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चौपाल: समस्याओं पर सवालों के बीच ‘सुल्तान’ बनने की जंग!
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Updated: February 3, 2020, 7:56 AM IST
चौपाल: समस्याओं पर सवालों के बीच ‘सुल्तान’ बनने की जंग!
'आप' ने सुल्तानपुर माजरा में अपने निवर्तमान विधायक संदीप कुमार का टिकट काट दिया है

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है सुल्तानपुर माजरा सीट, छह चुनावों में पांच बार लगातार जीती है कांग्रेस, लेकिन 2015 में आम आदमी पार्टी ने बुरी तरह से हराया.

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  • Last Updated: February 3, 2020, 7:56 AM IST
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नई दिल्ली. सुल्तानपुर माजरा दिल्ली की उन 12 सीटों में शामिल है जो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. इस क्षेत्र को कांग्रेस का गढ़ कहा जा सकता है. लगातार पांच चुनावों में यहां पर कांग्रेस ने जीत का परचम लहराया है. इस बार यहां पर चुनावी मुकाबला किसी अखाड़े से कम नहीं है. इस पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने मौजूदा विधायक संदीप कुमार का टिकट काट दिया है. नए प्रत्याशी मुकेश कुमार अहलावत को यहां का सुल्तान बनाने के लिए जिम्मेदारी सौंपी है. वहीं दूसरी तरफ बीजपी ने भी साल 2015 के चुनाव में हारे उम्मीदवार प्रभु दयाल को बदल कर रामचंद्र छावरिया को टिकट दिया है. जाहिर है कि इस बार भितरघात दोनों पार्टियों में होगा. जबकि कांग्रेस ने अपने कद्दावर नेता की तरफ रुख किया और चार बार विधायक रह चुके जय किशन को सुल्तानपुर माजरा सीट से चुनावी मैदान में खड़ा किया है.

सबसे प्रमुख क्षेत्रों में सुल्तानपुरी है. इसके अलावा फ्रेंडस एंक्लेव, जलेबी चौक और किशन विहार शामिल है. पिछले पांच साल से यहां पर आम आदमी पार्टी का विधायक था लेकिन समस्याओं का पूरी तरह से समाधान नहीं हुआ. सुल्तानपुरी रेलवे फाटक पर अंडरपास का निर्माण कार्य अधूरा है. सुल्तानपुरी-मंगोलपुरी रोड पर जाम आम है. क्षेत्र में पार्किंग की समस्या गंभीर होती जा रही है. पार्क बदहाल हैं. इन सवालों से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी को रूबरू होना पड़ रहा है.

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कांग्रेस के गढ़ में आम आदमी पार्टी को चुनौती


राजनीतिक गुणाभाग

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2015 में आम पार्टी के प्रत्याशी संदीप कुमार ने BJP के प्रभु दयाल को 64,439 वोटों के बड़े अंतर से हराया था. इस सीट पर करीब 69.5% का एकतरफा वोट आम पार्टी के पास रहा जिसमें संदीप कुमार को 80 हजार से ज्यादा वोट मिले जबकि बीजेपी के प्रभु दयाल को 16 हजार वोट भी नहीं मिल पाए थे. संदीप कुमार केजरीवाल सरकार में मंत्री भी बने लेकिन सोशल मीडिया पर आए एक वीडियो और राशन घोटाले में नाम आने के कारण उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. 2020 के चुनाव में आम पार्टी ने संदीप का टिकट काट दिया.

यह सीट यहां 1993 में पहली बार विधान सभा क्षेत्र बना और कांग्रेस के जय किशन ने जनता दल के दिग्गज नेता नंदराम बागड़ी को हराया. जिसके बाद से लगातार यहां कांग्रेस का ही वर्चस्व रहा है. चार बार जय किशन यहां चुनाव जीते.

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First published: February 3, 2020, 7:56 AM IST
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