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चौपाल: पड़ोसी विधानसभा की तरह से पीने के पानी को तरस रहा है छतरपुर

News18Hindi
Updated: January 29, 2020, 6:44 PM IST
चौपाल: पड़ोसी विधानसभा की तरह से पीने के पानी को तरस रहा है छतरपुर
Delhi-election illustration

2008 में चुनाव आयोग (Election commission) ने पहली बार छतरपुर विधानसभा (Chhatarpur constituency) के चुनाव कराए थे. तब यहां कांग्रेस (Congress) ने अपना खाता खोला था.

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नई दिल्ली. छतरपुर विधानसभा (Chattarpur constituency) की अहमियत महरौली (Mehrauli) और तुगलकाबाद (Tughlakabad) के चलते भी खास हो जाती है. वैसे कुतुबमीनार (Qutub minar) और गुड़गांव (Gurugram) से सटा होने के चलते भी यह इलाका कई मायनों में खास है. दिल्‍ली की 70 विधानसभा सीटों में छतरपुर विधानसभा भी एक अहम सीट के रूप में शामिल है. यह विधानसभा सीट साउथ दिल्‍ली लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्‍सा है. 2002 में गठित परिसीमन आयोग की सिफारिशों के बाद 2008 में इस क्षेत्र को विधानसभा सीट घोषित किया गया.

2008 में चुनाव आयोग ने यहां पर पहली विधानसभा के चुनाव कराए. तब यहां से कांग्रेस (Congress) के बलराम तंवर ने भाजपा (BJP) के ब्रह्म सिंह तंवर को हराया और विधायक बने. 2013 के चुनाव में यहां भाजपा के ब्रह्म सिंह तंवर ने पिछली हार का बदला लेते बलराम तंवर को हराया और खुद विधायक बने. 2015 के चुनाव में यहां से आम आदमी पार्टी (AAP) करतार सिंह तंवर ने जीत हासिल की. उन्‍होंने भाजपा के ब्रह्म सिंह तंवर को करारी शिकस्‍त दी. छतरपुर की प्रसिद्धी के पीछे एक यह भी दावा किया जाता है कि 1974 में इस इलाके में बाबा संत नागपाल ने भगवान शिव का मंदिर बनवाया था. भारत के सबसे बड़े मंदिरों में शुमार इस शिव मंदिर को छतरपुर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है.

मैं छतरपुर का ही रहने वाला हूं. पहले हम लोग तुगलकाबाद में रहते थे. पिताजी हमारे कंटेनर डिपो में नौकरी करते थे. लेकिन रिश्तेदारियों के चलते छतरपुर में मकान बनवा लिया. कहने को तो हम तुगलकाबाद में बहुत कुछ छोड़कर आए, लेकिन जो नहीं छूटा वो समस्याएं थीं. खासतौर से पीने के पानी की समस्या का सामना हम आज भी कर रहे हैं. यह कहना है खुद का कारोबार करने वाले मनीष जादौन का. न्यूज18 हिन्दी को मनीष ने बताया कि कभी अपने बाप-दादा से सुनते थे, लेकिन आज अपनी आंखों से देख रहा हूं कि एक ही विधानसभा के इलाके होने के बावजूद विकास और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर भेदभाव किया जाता है.

प्रतीकात्मक फोटो.


मैं जो कह रहा हूं इसके लिए किसी सबूत की कोई जरूरत नहीं है. आप आधा दर्जन तो छोड़िए दो इलाकों में ही घूम आइए फर्क आपको खुद बा खुद नज़र आ जाएगा. यहां के सीवर सिस्टम को देखकर आपको लगेगा कि पता नहीं यहां आखिरी बार कब सफाई हुई होगी. सुना तो यह भी है कि सीवर के लिए काम होना था, लेकिन किन्ही कारणों की वजह से वो रुक गया. अब वो क्यों रुका या रुकवाया गया कोई नहीं जानता.

