लाइव टीवी

ग्रेटर कैलाश चौपाल: नाम बड़े और दर्शन छोटे, नाले के किनारे गंदगी भरे मैदान में बीतता है दिन

News18Hindi
Updated: January 22, 2020, 3:11 PM IST
ग्रेटर कैलाश चौपाल: नाम बड़े और दर्शन छोटे, नाले के किनारे गंदगी भरे मैदान में बीतता है दिन
चिराग दिल्ली को शेख सराय से एक यही पुल जोड़ता है.

सरकार (Government) ने 1960 में ग्रेटर कैलाश को विकसित करने के लिए एक प्राइवेट कंपनी को जिम्‍मेदारी सौंपी थी. दिल्‍ली (Delhi) के पॉश इलाकों में शुमार ग्रेटर कैलाश (Greater Kailash) में बड़े शॉपिंग मॉल्‍स, बिजनेस सेंटर, विभिन्‍न कंपनियों के शोरूम भी हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2020, 3:11 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. ग्रेटर कैलाश (Greater Kailash) विधानसभा के वोटरों के लिए यह चौथा इलेक्शन है. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि ग्रेटर कैलाश नई नवेली विधानसभा है. यहां के वोटरों ने दिल्ली विधानसभा चुनावों (Delhi Assembly Election) में अभी तक बीजेपी (BJP) के विजय कुमार मल्होत्रा को पहले और आम आदमी पार्टी (AAP) के सौरभ भारद्वाज को दूसरे और तीसरे विधायक के रूप में देखा है. कांग्रेस (Congress) अभी यहां खाता भी नहीं खोल पाई है.

दक्षिण दिल्‍ली का यह रिहाइशी इलाका 2008 में विधानसभा सीट घोषित किया गया था. मीडिया रिपोर्टस पर ही भरोसा करें तो 2009 में एक सर्वे के मुताबिक यह इलाका रहने के लिहाज से सबसे सुर‍क्षित बताया गया था. सरकार ने 1960 में इस इलाको को विकसित करने के लिए एक प्राइवेट कंपनी को जिम्‍मेदारी सौंपी थी. दिल्‍ली के पॉश इलाकों में शुमार ग्रेटर कैलाश में बड़े शॉपिंग मॉल्‍स, बिजनेस सेंटर, विभिन्‍न कंपनियों के शोरूम और प्रसिद्ध शैक्षिक संस्‍थान भी हैं.

शेख सराय और चिराग दिल्ली इलाके को सदबुला का नाला बांटने का काम करता है. एक इलाके से दूसरे इलाके में जाने के लिए नाले के ऊपर बने एक छोटे से पुल का इस्तेमाल करना पड़ता है. पुल से निकल गए तो गंदगी से भरे और जानवरों के बीच से होते हुए एक मैदान को पार करना होता है. यह कहना है वहीं नाले के किनारे सर्दी में धूप सेंक रही लक्ष्मी का.



न्यूज18 हिन्दी से बात करते हुए उन्होंने बताया कि घरों के अंदर तक धूप नहीं पहुंचती है. आसपास कोई साफ-सुथरा मैदान भी नहीं है. इसलिए धूप सेंकने के लिए नाले के किनारे गंदगी के बीच यहां बैठना मजबूरी है. विधायक ने बेंच लगवा दी है. मैदान में बैठो तो चारों ओर गंदगी है, सुअर और गाय घूमती रहती हैं. बच्चे भी खेलें तो कहां खेलें. गर्मियों में तो हाल और भी ज्यादा बुरा हो जाता है. अभी तो यहां बैठे भी हैं, लेकिन गर्मी में बदबू के चलते तो यहां खड़ा होना भी मुश्किल हो जाता है.

सर्विस रोड हो या गली हर जगह आपको यहां-वहां कार पार्किंग दिखाई दे जाएगी. फिर चाहें पैदल चलने और दोपहिया वाहन को निकलने के लिए रास्ता बचे या नहीं. रही-सही कसर दुकानदारों के अतिक्रमण ने पूरी कर दी है. सामने से एक आटो आ जाए और दूसरी ओर से बाइक तो बाजार में जाम लग जाता है. बिजली के नंगे तार भी बड़ी समस्या हैं. ग्रेटर कैलाश की समस्याओं के बारे में यह कहना है चिराग गांव के रहने वाले मुशीर अली का.

मुशीर ने बताया कि मुनक नहर की फेंसिंग और पुल का निर्माण, डार्क स्पॉट, स्नैचिंग, लूटपाट और गाड़ियों की चोरी भी यहां बहुत होती है. इलाके में कई जगह बस स्टॉप बने हुए हैं, लेकिन शोपीस के तौर पर. इतना बड़ा पॉश एरिया होने के बाद भी यहां बसें नहीं चलती हैं. जब ट्रांसपोर्ट विभाग के मन में आती है तो बसें चालू हो जाती हैं और उसी की मर्जी से बंद भी हो जाती हैं. जिसके चलते ऑटो वाले मुंह मांगे दाम वसूलते हैं.

गंदगी और अवारा पुशओं के बीच ही मैदान में धूप सेंकने को मजबूर हैं.


सियासी नजर में गेटर कैलाश

ग्रेटर कैलाश विधानसभा नई दिल्ली लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है. यहां कुल वोटर्स की संख्या 1,79,2227 है. जिसमे पुरुष वोटर्स 95,877 और महिला वोटर्स की संख्या 83,350 है. यह दिल्ली के पॉश इलाकों वाली सीट है. कई अर्बन विलेज भी इस विधानसभा का हिस्सा हैं. खिड़की एक्सटेंशन, जमरूदपुर, संत नगर, कैलाश कॉलोनी और कालकाजी डीडीए फ्लैट्स का भी कुछ हिस्सा इस सीट के अंतर्गत आता है.

सदबुला नाले और गंदगी के ढेर के पास हर रोज महिलाओं का झुंड इसी तरह से बैठने को मजबूर हैं.


लगातार दूसरी जीत, वोट भी बढ़े

साल 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने ग्रेटर कैलाश विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी. साल 2015 के चुनाव में भी वह लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए. 2015 के विधानसभा चुनाव में सौरभ भारद्वाज को 57589 वोट मिले थे, जबकि बीजेपी उम्मीदवार राकेश कुमार गुल्लैया को 43006 वोट. वहीं कांग्रेस की शर्मिष्ठ मुखर्जी को मात्र 6 हजार 102 वोट मिले थे. 2008 के पहले विधानसभा चुनावों में बीजेपी के विजय कुमार मल्होत्रा विधायक चुने गए थे.

यहां बस तो नहीं आती हैं, लेकिन उनको रोकने के लिए बोर्ड जरूर लगा दिया गया है.


लोकसभा चुनाव में था बीजेपी का दबदबा

2019 में हुए लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की थी और वोट प्रतिशत के लिहाज से कांग्रेस दूसरे नंबर पर पहुंच गई थी. आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर खिसक गई थी.

ये भी पढ़ेंं- चौपाल: तो क्या जंगपुरा में रिफ्यूजियों की समस्याएं बनेंगी सियासी मुद्दा

महरौली चौपाल: बसंत कुंज-साकेत से क्यों पिछड़े लाडो सराय और मसूदपुर

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दिल्ली-एनसीआर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 22, 2020, 3:11 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर