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चौपाल: कालकाजी मंदिर और लोटस टैंपल से पहचानी जाती है यह विधानसभा
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Updated: January 24, 2020, 1:08 PM IST
चौपाल: कालकाजी मंदिर और लोटस टैंपल से पहचानी जाती है यह विधानसभा
कालकाजी विधानसभा में आता है लोटस टैंपल. फाइल फोटो

प्राचीनकाल का कालकाजी (Kalkaji) साल 1972 में विधानसभा (Assembly) बनाया गया था. यहां के पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस (Congress) के वीपी सिंह ने जीत हासिल की थी.

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नई दिल्ली. कालकाजी विधानसभा (Kalkaji Assembly) का नाम कान में पड़ते ही सबसे पहले ज़ेहन में आती है काली देवी का मंदिर. और इसी के साथ जिक्र उठता है लोटस टैंपल (lotas temple) का. दिल्ली ही नहीं देश के दूसरे इलाकों से भी श्रद्धालू काली देवी के मंदिर कालकाजी (kalkaji temple) पहुंचते हैं. एक नहीं अनगिनत कहानियों और किस्सों को कालकाजी का मंदिर अपने में समेटे हुए हैं. नेहरू प्लेस (Nehru Place) का इलाका भी कालकाजी से सटा हुआ है. नेहरू प्लेस के लिए अब यह जिक्र करना बेमानी होगा कि इसे मोबाइल (Mobile), लैपटॉप सहित दुनियाभर के गैजेट्स का बड़ा बाज़ार कहा जाता है.

कालकाजी और नेहरू प्लेस के कई इलाके पूरी तरह से मैट्रो ट्रेन से जुड़े हुए हैं. यह दिल्ली का बहुत ही रिच इलाका माना जाता है. प्राचीनकाल का यह इलाका साल 1972 में विधानसभा बनाया गया था. यहां के पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस (Congress) के वीपी सिंह ने जीत हासिल की थी. इस सीट से कांग्रेस लगातार चार बार और कुल पांच बार जीत दर्ज करा चुकी है. लेकिन यहां मौजूदा विधायक आम आदमी पार्टी (AAP) के हैं. कालकाजी विधानसभा साउथ दिल्‍ली लोकसभा (Lok sabha) निर्वाचन क्षेत्र का ही हिस्‍सा है.

सच पूछो तो हमारी समस्याएं आज भी हमारी मांग बनी हुई हैं. हम अपने इलाके में किसी लम्बे-चौड़े विकास कार्य की बात नहीं कर रहे हैं. हमारी मांग आज भी बुनियादी समस्याओं को लेकर ही है. जहां हम रहते हैं तो क्या वहां सड़क, स्ट्रीट लाइट व हरियाली पर बात करना गुनाह है. और यह समस्याएं सिर्फ हमारी ही नहीं हैं. कालकाजी का एक बड़ा इलाका पॉश एरिया भी कहा जाता है. वहां भी ऐसी ही समस्याएं हैं. यह कहना है एक दवा कंपनी में काम करने वाले योगेश कुमार का.

BJP (Demo Pic)


न्यूज18 हिन्दी को योगेश ने बताया कि इस इलाके में एक बड़ी समस्या ट्रैफिक जाम और फुटपाथों पर अतिक्रमण की भी है. होता क्या है कि फुटपाथ दुकानदार ने घेर ली है. उसके आगे गाडियां खड़ी होती हैं. अब पैदल चलने वाले भी सड़क पर आ जाते हैं. जिसके चलते छोटी सी सड़क और छोटी हो जाती है. और इस पर भी अगर सामने से गाय आ जाए तो फिर भगों जान बचाने के लिए. और हां, ऐसा भी नहीं है कि इस तरह की परेशानी सिर्फ यहां की अवैध कॉलोनियों के बाजारों में ही है. बल्कि न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी की डीडीए जैसी मार्केट में भी इस तरह की समस्या से दो-चार होना पड़ता है.

सड़क पर दौड़ रहीं टैक्सी और ऑटो की बात तो छोड़ ही दिजिए, अगर आप किसी दुकान या शोरूम पर गए हैं तो वहां भी आपको पार्किंग की सुविधा नहीं मिलेगी. घर में दो रिश्तेदार भी आ जाएं तो दोपहिया वाहन या कार को खड़ी करने के लिए इधर-उधर जगह तलाशनी पड़ती है. कुल मिलाकर एक गाड़ी खड़ी करने के लिए खासी जद्दोजहद करनी पड़ती है. यह कहना है महारानी बाग में रहने वालीं हरप्रीत बाजवा का.

