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बदरपुर चौपाल: MLA आए-गए लेकिन नहीं गई तो जाम, गंदा नाला और पिछड़ेपन की समस्या
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Updated: January 16, 2020, 12:32 PM IST
बदरपुर चौपाल: MLA आए-गए लेकिन नहीं गई तो जाम, गंदा नाला और पिछड़ेपन की समस्या
Badarpur Station

बदरपुर (Badarpur) की सियासी तस्वीर तो ऐसी कुछ खास नहीं है, बस इतना जरूर है कि वोटरों (Voter) की संख्या के चलते बड़ी विधानसभा (Assembly) के रूप में देखी जाती है.

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  • Last Updated: January 16, 2020, 12:32 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली (Delhi) आने-जाने वालों को भले ही कोई और इलाका याद रहे न रहे, लेकिन बदरपुर (Badarpur) जरूर याद हो जाता है. हालांकि उसकी वजह नेगेटिव है, लेकिन हम शुरुआत में ही किसी की कमियों पर सवाल नहीं उठाएंगे. जहांगीर काल की सराय और आगरा (Agra) कैनाल के चलते बदरपुर की ऐतिहासिक अहमियत भी है. आगरा-मथुरा (Mathura) को दिल्ली से जोड़ने वाली सड़क और बदरपुर थार्मल पॉवर प्लांट भी इसे एक खास पहचान दिलाता है.

दिल्ली-हरियाणा (Haryana) की सीमा पर होने के चलते इसे बदरपुर बॉर्डर (Badarpur) के नाम से भी जाना जाता है. बदरपुर की सियासी तस्वीर तो ऐसी कुछ खास नहीं है, बस इतना जरूर है कि वोटरों की संख्या के चलते बड़ी विधानसभा के रूप में देखी जाती है. हालांकि वोटरों में भी किसी एक का जातिगत दबदबा नहीं है.

बेशक दिल्ली सरकार ने हेल्थ, एजुकेशन और पीने के पानी को लेकर काम कराया है, लेकिन बावजूद इसके बदरपुर इलाके में कोई बड़ा अस्पताल नहीं है. सेकेंडरी एजुकेशन में कुछ सरकारी और प्राइवेट कॉलेज को छोड़कर प्राइमरी और दूसरी क्लासों के लिए अच्छा स्कूल नहीं है. यह कहना है जैतपुर इलाके के रहने वाले हाजी सरफुद्दीन खान का.

दोपहर का वक्त छोड़ दें तो हालात इससे जुदा नहीं होते हैं कभी.




न्यूज18 हिन्दी को वो आगे बताते हैं कि बड़े सरकारी अस्पताल के लिए कई बार ऐलान हो चुका है लेकिन खुला अभी तक नहीं है. पता तो यह भी लगा है कि दो बार अस्पताल का शिलान्यास हो चुका है. इलाके में बच्चों के लिए एक पार्क की बेहद कमी है. हालांकि एक कूड़े घर के छोटे से टुकड़े को साफ करके खेल का मैदान बनाने की कोशिश की गई है. लेकिन जरूरत बड़े पार्क या मैदान की है. एक बड़ी समस्या कच्ची कालोनियां भी हैं.



ट्रैफिक जाम भी है एक पहचान

बदरपुर बॉर्डर, मीठापुर, जैतपुर मोड़ का ट्रैफिक जाम तो मानों इस इलाके की पहचान ही बन चुका है. बदरपुर बॉर्डर पर जरूर फ्लाइ ओवर बनने के चलते बाहर से आने वालों को जाम से थोड़ी राहत मिली है. लेकिन उसके नीचे वाले रोड पर आज भी जाम के हालात जस के तस हैं. इलाके में जगह-जगह लगने वाले जाम की यह कहानी बयां की है बदरपुर में रहने वाले अफसार ने.