सही बात तो यह है सर कि हम महरौली और तुगलकाबाद के नजदीक छतरपुर में रहने का श्राप झेल रहे हैं. जैसे महरौली और तुगलकाबाद में कभी पानी की समस्या दूर नहीं हो सकती, वैसे ही हमारे नसीब में भी खरीदकर और लड़-झगड़कर पानी पीना लिखा हुआ है. कहने को तो यहां से थोड़ी ही दूरी पर देश-विदेश के हजारों पर्यटक कुतुबमीनार देखने के लिए आते हैं. क्योंकि वो लोग खरीदकर बोतल का पानी पीते हैं तो यहां की समस्या कभी बाहर नहीं जा पाती है और न ही पर्यटक समस्या को जान पाते हैं. पानी की समस्या को बताया उत्तम सिंह देवला ने.

प्रतीकात्मक फोटो.
देवला का कहना है कि ऐसा नहीं है कि दिल्ली सरकार ने कोई काम नहीं कराया है. यहां पाइप लाइन बिछाई जा चुकी है. कई बार कागज भी दिखाए गए, लेकिन पानी का पता नहीं है. अब जब हम काम के चलते और रिश्तेदारों से मिलने के लिए दिल्ली के दूसरे इलाकों में जाते हैं तो वहां पानी नाम की कोई समस्या नज़र नहीं आती है. गंदगी भी इतनी नहीं दिखाई पड़ती है. लेकिन महरौली और तुगलकाबाद के लोगों की तरह से हम आज भी पानी की समस्या से जूझ रहे हैं.

सियासी नज़र में छतरपुर विधानसभा

छतरपुर विधानसभा सीट पर मौजूदा विधायक आप के करतार सिंह तंवर हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव में आप के उम्मीदवार करतार सिंह तंवर ने भाजपा के ब्रहम सिंह तंवर को 22240 वोटों से शिकस्त दी थी. करतार सिंह तंवर को 67645 वोट और ब्रहम सिंह तंवर को 45405 वोट मिले थे. छतरपुर सीट पर एक बार फिर आप की तरफ से करतार सिंह तंवर को टिकट दिया गया है. भारतीय जनता पार्टी ने भी फिर से ब्रहम सिंह तंवर और कांग्रेस ने सतीष लोहिया को उम्मीदवार बनाया है.

छतरपुर सीट पर 2015 विधानसभा चुनाव के नतीजे

करतार सिंह तंवर (AAP) -  67645 वोट

ब्रहम सिंह तंवर (BJP) - 39164 वोट

बता दें कि 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने दिल्ली की 70 में से 67 सीटें जीतकर इतिहास रचा था, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने सिर्फ तीन सीटें हासिल की थीं. वहीं कांग्रेस के खाते में कोई सीट नहीं आई थी.

प्रतीकात्मक फोटो.


छतरपुर विधानसभा सीट का जाति समीकरण

दक्षिणी दिल्ली लोकसभा में आने वाले छतरपुर विधानसभा के तहत आने वाली कुल आबादी में अनुसूचित जाति का अनुपात 14.16 फीसदी है. 2019 की मतदाता सूची के मुताबिक 2,09,356 वोटर 171 मतदान केंद्रों पर वोटिंग करेंगे. 2015 के विधानसभा चुनावों में छतरपुर विधानसभा सीट पर 67.34% वोट पड़े थे. इस चुनाव में बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्ट को क्रमशः 36.44 फीसदी, 7.5 और 54.29 फीसदी वोट मिले थे.

विधानसभा चुनाव 2015 के नतीजे

करतार सिंह तंवर(आम आदमी पार्टी)- (54.29%)

ब्रह्म सिंह तंवर (बीजेपी)- (36.44%)

बलराम तंवर (कांग्रेस)- (7.49%)

विधानसभा चुनाव 2013 के नतीजे

ब्रह्म सिंह तंवर (बीजेपी)- 49,975  (45.07%)

बलराम तंवर (कांग्रेस)- 33,851  (30.53%)

ऋषि पाल(आम आदमी पार्टी)- 22,285 (20.10%)

2013-2015 में क्या क्या हुआ था

लोकसभा चुनाव में रहा बीजेपी का दबदबा

2019 के लोकसभा चुनाव में आप सिर्फ 18.1 फीसदी वोट पा सकी तो बीजेपी 56.5 फीसदी वोट पाने में कामयाब रही. वहीं कांग्रेस के वोट शेयर में 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और उसे 22.5 फीसदी वोट मिले थे.

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First published: January 29, 2020, 6:44 PM IST
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