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चौपाल: आज भी टैंकर से पानी खरीदकर पी रहा है तुगलकाबाद

News18Hindi
Updated: January 16, 2020, 12:29 PM IST
चौपाल: आज भी टैंकर से पानी खरीदकर पी रहा है तुगलकाबाद
तुगलकाबाद का किला.

यहां के सियासी समीकरण को समझने के लिए हम बता दें कि गयासुद्दीन का तुगलकाबाद आज भी टैंकर से पानी खरीदकर पी रहा है, यह यहां की सबसे बड़ी समस्या है.

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  • Last Updated: January 16, 2020, 12:29 PM IST
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नई दिल्ली. गयासुद्दीन तुगलक (Ghiyasuddin tughlaqabad) का किला, रेलवे (Railway) का बड़ा कंटेनर डिपो (Container Depot) और इंडियन एयर फोर्स (Indian Air Foce Station) का स्टेशन. कुल मिलाकर यह तीन बड़ी चीजें हैं जो तुगलकाबाद (Tughlaqabad ) में दूर से ही दिखाई पड़ती हैं. हरियाणा (Haryana)-दिल्ली (Delhi) के बॉर्डर पर बसे इस इलाके की अपनी ऐसी कोई और पहचान नहीं है कि जिसके चलते यह कभी मीडिया या आमजन के बीच सुर्खियां बने.

बावजूद इसके तुगलकाबाद को मीडिया (Media) में जगह मिलती रहती है, लेकिन उसके पीछे की वजह दूसरी है. ऐसी वजह जिसे किसी की पहचान कहना और बताना उस इलाके के साथ नाइंसाफी होगी. फिर भी यहां के सियासी समीकरण को समझने के लिए हम बता दें कि गयासुद्दीन का तुगलकाबाद आज भी टैंकर से पानी खरीदकर पी रहा है, यह यहां की सबसे बड़ी समस्या है.

"मेरी उम्र 28 साल है, लेकिन कभी भी हमने आराम से पानी नहीं पिया. पानी खरीदकर पीना या फिर मारा-मारी के बीच पीने के पानी को घर तक लाना. पढ़ाई से लेकर आज के वक्त तक कभी पानी की समस्या को दूर होते नहीं देखा. अब यह समस्या हमारे आने वाली पीढ़ी के हिस्से में चली गई है." यह कहना है तुगलकाबाद के रहने अमित तोमर का.



अमित तोमर ने न्यूज18 हिन्दी से बात करते हुए बताया कि पिछले साल दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल इस इलाके में दौरे पर आए थे. इसी दौरान यहां के बाशिंदों ने सीएम से शिकायत करते हुए कहा था कि पाइप लाइन तो बिछा दी गई है लेकिन पानी नहीं मिल रहा है और न ही टैंकर से पानी बांटा जा रहा है. इसके जवाब में सीएम केजरीवाल ने कहा था कि अब टैंकर नहीं आएगा, बल्कि आप सबके घरों के अंदर नल में पानी आएगा. लेकिन आजतक ऐसा हो नहीं पाया.

सुबह से शाम तक आप तुगलकाबाद की किसी भी सड़क पर निकल जाइए आपको सड़कों पर दौड़ते पानी के छोटे-बड़े टैंकर दिखाई दे जाएंगे. लेकिन यह सरकारी नहीं हैं. दिल्ली जल बोर्ड के टैंकर यदा-कदा ही दिखाई पड़ते हैं. वो भी पता नहीं इस इलाके के होते हें या कहीं और से भेजे जाते हैं. पानी की दर्दभरी यह टीस है मोहम्मद सलीम की.

मोहम्मद सलीम का कहना है कि कुछ लोग तो सक्षम हैं जो जैसे-तैसे जुगाड़ कर पीने का पानी अपने घर के दरवाजे तक मंगा लेते हैं. लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी उस गरीब की है जो अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ टैंकर माफिया पर लुटाने को मजबूर है. यहां सीएम अरविंद केजरीवाल आए थे. तुगलकाबाद में निजी बोरवेल से पानी चोरी कर उसे घर-घर में बेचने की शिकायतें भी की गईं थी. बताया गया था कि कैसे एक-एक ड्रम पानी खरीदने के लिए अपनी मेहनत की कमाई लुटानी पड़ती है. लेकिन अफसोस की आज भी टैंकर से ही पानी खरीदकर पीना पड़ता है.

