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दिल्ली में 21 साल से बीजेपी की सत्ता का वनवास क्या तोड़ सकेंगे 'बिहार के लाला'?

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Updated: January 8, 2020, 4:48 PM IST
दिल्ली में 21 साल से बीजेपी की सत्ता का वनवास क्या तोड़ सकेंगे 'बिहार के लाला'?
मनोज तिवारी दिल्ली BJP के अध्यक्ष हैं और इस बार CM पद के दावेदार भी माने जा रहे हैं.

मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) दिल्ली में बीजेपी की वो उम्मीद बन चुके हैं जो विधानसभा चुनाव (Delhi Election) में बेहद अहम भूमिका निभा सकते हैं. ये वो इतना बड़ा करिश्मा करने में सक्षम हैं?

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  • Last Updated: January 8, 2020, 4:48 PM IST
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मनोज तिवारी दिल्ली प्रदेश बीजेपी के वो सितारे हैं. जिनकी मौजूदगी से दिल्ली बीजेपी में नेतृत्व के संकट को दूर किया जा सका. बहुप्रतिभा के धनी मनोज तिवारी पिछले दो बार से सांसद हैं और नवंबर 2016  से दिल्ली प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष भी. ज़ाहिर है 48 साल के युवा नेता मनोज तिवारी दिल्ली में बीजेपी की वो उम्मीद बन चुके हैं जो विधानसभा चुनाव में बेहद अहम भूमिका निभा सकते हैं.

2016 में मिली दिल्ली की कमान

कहा जाता है कि शाह और मोदी की जोड़ी की काबिलियत बेहतर टैलेंट को पहचान कर उन्हें जोरदार तरीके से उभारने की है.  नवंबर 2016 में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने मनोज तिवारी के हाथों दिल्ली प्रदेश बीजेपी की बागडोर सौंप दी और पिछले कई चुनाव से प्रदेश का चुनाव हार रही बीजेपी में जान फूंकने को लेकर उन्हें आगे बढ़कर नेतृत्व करने का मौका भी दे दिया. ज़ाहिर है अमित शाह साल 2013 में डॉ हर्षवर्धन और साल 2015 में साफ सुथरी इमेज रखने वाली आईपीएस किरण बेदी के हाथों बीजेपी के नेतृत्व दिए जाने का रिजल्ट देख चुके हैं.

पिछले कुछ सालों में जिस तरह पूर्वांचल के लोगों की आबादी दिल्ली में बढ़ी है उसको ध्यान में रखते हुए पहले मनोज तिवारी को उत्तरी पूर्वी दिल्ली से लोकसभा का टिकट दिया गया जिसमें वो विजयी हुए. इसके बाद उन्हें  प्रदेश के संगठन की कमान सौंपकर बीजेपी को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी गई.

2019 में बीेजेपी ने जीती लोकसभा की 7 सीटें

साल 2019 में बीजेपी ने सातों लोकसभा सीटें जीतकर और साल 2017 में एमसीडी पर परचम लहराकर साबित कर दिया कि मनोज तिवारी प्रदेश की बीजेपी में जान फूंकने में सफल रहे हैं. वैसे ये क्रेडिट पीएम मोदी को जाता है लेकिन संगठन के स्तर पर पार्टी की मजबूती के बगैर सातों सीटें जीतना और नगर निगम के चुनाव में विपक्षियों को धूल चटाना मुश्किल होता.

मनोज तिवारी की असली परीक्षा दिल्ली विधानसभा चुनाव के होगी जहां आम आदमी पार्टी और कांग्रेस जैसी पार्टियां चुनाव मैदान में होंगी. ऐसे में कड़ी टक्कर और मुकाबले के बीच साल 2019 की लोकसभा चुनाव की तरह जीत हासिल करने की जिम्मेदारी उन पर होगी.2009 में लोकसभा चुनाव हार गए थे

वैसे बीजेपी ज्वाइन करने से पहले मनोज तिवारी साल 2009 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव गोरखपुर से लड़ चुके हैं और योगी आदित्यनाथ के हाथों पराजित हो चुके हैं. उस समय मनोज तिवारी पूर्वांचल के विकास के लिए चुनाव लड़ने का मन बनाया था. लेकिन 5 साल बाद बीजेपी का दामन थाम अपनी राजनीति को चमकाने का प्रयास लगातार कर रहे हैं.

मनोज तिवारी ने रामलीला मैदान में बाबा रामदेव  और जंतर मंतर पर अन्ना आंदोलन को समर्थन देकर इरादा जाहिर कर दिया था कि वो एक्टिव पॉलिटिक्स में खासी रूचि रखते हैं.

दिग्गजों को हराकर बनाई साख

यही वजह है कि दिल्ली लोकसभा चुनाव में साल 2014 में कदम रखते ही उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी आम आदमी पार्टी के आनंद कुमार और साल 2019 में कांग्रेस की दिग्गज शीला दिक्षित को हराने में कामयाबी हासिल की.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा हासिल कर चुके मनोज तिवारी बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं. लगभग 75 से ज्यादा भोजपुरी फिल्में और दो हिन्दी फिल्मों में काम कर चुके मनोज तिवारी भोजपुरी और हिंदी भाषा में 4 हजार से ज्यादा गीत गा चुके हैं.

जिया हो बिहार के लाला....गाना रहा सुपरहिट

भारतीय सिनेमा के 100 साल पूरे होने के मौके पर वो उन 42 लोगों में से एक थे जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत किया गया. वहीं बिग बॉस सीजन 4 में हिस्सा लेकर और कई प्रसिद्ध टीवी शो में अपनी आवाज़ देकर और होस्ट कर मनोज तिवारी ने सफलता के कई आयाम गढ़े हैं. गैंग्स ऑफ वासेपुर का चर्चित गाना जिया हो बिहार के लाला...जिया तू हजार साला जैसे गाने को मनोज तिवारी ने अपनी सुरीली आवाज से सुपर डुपर हिट कराया.

ज़ाहिर है, अभिनेता, निर्माता और गायिकी की दुनिया में सुपर हिट मनोज तिवारी राजनीति में उस दिन सुपर हिट साबित होंगे जब इनके नेतृत्व में बीजेपी आने वाले विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने में कामयाब होगी. फिलहाल मनोज तिवारी सीनियर और यंग नेताओं में जबर्दस्त कॉर्डिनेशन कायम कर प्रदेश में कमल का फूल खिलवाने के लिए प्रयासरत हैं जो 21 सालों से दिल्ली में सरकार बनाने से बंचित रही है.

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First published: January 6, 2020, 3:02 PM IST
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