Delhi Assembly Election: कांग्रेस के ही पूर्व विधायकों को क्यों तोड़ रही आम आदमी पार्टी?
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Delhi Assembly Election: कांग्रेस के ही पूर्व विधायकों को क्यों तोड़ रही आम आदमी पार्टी?
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ राम सिंह नेताजी

दिल्ली में शुरू हुआ आयाराम-गयाराम का खेल, बदलने लगी नेताओं की आस्था, आप ने कांग्रेस के तीन पूर्व विधायकों को तोड़ा, इस चुनाव में सत्तारूढ़ दल को कांग्रेस से है ज्यादा खतरा, इसलिए कांग्रेस को कमजोर करने में जुटे 'आप' नेता

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  • Last Updated: January 14, 2020, 2:52 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली विधानसभा चुनाव घोषित होते ही आयाराम-गयाराम वाली सियासी तिकड़मबाजी शुरू हो गई है. चुनाव के लिए नामांकन शुरू हो गया है. इसके साथ ही टिकटों की मारामारी भी. जिस नेता को लगता है कि उसे उसकी पार्टी टिकट नहीं देगी उसने आस्था और पाला बदलने का खेल शुरू कर दिया है. सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) ने कांग्रेस को झटका दिया है. उसके तीन पूर्व विधायकों (राम सिंह नेताजी, प्रह्लाद साहनी और शोएब इकबाल) को अपने पाले में कर लिया है. दरअसल, इस चुनाव में 'आप' को बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस से अधिक खतरा लग रहा है. साल 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का ही वोटबैंक 'आप' की तरफ शिफ्ट हुआ था. ऐसे में अगर कांग्रेस जरा भी बढ़ेगी तो सीधा नुकसान केजरीवाल को होगा.

दिल्ली यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार कहते हैं कि 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने 8 सीटें जीती थीं. उसका वोट 24.55 परसेंट था. जबकि 2008 में 43 सीटों के साथ उसके पास 40.31 फीसदी वोटों का समर्थन था. 2015 में केजरीवाल को जो वोट मिला वो बीजेपी से नहीं बल्कि कांग्रेस से शिफ्ट हुआ था. कांग्रेस को तब सिर्फ 9.65 फीसदी वोट मिले थे और उसके 62 प्रत्याशी जमानत बचाने में नाकाम रहे थे. ऐसे में कहा जा सकता है कि आम आदमी पार्टी को उन्हीं लोगों का वोट मिला जो पहले कांग्रेस को वोट देते थे.

दूसरी ओर बीजेपी ने 2013 के चुनाव में 33.07 फीसदी वोट लिए थे. जबकि 2015 भी उसे 32.19 फीसदी वोट मिले हैं. इसलिए आम आदमी पार्टी बीजेपी पर उतना हमलावर नहीं होगी जितनी कांग्रेस पर. यही वजह है कि आप नेता आतिशी भी बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस पर हमलावर हो रही हैं.



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कांग्रेस पर इसलिए हमलावर है आम आदमी पार्टी




सियासी जानकारों का कहना है कि हरियाणा में कांग्रेस पहले से मजबूत होकर उभरी है. ऐसे में कांग्रेस उन सीटों पर राजनीतिक दांव खेलने की कोशिश करेगी जो हरियाणा से लगती हुई हैं. अगर आप दिल्ली की सीटों का भूगोल देखें तो ऐसी दस सीटें हैं जिन पर पार्टी भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसे जाट नेताओं से प्रचार करवाएगी.

कांग्रेसियों की एंट्री पर 'आप' का विरोध!
बदरपुर के पूर्व विधायक राम सिंह नेताजी की आम आदमी पार्टी में एंट्री वहां के मौजूदा विधायक को पच नहीं रही है. मौजूदा विधायक एनडी शर्मा आम आदमी पार्टी से ही हैं. उन्होंने अपने समर्थकों के साथ सिसोदिया के आवास पर जाकर इसका विरोध जताया.

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