्ली सरकार के कुछ स्कीम को लेकर हो या फिर लोगों में जागरूकता के नाम पर हो. अरविंद केजरीवाल ने अपना चुनावी अभियान दिल्ली में बड़ी चतुराई से शुरू कर दिया है.'

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केजरीवाल लोगों के बीच जा-जा कर उनके साथ संवाद स्थापित कर रहे हैं. (File Photo)


बता दें कि केजरीवाल सरकार हाल के दिनों में ऐसे-ऐसे फैसले ले रही है, जिससे चुनावी मोड में जाने का पूरा आभास झलकता है. खुद केजरीवाल भी लोगों के बीच जा-जा कर उनके साथ संवाद स्थापित कर रहे हैं. मंत्रिमंडल के सहयोगी और सभी विधायक भी अपने-अपने इलाके में जा कर लोगों से मिल रहे हैं. आप नेता जनता के बीच जा कर पूछते हैं कि पहले 15 साल लगातार कांग्रेस और उससे पहले 5 साल बीजेपी की सरकार थी, लेकिन दोनों में से किसी ने भी बढ़ते बिजली के बिल को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई. अरविंद केजरीवाल सरकार आने के बाद बिजली का दाम ही नहीं घटा बल्कि बिजली भी 24 घंटे मिल रही है.

'आम आदमी पार्टी तो पूरी तरह से चुनावी मोड में आई'

पांडेय कहते हैं, ‘आम आदमी पार्टी तो पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गई है, लेकिन विपक्षी पार्टियां अभी भी चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन का इंतजार कर रही है. अगर देखा जाए तो बीजेपी ही एक पार्टी है जो थोड़ी बहुत विपक्षी पार्टी की भूमिका में है. जहां तक कांग्रेस का सवाल है शीला दीक्षित के निधन के बाद कांग्रेस में मायूसी छाई हुई है. कांग्रेस के नए अध्यक्ष का नाम नहीं सामने आने से कार्यकर्ताओं में और निराशा छा गई है. अभी की जो स्थिति है उससे लगता है कि कांग्रेस अब दिल्ली चुनाव में सीन से बाहर हो गई है.’

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अभी की जो स्थिति है उससे लगता है कि कांग्रेस अब दिल्ली चुनाव में सीन से बाहर हो गई है (File Photo)


आम आदमी पार्टी की मौजूदा तैयारी को देख कर लगता है कि वह दिल्ली में डोर टू डोर कैंपेन कर रही है. दूसरी तरफ माहौल बनाने के लिए कुछ स्थानीय नेताओं को भी पार्टी में शामिल करवाया जा रहा है. बीते कुछ दिनों से आम आदमी पार्टी के में कई नए लोग आए हैं. पिछले दिनों ही दिल्ली के सफाई कर्मचारी संगठनों से जुड़े हुए कई बड़े नेता हों या फिर दलित समाज के बड़े नेता, ये सभी आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे. अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में इन नेताओं ने पार्टी का दामन थामा था. केजरीवाल खुद सभी लोगों को टोपी और पटका पहनाकर पार्टी में शामिल करा रहे हैं.

आम आदमी पार्टी अपने जनसंवाद यात्रा के दौरान दिल्ली के लोगों से संवाद स्थापित कर रही है. यह जनसंवाद यात्रा बीते 1 सितंबर से दिल्ली की 70 विधानसभाओं में अलग-अलग दिन आयोजित की जा रही है, जो 3 अक्टूबर तक नियमित रूप से चलेगी. पार्टी ने जनसंवाद के आयोजन का जिम्मा दिल्ली प्रदेश संयोजक गोपाल राय को दिया हुआ है.

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आप नेताओं का कहना है कि बीजेपी के विरोध से केजरीवाल को फायदा हो रहा है (File Photo)


'जनसंवाद यात्रा को समर्थन मिलने से बीजेपी नेताओं की बेचैनी बढ़ी' 

गोपाल राय मीडिया के साथ बातचीत में कहते हैं, ‘हमलोगों के जनसंवाद यात्रा को जिस तरह से समर्थन मिल रहा है, उससे बीजेपी नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है. बीजेपी अरविंद केजरीवाल का जितना विरोध कर रही है जनता के बीच अरविंद केजरीवाल को लेकर उतनी ही मोहब्बत बढ़ रही है. 200 यूनिट तक बिजली माफ करने की पहल ने तो केजरीवाल के प्रति जनता के लगाव को और बढ़ा दिया है. जनसंवाद में खास तौर पर बिजली के मुद्दे पर चर्चा होती है. दिल्ली के लोगों को कभी अपने घरों में इनवर्टर रखना पड़ता था लेकिन आज वो इनवर्टर गैरजरूरी हो गया है क्योंकि अब चौबीसों घंटे बिजली की सुविधा उपलब्ध है.'

अगल-बगल के राज्यों का बिजली, पानी और स्कूल का उदाहरण देकर आप कार्यकर्ता जनता से सवाल पूछते हैं कि बताइए कौन अच्छा. उत्तर प्रदेश में बिजली बिल में 12 प्रतिशत की वृद्धि का हवाला देकर वो लोगों से पूछते हैं कि यदि दिल्ली में भी बिजली बिल की बढ़ोतरी देखना है तो आप बेशक केजरीवाल को वोट न दें. आप नेता लोगों से सवाल पूछते हैं कि क्या आप दिल्ली को हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसा बनाएंगे? इस पर लोगों का जवाब होता है- नहीं.

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