2 बार सांसद और 3 बार बने विधायक, फिर भी नहीं आया पानी

बीजेपी के रमेश बिधूड़ी 2014 में पहली बार सांसद बने और मौजूदा सांसद भी हैं. वहीं सांसद बनने से पहले 3 बार तुगलकाबाद विधानसभा से विधायक भी चुने गए. फिर 2015 में आम आदमी पार्टी के साहीराम पहलवान बीजेपी के गढ़ को तोड़ते हुए विधायक बने, लेकिन बावजूद इसके पूरी-पूरी पीढ़ियां पानी के दर्द को सहने के लिए मजबूर हैं. आज भी नल की टोंटियों से नहीं टैंकरों से पानी निकलता है. इतना ही नहीं पानी को लेकर क्षेत्र में आए दिन मारपीट की घटनाएं भी होती रहती हैं.

तुगलकाबाद का किला.


यह समस्याएं भी उठती रही हैं क्षेत्र में

तुगलकाबाद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इंदिरा कल्याण विहार की समस्याओं को लेकर लगातार 12 घंटे का धरना दिया जा चुका है. धरने में शामिल लोगों की मांग थी कि इंदिरा कल्याण विहार के बीच से बहने वाले मुख्य नाले को पक्का कर कवर किया जाए. मोहल्ला क्लीनिक की व्यवस्था हो. पानी के लिये घर-घर नल लगे. एमसीडी स्कूल में साफ-सफाई, पीने योग्य पानी, साफ शौचालय आदि बुनियादी सुविधाओं की अच्छी व्यवस्था हो. इंदिरा कल्याण विहार को सांसद गोद लें और यहां की सफाई व्यवस्था को ठीक करें.

1972 में विधानसभा बना था तुगलकाबाद

तुगलकाबाद को 1972 में विधानसभा क्षेत्र घोषित किया गया था. यहां के पहले चुनाव में कांग्रेस के प्रेम सिंह विधायक चुने गए थे. उन्‍होंने भारतीय जनसंघ के नलेता कालका दास का करारी शिकस्‍त दी थी. कांग्रेस और भाजपा के लिए चुनावी अखाड़ा रही है. लेकिन मौजूदा वक्त में यह सीट आप के कब्जे में है. यहां से आम आदमी पार्टी के साहीराम पहलवान विधायक हैं. प्रेम नगर, ओखला फेस 1,2,3, तेहखंड गांव, संजय कॉलोनी, पहलादपुर, लाल कुआं और विश्कर्मा कॉलोनी में रहने वाले मुस्लिम और एसी वोटर यहां होने वाले विधानसभा चुनावों को खासा प्रभावित करते हैं.

तुगलकाबाद का किला.


1.60 लाख वोटरों की विधानसभा है तुगलकाबाद

सियासी जानकारों की मानें तो तुगलकाबाद विधासनभा सीट करीब करीब 1.60 लाख वोटरों की हैं. इस विधानसभा में एक लाख पुरुष तो करीब 60 हजार महिला वोटर्स हैं. हार-जीत के लिहाज से यह सीट खासी उठापटक वाली रही है. परिणाम आने से पहले तक किसी भी पार्टी का कोई भी उम्मीदवार वोटरों के रूख को भांपने में नाकाम रहा है.

संत रविदास का मंदिर भी हो सकता है मुद्दा

हाल ही में तुगलकाबाद में गुरु संत रविदास का मंदिर हटा दिया गया था. जिसके बाद दिल्ली में खासा बवाल हुआ था. कई दिनों तक सड़कों पर प्रदर्शन चला था. तोड़फोड़ और मारपीट के आरोप भी लगे थे. मंदिर गिराने के विरोध में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी और मध्यप्रदेश से भीम सेना के कार्यकर्ता प्रमुख चंदेशखर की अगुवाई में प्रदर्शन करते हुए हिंसा पर उतर आए थे. चंद्रशेखर सहित दर्जनों लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. कई दिनों तक चन्द्रशेखर अपने समर्थकों के साथ जेल में बंद रहा था.

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First published: January 15, 2020, 5:02 PM IST
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