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चौपाल: पंजाबी-सिख बहुल विधानसभा क्षेत्र मोती नगर में AAP की दावेदारी कितनी मजबूत?
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Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 2:05 PM IST
चौपाल: पंजाबी-सिख बहुल विधानसभा क्षेत्र मोती नगर में AAP की दावेदारी कितनी मजबूत?
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना के संसदीय क्षेत्र के रूप में जानी जाती है

मोती नगर विधानसभा सीट (Moti Nagar Assembly Seat) दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना (Madan Lal Khurana) के संसदीय क्षेत्र के रूप में जानी जाती है. मोती नगर की गिनती पश्चिमी दिल्ली के पंजाबी-सिख बहुल इलाकों में की जाती है.

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  • Last Updated: January 22, 2020, 2:05 PM IST
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नई दिल्ली. मोती नगर विधानसभा सीट (Moti Nagar Assembly Seat) दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना (Madan Lal Khurana) के संसदीय क्षेत्र के रूप में जानी जाती है. मोती नगर की गिनती पश्चिमी दिल्ली के पंजाबी-सिख बहुल इलाकों में की जाती है. इस विधानसभा क्षेत्र में ईस्ट पंजाबी बाग, कीर्ति नगर और मानसरोवर गार्डन जैसे पॉश इलाके आते हैं. इस विधानसभा क्षेत्र में एक भी अनधिकृत कॉलोनी नहीं है. इस विधानसभा क्षेत्र में जखीरा और कीर्ति नगर जैसे इंडस्ट्रियल इलाके भी आते हैं. कीर्ति नगर फर्नीचर मार्केट के लिए जानी जाती है.

बता दें कि 1993 में इस सीट से जीत हासिल करने के बाद ही मदन लाल खुराना दिल्ली के सीएम बने थे. 1993 में दिल्ली को विधानसभा का जब दर्जा मिला तो खुराना इस सीट से चुनाव लड़े और जीत हासिल की थी. 1998 के विधानसभा चुनाव में अविनाश साहनी ने बीजेपी के टिकट पर जीत हासिल की थी. 2003 के चुनाव में मदन लाल खुराना एक बार फिर इस सीट से चुनाव लड़ते हैं और कांग्रेस की चर्चित युवा चेहरा अलका लांबा को हरा देते हैं. हालांकि, कुछ समय बाद खुराना ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया.

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1993 में इस सीट से जीत हासिल करने के बाद ही मदन लाल खुराना दिल्ली के सीएम बने थे


मदन लाल खुराना यहां से पहली बार जीते थे

2004 में यहां पर कराए गए उपचुनाव में भी बीजेपी के सुभाष सचदेवा ने जीत हासिल किया था. 2004 के उपचुनाव में जीत के बाद 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में भी सुभाष सचदेवा ने यहां से जीत हासिल की थी. 2015 में सचदेवा जीत का चौका नहीं लगा सके और उन्हें आम आदमी पार्टी के शिव चरण गोयल के हाथों हार का सामना करना पड़ा. बीजेपी के लिए यह एक तरह से सुरक्षित सीट रही है. 1993 से लेकर 2013 तक 6 बार हुए चुनाव में बीजेपी ने यहां से जीत हासिल की है.

इस विधानसभा की प्रमुख समस्याओं में पार्किंग, ट्रैफिक जाम, झुग्गी बस्तियों में नशे के इस्तेमाल, गंदे पानी की सप्लाई, सफाई व्यवस्था, नजफगढ़ ड्रेन और सुरक्षा यहां के बड़े मुद्दे हैं. मेट्रो ने इस एरिया को काफी सुगम बना दिया है. यातायात व्यवस्था को लेकर लोगों की काफी शिकायतें रहती थीं, लेकिन हाल के वर्षों में यहां यातायात के साधन उत्तम हो गए हैं. मोती नगर चौराहा पर मोटर पार्ट्स का दुकान करने वाले मनोहर गोयल कहते हैं, मोती नगर में पार्किंग को लेकर गंभीर समस्या है. सुबह और शाम के वक्त सड़क के इस पार से उस पार होने में भी कई मिनट लग जाते हैं. पॉल्यूशन को लेकर सरकार को कुछ करना चाहिए. झुग्गी बस्ती के बच्चे नशे की लत में पड़ गए हैं, जिससे यहां लूट-खसोट होने लगे हैं. सप्लाई का पानी समय पर नहीं आता है.'

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मोती नगर सीट बीजेपी के लिए एक मजबूत किले के तौर पर थी, लेकिन AAP के शिव चरण गोयल ने सेंध लगा दिया.
पार्किंग, ट्रैफिक जाम से लोग बेहाल

पिछले विधानसभा चुनाव से पहले मोती नगर सीट बीजेपी के लिए एक मजबूत किले के तौर पर जानी जाती थी. बीजेपी यह सीट 1993 से लगातार 20 सालों तक जीतती रही, लेकिन 2015 में आम आदमी पार्टी की लहर में बीजेपी यह सीट हार गई. आप के शिवचरण गोयल ने बीजेपी के सुभाष सचदेवा को 15,221 मतों के अंतर से हराया. इसके बावजूद बीजेपी को उस चुनाव में 39 प्रतिशत वोट मिले. आम आदमी पार्टी को 53 प्रतिशत वोट मिले थे.

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First published: January 19, 2020, 7:46 PM IST
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