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Delhi Election 2020: दिल्ली फतह के लिए देशभक्ति के दांव से AAP का चक्रव्यूह भेदेगी BJP
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News18India
Updated: February 5, 2020, 12:08 PM IST
Delhi Election 2020: दिल्ली फतह के लिए देशभक्ति के दांव से AAP का चक्रव्यूह भेदेगी BJP
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल चुनाव प्रचार के क्रम में रोड-शो करते हुए. (फाइल फोटो)

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को धूल चटाने के लिए बीजेपी ने राष्ट्रवाद के मुद्दे को हवा देकर जीत की बनाई रणनीति.

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  • Last Updated: February 5, 2020, 12:08 PM IST
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नई दिल्ली. आगामी शनिवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव (Delhi Election 2020) के लिए मतदान में अब चंद दिन शेष हैं. चुनाव प्रचार अपने आखिरी चरण में पहुंच चुका है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) हो या आम आदमी पार्टी (AAP) या फिर कांग्रेस, तीनों ही दल अपने-अपने चुनावी घोषणाओं से मतदाताओं को लुभाने की हरसंभव कोशिश में जुटे हैं. चुनाव प्रचार में एक तरफ दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) और उनकी आम आदमी पार्टी है, जो पिछले एक साल में लागू की गई योजनाओं (मुफ्त बिजली-पानी आदि) और सरकार के अन्य कामों के आधार पर वोट मांग रही है. वहीं, प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने AAP के इस दांव से निपटने के लिए चुनाव में राष्ट्रवाद के मुद्दे को हवा देकर जीत की रणनीति बनाई है. AAP के पास चुनावी चेहरे के नाम पर सिर्फ अरविंद केजरीवाल हैं, जबकि बीजेपी की ओर से चुनाव मैदान में पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) से लेकर पार्टी के तमाम सियासी चेहरे.

चुनाव में राष्ट्रवाद कैसे आया
दिल्ली के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो बीजेपी हमेशा ही दूसरे दलों पर 'बीस' साबित होती रही है. 1999 में हुए चुनाव के अलावा, निकाय चुनाव हों या लोकसभा के चुनाव, बीजेपी को दिल्ली का साथ मिलता रहा है. पिछले साल हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 56 फीसदी वोट पर कब्जा जमाया था. इसके पहले 2014 के लोकसभा चुनाव में भी पार्टी ने मोदी-लहर पर सवार होकर 44 प्रतिशत वोट हासिल किए थे. जाहिर है 2019 के चुनाव में पार्टी ने इन आंकड़ों को आधार बनाकर ही जीत की रणनीति बनाई. इस बीच नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन और खासकर दिल्ली के शाहीन बाग में महिलाओं के धरने ने बीजेपी को AAP सरकार के खिलाफ चुनावी-जंग का एक और आधार दे दिया. यह बीजेपी के लिए अनचाहा 'चुनावी गिफ्ट' था, जिसे पार्टी ने फौरन हथियार के रूप में आजमाने की रणनीति बना ली. पार्टी ने तत्काल इन प्रदर्शनों को राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा बताते हुए मुहिम छेड़ दी.

कपिल, प्रवेश और अनुराग

दिल्ली चुनाव में राष्ट्रवादी-तड़का लगाने की बीजेपी की इस मुहिम को धार देने में पार्टी की ओर से केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा और AAP छोड़कर आए कपिल मिश्रा ने काफी 'सहयोग' किया. सांसद प्रवेश वर्मा के विवादित बयान को लेकर तो निर्वाचन आयोग ने उनके चुनाव प्रचार करने तक पर पाबंदी लगा दी, लेकिन पार्टी ने इसका भी 'तोड़' ढूंढ निकाला. वर्मा को संसद के मौजूदा सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई बहस को शुरू करने का मौका मिला. संसद में भाषण के जरिए भी प्रवेश वर्मा ने दिल्ली चुनाव पर ही निशाना साधा. उन्होंने संसद में नेहरू-गांधी परिवार पर हमला करने, शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों को देश-विरोधी साबित करने और आम आदमी पार्टी की सरकार की नीतियों पर अपनी बात रखी. News 18 पर छपे एक लेख के मुताबिक, बीजेपी ने अपने मतदाताओं के बीच यह बात स्थापित करने की कोशिश की कि 'शाहीन बाग के पक्ष में' खड़ा होना, राष्ट्र के खिलाफ होना है.

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बीजेपी से जंग में केजरीवाल अकेलेएक तरफ जहां बीजेपी दिल्ली के चुनाव को राष्ट्रवाद की तरफ मोड़ने के लिए जी-जान से जुटी है, वहीं इसके उलट आम आदमी पार्टी शुरुआत से ही स्थानीय मुद्दों को हवा देती दिख रही है. दरअसल, बीजेपी के भारी-भरकम चुनाव प्रबंधन के जवाब में AAP ने यह सोची-समझी रणनीति अपनाई है. दिल्ली में दोबारा सत्ता हासिल करने के प्रयास में जुटी पार्टी जानती है कि उसके पास चुनावी चेहरे के रूप में सिर्फ अरविंद केजरीवाल हैं. जबकि बीजेपी ने 'फौज' उतार रखी है. उसके पास 2013 और 2015 की तरह कुमार विश्वास सरीखे शख्सियत नहीं हैं. ऐसे में बीजेपी के साथ भिड़ंत के लिए AAP सोशल मीडिया या फिर केजरीवाल के भरोसे है, जो रोड-शो और रैलियों-सभाओं के जरिए पार्टी को दोबारा सत्ता दिलाने के प्रयास में जुटे हैं. इसलिए शाहीन बाग के मुद्दे पर भी AAP सीधे तौर पर कुछ न कहकर इसे केंद्र और दिल्ली पुलिस का मुद्दा करार देती है. बहरहाल, दिल्ली का चुनाव प्रचार अंतिम चरण में है. देखना होगा कि AAP का चक्रव्यूह भेदने के लिए बीजेपी की रणनीति कितनी कारगर होती है.

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First published: February 5, 2020, 12:04 PM IST
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