हरप्रीत ने न्यूज18 हिन्दी को बताया कि सिर्फ पार्किंग ही नहीं पूरे इलाके में सीवर भी एक बड़ी समस्या है. पॉश कालोनियों में मकानों की कीमत भले ही करोड़ों में हो, लेकिन यहां भी लोग सीवर जाम की समस्या से बेहद परेशान रहते हैं. सीवर लाइन की समस्या दूर नहीं किए जाने से जलभराव की भी समस्या हो जाती है. हालांकि इस बार थोड़ा सा काम तो आप सरकार ने कराया है. लेकिन अब उम्मीद है कि अरविंद केजरीवाल की सरकार और ध्यान देकर इस तरह की समस्याओं से पूरी तरह निजात दिलाएगी.
(प्रतीकात्मक फोटो.)


कालकाजी में आतिशी ने दिलचस्प बनाया चुनाव

आप की स्टार आतिशी मार्लेना ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्नातक हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में आप ने पूर्वी दिल्ली सीट से आतिशी को उम्मीदवार बनाया था. बीजेपी के गौतम गंभीर ने एक दिलचस्प मुकाबले में आतिशी को मात दी थी. पूर्वी दिल्ली से गौतम गंभीर को 6 लाख से अधिक वोट मिले थे. इस सीट पर दूसरे नंबर पर कांग्रेस के अरविंदर सिंह लवली और तीसरे नंबर पर आतिशी रहीं थीं.

पंजाबी और सिक्खों का कहा जाता है कालकाजी

गौरतलब रहे कि कालकाजी विधानसभा सीट के अंतर्गत महारानी बाग, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, भारत नगर, ईस्ट ऑफ कैलाश, सुखदेव विहार, गोविंदपुरी इलाके शामिल हैं. यहां बड़ी संख्या में पंजाबी और सिख समुदाय के लोग रहते हैं. हालांकि मीडिया रिपोटर्स के मुताबिक जातीय समीकरण के आधार पर एक अलग-अलग धर्मों और जातियों का एक आंकड़ा यह भी बताया जाता है कि यहां पर 8 फीसदी सिख आबादी, 25 पंजाबी, 22 ओबीसी, 10 ब्राह्मण, 9 वैश्य, 4 गुर्जर, एससी 15,  मुस्लिम 6 और दो फीसदी अन्य हैं.

सियासी आईने में कालकाजी विधानसभा

जानकारों की मानें तो कालकाजी विधानसभा क्षेत्र में 1.64 लाख कुल वोटर्स हैं. इसमें पुरुष वोटरों की संख्या 92 हजार और महिला वोटरों की संख्या 72 हजार है. जबकि 11 वोटर थर्ड जेंडर कैटेगिरी के हैं. आंकड़ों के मुताबिक यहां के 40 पर्सेंट वोटर झुग्गी के हैं. आमतौर पर इस सीट पर टक्कर कांग्रेस और बीजेपी की होती थी, लेकिन 2015 के दिल्ली चुनाव में आम आदमी पार्टी के विधायक अवतार सिंह कालका ने जीत दर्ज कराई थी.

Congress (Demo Pic)


20 हजार वोट से जीता था आप उम्मीदवार

कालकाजी विधानसभा में 1993 में बीजेपी की उम्मीदवार पूर्णिमा सेठी ने जीत हासिल की. साल 1998 से 2008 तक कांग्रेस के सुभाष चोपड़ा विधायक रहे. 2013 के चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार हरमीत सिंह कालका ने इस सीट पर जीत दर्ज कराई थी. लेकिन 2015 में केजरीवाल की लहर के सामने बीजेपी के उम्मीदवार टिक नहीं पाए और आप के उम्मीदवार अवतार सिंह ने करीब 20 हजार वोटों से जीत हासिल की थी. 2015 के चुनावों में आप उम्मीदवार को 55,104 वोट और बीजपी के सतप्रकाश रणा को 35,335 वोट मिले थे. जबकि तीसरे नंबर पर कांग्रेस के सुभाष चोपड़ा रहे और उन्हें 13,552 वोट मिले थे.
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First published: January 24, 2020, 1:08 PM IST
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