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2015 में 'आप' की आंधी भी बीजेपी का झंडा लेकर खड़े रहे विजेंदर गुप्ता का कुछ न बिगाड़ सकी

News18Hindi
Updated: January 16, 2020, 4:53 PM IST
2015 में  'आप' की आंधी भी बीजेपी का झंडा लेकर खड़े रहे विजेंदर गुप्ता का कुछ न बिगाड़ सकी
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं विजेंदर गुप्ता

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के महज तीन विधायकों में से एक विजेंदर गुप्ता सदन में दिल्ली सरकार को घेरने का कोई मौका गंवाते नहीं हैं

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  • Last Updated: January 16, 2020, 4:53 PM IST
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विजेंद्र गुप्ता भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली प्रदेश के वो नेता हैं जो अपने जुझारुपन के लिए जाने जाते हैं. पिछले दो बार से दिल्ली के रोहिणी विधानसभा से विधायक चुने जाने वाले विजेंद्र गुप्ता दिल्ली में जानेमाने नेता हैं. विजेंद्र गुप्ता न सिर्फ दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं बल्कि बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य भी हैं.

सड़क से सदन तक आंदोलनकारी हैं विजेंदर

साल 2013 और फिर साल 2015 में लगातार जीतने वाले विजेंद्र गुप्ता विधानसभा में आम आदमी पार्टी को उसके फैसले को लेकर अक्सर घेरते हुए देखे जाते हैं. बीजेपी विधायक की संख्या भले ही 3 हो लेकिन विपक्ष के तौर पर बीजेपी की आक्रामकता विजेंद्र गुप्ता की वजह से अक्सर सुनी और देखी जाती रही है. सार्वजनिक जीवन में लोगों के लिए हमेशा से मुखर रहने वाले विजेंद्र गुप्ता विधायक बनने से पहले तीन दफा काउंसलर का भी चुनाव जीत चुके हैं. इसलिए उनका राजनीतिक जीवन पूरी तरह जमीन से जुड़ा रहा है और जनता की समस्याओं को लेकर सड़क से सदन तक आंदोलनरत रहने वाले विजेंद्र गुप्ता की छवि संघर्ष करने वाले एक राजनेता की है जो जनता की भलाई के लिए शासन से भिड़ने के लिए हमेशा तत्पर रहता है.

रोहिणी में काउंसलर से हुई राजनीतिक शुरुआत

विजेंद्र गुप्ता को पहली बार काउंसलर बनने का मौका साल 1997 में मिला. साल 2000-2001 में  जोनल चेयरमैन के रुप में कार्यभार संभालने का उन्हें मौका मिला. उन्होंने हाई पावर टैक्स कमेटी के डिप्टी चेयरमैन(2001-2001) और स्टैंडिंग कमेटी एमसीडी के नेता के तौर पर साल 2002 से लेकर 2007 तक काम किया. इस दौरान पार्किंग माफियाओं से छुटकारा दिलाकर विजेंद्र गुप्ता ने लोगों का खूब दिल जीता.

साल 2002 में विजेंद्र गुप्ता दिल्ली बीजेपी के सेक्रेट्री चुने गए और बीजेपी ने उन्हें संगठन में महत्पूर्ण जिम्मेदारियां देकर उनका सम्मान और बढ़ाया. उससे पहले छात्र जीवन में वो साल 1984 में दिल्ली छात्र संघ के चुनाव में उपाध्यक्ष चुने गए थे और तब से लेकर लगातार वो जनहित से जुड़े मुद्दे को लेकर संघर्षशील रहे.

सार्वजनिक जीवन में महत्तवपूर्ण योगदानकाउंसलर का चुनाव जीतने के बाद ही रोहिणी में पार्किंग माफियाओं के खिलाफ हल्ला बोलकर बिजेंद्र गुप्ता ने जनता के दिलों पर राज करना शुरू कर दिया. इलाके में सामाजिक आर्थिक रुप से पिछड़े लोगों की भलाई के लिए पंचकर्मा अस्पताल,एमसीडी के अंतर्गत नए स्वीमिंग पुल,6 लेन ब्रिज,रेलवे रिजर्वेशन सेंटर, स्कूल, और महिलाओं के लिए हॉस्टल का निर्माण कराने में अहम भूमिका निभाई.

इतना ही नहीं दिल्ली अभिभावक संघ के प्रेसिडेंट के तौर पर कॉमर्शियलाइज़ेशन ऑफ एजुकेशन के विरोध में कड़ा रुख अपनाया जिसकी वजह से दिल्ली के स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले के लिए कोर्ट का फैसले आने से सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों को लाभ मिला.

सीलिंग में प्रभावित व्यापारियों की बने आवाज़

इसके अलावा बिजेंद्र गुप्ता लॉटरी और सीलिंग के खिलाफ भी काफी मुखर रहे. उन्होंने दिल्ली के लाखों परिवारों को अपने संघर्ष से मदद पहुंचाने का काम किया. यही वजह है कि साल 2015 में आम आदमी पार्टी के लिए दिल्ली में उमड़े जन सैलाब के बीच भी उन्हें अपने इलाके में जनता का भरपूर सहयोग मिला और वो चुनाव जीत पाने में कामयाब रहे.

विजेंद्र गुप्ता दिल्ली बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष भी रहे हैं. श्रीराम कॉलेज से पढ़े विजेंद्र गुप्ता दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के उपाध्यक्ष भी रहे हैं. उनका विवाह डॉ शोभा गौतम से हुआ और उनके आईना और आधार नाम के बेटा-बेटी हैं.

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के महज तीन विधायकों में से वो एक हैं और सदन में दिल्ली सरकार को घेरने का कोई मौका गंवाते नहीं हैं. ज़ाहिर है कि यही वजह है पार्टी से लेकर जनता के बीच अब उनकी अपनी लोकप्रियता है इसलिए आने वाले विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका अहम होगी इससे इन्कार नहीं किया जा सकता है.

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First published: January 16, 2020, 4:53 PM IST
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