लाइव टीवी

‘आप’ की डबल इंजन की पार्टी और सरकार में नंबर 2 क्यों हैं मनीष सिसोदिया?

News18Hindi
Updated: January 16, 2020, 4:09 PM IST
‘आप’ की डबल इंजन की पार्टी और सरकार में नंबर 2 क्यों हैं मनीष सिसोदिया?
मनीष सिसौदिया दिल्ली के उप मुख्यमंत्री हैं और पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखते हैं.

साल 2013 में पटपड़गंज से अपने पहले ही विधानसभा चुनाव (Delhi Assembly Election) में मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने बीजेपी के नकुल भारद्वाज को हरा कर सनसनी फैला दी थी. लेकिन क्या वो ये कारनामा एक बार दोहरा पाएंगे?

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 16, 2020, 4:09 PM IST
  • Share this:
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी और विश्वसनीय लोगों में से एक मनीष सिसोदिया अब दिल्ली के कद्दावर नेताओं में शुमार होते हैं. आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार में उनकी हैसियत नंबर 2 की है. मनीष सिसोदिया दिल्ली के पटपड़गंज से लगातार दो बार से विधायक हैं. एक बार फिर अपने विधानसभा क्षेत्र से मनीष सिसोदिया चुनावी मैदान में हैं और जीत की हैट्रिक लगाना चाहते हैं.

स्वभाव से सरल और खुशमिजाज़ मनीष सिसोदिया को अरविन्द केजरीवाल की परछाई माना जाता है. पार्टी और सरकार में उनका कद काफी बड़ा है. कहा जाता है कि अरविंद पार्टी का चेहरा हैं तो मनीष सिसोदिया सरकार के कामकाज पर पैनी नजर रखते हैं. दिल्ली के उप मुख्यमंत्री होने के रूप में उन्होंने जहां दिल्ली में विकास के कई काम कराए तो शिक्षा मंत्री होने की वजह से सरकारी स्कूलों की दशा-दिशा भी बदली.

मनीष सिसोदिया और अरविन्द केजरीवाल का संबंध बेहद पुराना है . वो दोनों “कबीर” और “परिवर्तन” नामक गैर सरकारी संस्था से जुड़कर जनहित का काम करते रहे हैं. मनीष कबीर और परिवर्तन नामक संस्था के संचालक हैं और आरटीआई एक्टीविस्ट भी रहे हैं. इतना ही नहीं ‘सार्वजनिक हित अनुसंधान फाउंडेशन’  के सहसंस्थापक के रूप में मनीष सिसोदिया और अरविन्द केजरीवाल काम करते रहे हैं. यही वजह है कि दोनों की कैमिस्ट्री इतनी अच्छी है कि मनीष ने अरविन्द केजरीवाल के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे द्वारा चलाए गए आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा भी लिया.

पहले ही चुनाव में जीत से हुई शुरुआत

मनीष सिसोदिया 26 नवंबर 2012 को राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने थे जब अरविन्द केजरीवाल ने अन्ना हजारे की मर्जी के खिलाफ राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला लिया था. आम आदमी पार्टी  के टिकट पर साल 2013 में उन्होंने दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ा और पटपड़गंज से पहली दफे उम्मीदवार बने. उन्होंने अपने पहले ही चुनाव में बीजेपी के नकुल भारद्वाज को हराकर सनसनी फैला दी.

इसके 2 साल बाद ही साल 2015 में वो दूसरी बार भी चुनाव जीतने में कामयाब रहे और दिल्ली सरकार में मंत्री बने. उन्हें शिक्षा, लोक निर्माण, शहरी विकास,स्थानीय निकाय और भूमि और भवन जैसे अहम विभाग सौंपे गए जिनमें वो लगातार काम कर लोगों की नजरों में अपनी उपयोगिता साबित करने में कामयाब रहे हैं. साथ ही उन्हें दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली.

पत्रकार से पॉलिटिक्स के प्रहरी तकमनीष सिसोदिया का जन्म 5 जून 1972 को यूपी के हापुड़ में हुआ था. पत्रकार के तौर पर उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की. दिल्ली के भारतीय विद्या भवन से जन संचार में डिप्लोमा किया. निजी न्यूज़ चैनल में काम करने के अलावा मनीष ने ऑल इंडिया रेडियो के एक कार्यक्रम ‘ज़ीरो ऑवर्स’ को भी होस्ट किया था. इसके बाद उन्होंने साल 2006 में पब्लिक कॉज़ रिसर्च नामक फाउंडेशन की भी स्थापना की. मनीष सिसोदिया अभी भी ‘अपना पन्ना’ नामक मैगजीन के संपादक हैं.

सरकारी स्कूलों में महत्वपूर्ण सुधार किए

मनीष सिसोदिया का नाम दिल्ली के सरकारी स्कूलों के स्तर में सुधार लाने को लेकर खूब लिया जाता है. पार्टी उनके कामों को सरकार द्वारा किए गए बेहतरीन कामों में शुमार करती है जिसे जनता ने खूब सराहा है. पार्टी का मानना है आम लोगों के बच्चों के लिए स्कूली शिक्षा में सुधार का काम जनता को खूब पसंद आया है जिसका फायदा आने वाले चुनाव में खूब मिलेगा.

इसके अलावा प्राइवेट स्कूलों में फीस और दाखिले को लेकर मनीष सिसोदिया का रुख काफी सकारात्मक रहा है और गरीबों के लिए हितकर माना गया. ज़ाहिर है कि मनीष अपने इन कामों के दम पर वापस पटपड़गंज से ही मैदान मारकर हैट्रिक लगाने की जुगत में होंगे साथ ही बीजेपी जैसी पार्टी को एक बार फिर विधानसभा चुनाव में पटखनी देकर अरविन्द सरकार की हैट्रिक लगाना चाहेंगे ताकि आने वाले समय में दिल्ली से बाहर भी वो अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत कर सकें.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दिल्ली-एनसीआर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 16, 2020, 1:20 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर