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आरके पुरम चौपाल: यहां राष्ट्रवाद से लेकर पानी और अवैध कॉलोनियां हैं मुद्दा
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News18Hindi
Updated: January 30, 2020, 12:20 PM IST
आरके पुरम चौपाल: यहां राष्ट्रवाद से लेकर पानी और अवैध कॉलोनियां हैं मुद्दा
प्रतीकात्मक फोटो.

इस साथ विधानसभा में 22 झुग्गी बस्ती और अवैध कॉलोनियां हैं. वसंत विहार और आनंद निकेतन जैसी पॉश कॉलोनी भी हैं. लिहाजा आर के पुरम के हर इलाके में आम लोगों के अलग-अलग मुद्दे, राय और शिकायतें हैं.

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  • Last Updated: January 30, 2020, 12:20 PM IST
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नई दिल्ली. रामकृष्‍ण पुरम (RK Puram) के नाम से मशहूर यह इलाका नई दिल्‍ली लोकसभा (New Delhi Lok sabha) क्षेत्र विधानसभा है. दिल्ली वाले ही नहीं बाहर से भी आने वाले लोग आरके पुरम को उसके पूरे नाम से नहीं जानते हैं. हर कोई इसे सिर्फ आरके पुरम के नाम से भी पहचानता है. जानकारों की मानें तो आर के पुरम विधानसभा में 3 वार्ड आरके पुरम, बसंत विहार (Basant Vihar) और मुनिरका (Munirka) हैं. साथ ही 4 गांव है मुनिरका गांव, वसंत गांव मोहम्मदपुर गांव और मोती बाग गांव हैं. इसके साथ ही इस विधानसभा में 22 छोटी-बड़ी झुग्गी बस्ती और अवैध कॉलोनियां हैं. वसंत विहार और आनंद निकेतन जैसी दो पॉश कॉलोनी भी हैं. लिहाजा आर के पुरम विधानसभा के हर इलाके में आम लोगों के अलग-अलग मुद्दे, राय और अलग-अलग शिकायतें हैं.

सियासी जानकारों की मानें तो आरके पुरम विधानसभा सीट पर पहला चुनाव 1972 में कराया गया था. तब यहां से कांग्रेस के जगदीश चंद भारतीय जनसंघ के नेता ओंकार सिंह को हराकर विधायक बने थे. मौजूदा वक्त में आम आदमी पार्टी की प्रमिला टोकस यहां से विधायक हैं. इस सीट पर सबसे ज्‍यादा 4 बार कांग्रेस उम्मीदवार ने जीत हासिल की है. लेकिन अब यह सीट आम आदमी पार्टी के पास है. 1950 में मुनिरका के किसानों की जमीन अधिग्रहीत कर संत रामकृष्‍ण परमहंस के नाम से बसाई गई कॉलोनी वर्तमान में दिल्‍ली के पॉश इलाकों में गिनी जाती है. इस कॉलोनी में बड़ी संख्‍या में केंद्रीय कर्मचारियों के मकान हैं. वर्तमान में इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कारपोरेट घराने भी हैं. दिल्‍ली का यह इलाका आधुनिक शॉपिंग मॉल्स, व्‍यापारिक संस्‍थान और प्रसिद्ध स्‍कूल-कॉलेज के लिए भी चर्चा में रहता है.

इस सीट पर पूर्वांचल और उत्तराखण्ड के 50 हजार से ज्यादा वोट हैं. दोनों ही लोग यहां की अवैध कॉलोनियां और झुग्गियों में रहते हैं. इस तरह के इलाकों में रहने के चलते समस्याएं भी बहुत सारी हैं. कॉलोनी अवैध हैं तो पीने के पानी की समस्या, सीवर की समस्या और सबसे बड़ी बात कि हमे आधार और पैन कार्ड बनवाने के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं. पहचान पत्र तो छोड़िए हमारी कोई पानी और सीवर की समस्या तक को सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है.