जाम से राहत के नाम पर नाउम्मीद हो चले दुकानदार अफसार बताते हैं कि इस इलाके में सबसे ज्यादा जाम ऑटो वालों के चलते लगता है. ऑटो के लिए दिल्ली सरकार ने स्टैंड बनाए हैं लेकिन खड़े होते हैं सड़क के बीच में. दूसरी समस्या है इलाके के बीच से होकर बहने वाले गंदे नाले की. जिससे निकलने वाली गैसों के चलते बीमारी तो होती ही हैं साथ में फ्रिज और एसी के गैस पाइप भी गल जाते हैं.

कब बनेगा बदरपुर गांव को मीठापुर से जोड़ने वाला पुल

बाइक पर सामान लेकर दिन में कई बार मीठापुर पुल से गुजरने वाले रिज़वान का कहना है कि आगरा कैनाल पर बना यह पुल बदरपुर गांव को मीठपुर से जोड़ता है. दिनभर में करीब चार लाख से अधिक लोग इस पुल से गुजरते हैं. लगभग 30 साल पहले यह पुल अपनी मियाद भी पूरी कर चुका है. लेकिन यूपी और दिल्ली सरकार की फाइलों के बीच में फंसा यह पुल कभी भी दम तोड़ सकता है.

अक्सर इस पुल पर जाम के झाम से जूझना पड़ता है.


मीठापुर में दुकान चलाने वाले राजेश बताते हैं कि इस पुल को मौजूदा ट्रैफिक को देखते हुए पुल की चौड़ाई अब कम पड़ती है. इसी के बराबर से या थोड़ा दूर हटकर एक नए पुल की जरूरत है. पुराने पुल को तो राष्ट्रीय विरासत घोषित करने की भी कवायद चल रही है. लेकिन उससे पहले इसे बंद करना होगा.

बदरपुर से जुड़े हैं यह इलाके

बदरपुर विधानसभा में बदरपुर, मोलड़बंद, ताजपुर, मीठापुर, हरीनगर, आलीपुर और जैतपुर आदि इलाके आते हैं. वहीं करीब 65 से 70 अनधिकृत कॉलोनियां, गौतमपुरी पुनर्वास कॉलोनी और चार झुग्गी बस्ती भी इसी विधानसभा में हैं.

मजबूरी है कूड़े के ढेर के पास खेलना.


बदरपुर के आइने में सियासी तस्वीर

जैतपुर के 55 वर्षीय हाफिज समी बताते हैं कि 1993 में यह विधानसभा घोषित हुई थी. यहां मिलीजुली आबादी रहती है. यही वजह है कि वोटों को लेकर यहां कभी किसी एक जाति का दबदबा नहीं रहा है. अगर मोटे-मोटे आंकड़ों पर बात करें तो यहां गुर्जर करीब 18 प्रतिशत, ब्राह्मण 18, मुस्लिम 17, वैश्य 7, एससी 13, ओबीसी 24 प्रतिशत और पूर्वांचली वोटर भी ठीकठाक संख्या में है. कुल मतदाता करीब 2.25 लाख, पुरुष मतदाता लगभग 1.30 लाख और महिला मतदाता लगभग 95 हजार हैं.

बदरपुर में कुछ इस तरह से ही जूझना पड़ता है जाम के झाम से.


‘राम’ के हाथों में जाती रही है बदरपुर की कमान

बीते चुनाव में आम आदमी पार्टी के विधायक नरायण दत्त शर्मा की जीत को छोड़ दें तो बदरपुर विधानसभा की कमान राम के हाथों में जाती रही है. इलाके के वोटर भी तेज-तर्रार हैं. अभी तक लगातार दो बार किसी को मौका नहीं दिया है. वो बात अलग है कि गैप देकर फिर दोबारा से विधायक बना दें.

यही वजह है कि पिछले 20 साल से कभी रामसिंह विधायक बने हैं तो कभी बीजेपी के रामवीर सिंह बिधूड़ी. राम सिंह नेताजी एक बार बीएसपी से तो एक बार निर्दलीय विधायक बने हैं. इस बार वो आप से किस्मत आजमा रहे हैं. विधायक बनने के बाद कांग्रेस में भी जा चुके हैं.

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First published: January 16, 2020, 12:32 PM IST
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