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चौपाल: BJP के लिए मुस्तफाबाद सीट बचाए रखना इस बार कितना आसान, कितना मुश्किल?
Delhi-Ncr News in Hindi

Pankaj Kumar | News18Hindi
Updated: January 27, 2020, 10:25 AM IST
चौपाल: BJP के लिए मुस्तफाबाद सीट बचाए रखना इस बार कितना आसान, कितना मुश्किल?
इस इलाके की सबसे बड़ी समस्याएं जड़-जड़ सड़कें और ट्रैफिक की रुकावटें हैं.

मुस्तफाबाद विधानसभा (Mustafabad Assemly) की सबसे बड़ी समस्याएं जर्जर सड़कें और ट्रैफिक की रुकावटें हैं. दो साल से सीवर लाइन डालने के बाद सड़कों का निर्माण नहीं कराया जा सका है. आलम ये है कि खराब सड़कों की वजह से लोग गिरकर चोटिल होते रहते हैं और जाम की समस्याएं लगी रहती हैं.

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  • Last Updated: January 27, 2020, 10:25 AM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 (Delhi Assembly Election 2020) में मुस्तफाबाद विधानसभा की सीट (Mustafabad Assembly Seat) बीजेपी के लिए काफी अहम है. दिल्ली की उत्‍तर-पूर्वी लोकसभा क्षेत्र के अंतगर्त आने वाली मुस्‍तफाबाद विधानसभा सीट उन तीन सीटों में से एक है, जहां पर बीजेपी ने साल 2015 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी. 2002 में बने परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद 2008 में मुस्‍तफाबाद विधानसभा क्षेत्र का गठन किया गया था. इस विधानसभा में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के हसन अहमद ने जीत दर्ज की थी. 2013 के विधानसभा चुनाव में भी हसन अहमद ने बीजेपी उम्मीदवार को करारी शिकस्त दी थी, लेकिन 2015 के चुनाव में अरविंद केजरीवाल की लहर में भी यह सीट बीजेपी ने जीत ली. जगदीश प्रधान ने यहां से लगातार दो विधायक रहे हसन अहमद को हराया. इस इलाके को मुगलकाल के दौरान बसाया गया था. यह इलाका हाल के वर्षों में काफी विकसित हुआ है. विस्‍तार होने के चलते अब पुराना मुस्‍तफाबाद और नया मुस्‍तफाबाद हिस्सा बन गया है.

मुस्तफाबाद इलाके में मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या अधिक

मुस्तफाबाद इलाके में मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या काफी अधिक है. दूसरे स्थान पर अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों की संख्या है. यहां पूर्वाचल और उत्तरांचल के लोग भी अधिक संख्या में हैं. हाल के दिनों में कई कॉलोनियां बस गई हैं. इस विधानसभा के अंतगर्त आने वाली ज्यादातर कॉलोनियां अनधिकृत हैं. अवैध तरीके से भी लोग कुछ इलाकों में रह रहे हैं.

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बीजेपी ने साल 2015 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी.


बता दें कि साल 2015 में त्रिकोणिय मुकाबले में बीजेपी ने जीत हासिल की थी. कांग्रेस, आप और बीजेपी में त्रिकोणीय मुकाबला होने के कारण फायदा बीजेपी को मिला था, लेकिन इस बार की कहानी बिल्कुल उलट है. कहा जा रहा है कि इस बार का मुकाबला मुख्य तौर पर बीजेपी के जगदीश प्रधान और आप के हाजी युनुस बीच होने वाला है. वहीं कांग्रेस से लड़ रहे अली मेंहदी भी जीत का दावा कर रहे हैं.

फिलहाल यहां सीएए (CAA) और एनआरसी (NRC) के मुद्दे को लेकर जोरदार धरना और प्रदर्शन का दौर जारी है. मुसलमानों के सघन आबादी के चलते यहां प्रदर्शन का दौर जारी है. इलाके के कई मुस्लिम यूथ सरकार से सीधा सीएए को वापस लेने की मांग पर अड़े हैं. इसलिए यहां पर साफ तौर पर सीएए और एनआरसी बड़ा मुद्दा दिखाई पड़ता है.

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इस इलाके की सबसे बड़ी समस्याएं जर्जर सड़कें और ट्रैफिक की रुकावटें हैं.
इलाके की मुख्य समस्याएं

इस इलाके की सबसे बड़ी समस्याएं जर्जर सड़कें और ट्रैफिक की रुकावटें हैं. दो साल से सीवर लाइन डालने के बाद सड़कों का निर्माण नहीं कराया जा सका है. आलम ये है कि खराब सड़कों की वजह से लोग गिरकर चोटिल होते रहते हैं और जाम की समस्याएं लगी रहती हैं. इस विधानसभा में नाला ओवरफ्लो से सड़कों पर पानी का जमाव देखा जा सकता है. इतना ही नहीं पीने का पानी लोगों को मिल नहीं पाता है. यहां लोग अभी भी समरसेबल के पानी पर निर्भर हैं और पानी के टैंकर पर लंबी लाइन लगाकर उन्हें पानी लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

जनता की राय

मोहम्मद सलीम कहते हैं कि चुनाव में मुद्दा सीएए और एनआरसी तो है ही साथ ही खराब सड़कें और खुला नाला से लोगों का जीना मुहाल है. पिछले पांच सालों में बीजेपी विधायक ने समस्या को दूर करने का कोई गंभीर प्रयास नहीं किया.

वहीं रमेश पोखरियाल आप के कामों की तारीफ करते हुए कहते हैं बिजली, पानी, मोहल्ला क्लिनिक और स्कूल में जोरदार काम हुए हैं इसलिए मेरे वोट के हकदार अरविंद केजरीवाल हैं.

हलांकि कई व्यवसायी मुस्तफाबाद की बुरी स्थिती के लिए कांग्रेस और आप को जिम्मेदार ठहराते हुए कहते हैं. लोगों का मानना है कि इलाके के पिछड़ेपन की वजह तुष्टीकरण की नीति है इसलिए वो बीजेपी के लिए ही वोट करना पसंद करेंगे. बीजेपी विधायक ने सीवर लाइन डलवाने के अलावा शिव विहार के तिराहे के चौड़ीकरण का काम किया है जो सराहनीय है.

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First published: January 27, 2020, 10:20 AM IST
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