मनोज तिवारी (फाइल फोटो)


यह कहना है उत्तराखण्ड के रहने वाले एमबी राना का. न्यूज18 हिन्दी को राना ने बताया कि हर एक सियासी पार्टी यहां पूर्वांचल और उत्तराखण्ड के रहने वाले लोगों के वोट पाना चाहती है. लेकिन चुनाव होने के बाद फिर कोई सुनवाई को भी तैयार नहीं होता है. हां, लेकिन इतनी गनीतमत जरूर है कि अभी जो हमारी विधायक हैं वो जैसे-तैसे हमारे इलाकों में साफ-सफाई और पानी का थोड़ा बहुत इंतजाम करा देती हैं.

आरके पुरम के पॉश इलाकों बसंत विहार और मुनिरका एनक्लेव गए तो वहां लोग राष्ट्रवाद की बात करते हैं और राष्ट्रीय मुद्दों को ही समस्या मानकर वोट देने की बात कहते हें. लेकिन जब इस विधानसभा के गांवों में जाते हैं तो वहां बिजली, सड़क, पानी, सीवर, झुग्गी बस्ती में पक्का मकान, पीने की पानी, सफाई, स्कूल और स्वास्थ्य की मांग करते हैं. मोहम्मदपुर गांव के रहने वाले शौकीन ने बताया कि यहां दूर-दूर तक सिर्फ एक मोहल्ला क्लीनिक मुनिरका गांव में हैं.

सीएम अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)
अब पूरी विधानसभा में आप कहीं भी रहते हों, लेकिन अगर आपको मोहल्ला क्लीनिक में दिखाना है तो मोहम्मदपुर गांव जाना पड़ेगा. नेहरू एकता कॉलोनी और जेपी कॉलोनी में पानी की बहुत भीषण समस्या है. लोग टैंकरों पर आश्रित रहते हैं. इधर-उधर जो पीने के लायक पानी मिल जाता है तो वहां भीड़भाड़ बहुत रहती है. इसके साथ ही कॉलोनियों की सड़कें भी जर्जर है जिसको लेकर बहुत ज्यादा शिकायतें हैं.

सियासी नज़र में आरके पुरम के चुनाव

आरके पुरम विधानसभा की यह खासियत है कि यह कांग्रेस का गढ़ रही है. 15 साल तक कांग्रेस ने यह सीट अपने कब्जे में रखी है. दिल्ली विधानसभा चुनाव-2013 में भारतीय जनता पार्टी के अनिल शर्मा ने यह सीट जीती थी, लेकिन वह महज 15 महीने तक ही विधायक रह पाए. 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा के एतिहासिक चुनावों में नई नवेली पार्टी आप के उम्मीदवार ने कांग्रेस और बीजेपी से छीन ली.

दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचार प्रसार जोरों पर है.


आरके पुरम में तकरीबन 1.56 लाख वोटर हैं. खास बात यह है कि यहां पूर्वांचल और उत्तराखंड के लोगों का खासा बहुमत है. किसी भी उम्मीदवार की हार-जीत यह दो लोग ही करते हैं. यहां सरकारी और प्राइवेट कर्मचारी वर्ग के लोग ज्यादा रहते हैं.

2015 के चुनावों पर एक नज़र

आर के पुरम विधानसभा सीट पर 156 मतदान केन्द्र बनाए गए हैं. दिल्ली विधानसभा चुनाव-2015 में यहां पर कुल 64.14 फीसदी मतदान हुआ था. चुनावों के दौरान बीजेपी को 36.96 फीसदी वोट, कांग्रेस को 4.2 और आम आदमी पार्टी को सबसे ज्यादा 56.77 फीसद वोट मिले थे.

(फाइल फोटो)


विधानसभा चुनाव 2015 में किसे-कितने वोट मिले

प्रमिला टोकस(आम आदमी पार्टी)- 54,645 (57.97) फीसदी

अनिल कुमार शर्मा(बीजेपी)- 35,577 (37.74) फीसदी

लीलाधर भट्ट (कांग्रेस)- 4,042 (4.28) फीसदी

विधानसभा चुनाव 2013 में किसे-कितने मिले वोट

अनिल कुमार शर्मा (बीजेपी)- 28,017 (33.17%)

शाजिया इल्मी (आम आदमी पार्टी)- 27,691(32.78%)

बरखा सिंह(कांग्रेस)- 19,679 (23.30%)

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First published: January 30, 2020, 12:20 PM IST
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